NASA अंतरिक्ष में खोजेगा 'दूसरी दुनिया', लॉन्च किया स्पेस टेलीस्कोप

NASA ने Nancy Grace Roman Space Telescope को फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से सफलतापूर्वक लॉन्च किया है. यह टेलीस्कोप पृथ्वी से 15 लाख किलोमीटर दूर Sun-Earth Lagrange Point-2 (L2) पर स्थापित किया जाएगा, जहां से यह ब्रह्मांड के बड़े हिस्से का सर्वे करेगा.

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नासा ने रविवार को नैंसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप लॉन्च किया गया है नासा ने रविवार को नैंसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप लॉन्च किया गया है

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 30 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 7:32 PM IST

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA के Nancy Grace Roman Space Telescope को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया गया है. यह टेलीस्कोप रविवार को अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित NASA के कैनेडी स्पेस सेंटर के लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39A से SpaceX के Falcon Heavy रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष के लिए रवाना हुआ. भारतीय समय के मुताबिक इसकी लॉन्चिंग शाम करीब 4:57 बजे हुई.

सफल लॉन्चिंग के साथ ही Roman Space Telescope ने अंतरिक्ष में अपनी मंजिल की ओर सफर शुरू कर दिया है. इसे पृथ्वी से करीब 15 लाख किलोमीटर दूर Sun-Earth Lagrange Point-2 यानी L2 के आसपास स्थापित किया जाएगा. यहां पहुंचने में टेलीस्कोप को करीब एक महीने का समय लगने की उम्मीद है.

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पृथ्वी से 15 लाख KM दूर होगा ठिकाना

Roman Telescope किसी सामान्य सैटेलाइट की तरह पृथ्वी की परिक्रमा नहीं करेगा. इसे सूर्य और पृथ्वी के L2 एरिया के आसपास एक निर्धारित ऑर्बिट में रखा जाएगा. इस जगह से टेलीस्कोप को अंतरिक्ष का विशाल और अपेक्षाकृत बिना रुकावट वाला नजारा मिल सकेगा.

L2 की यात्रा के दौरान Roman अपने ऑनबोर्ड प्रोपल्शन सिस्टम का इस्तेमाल कर जरूरी बदलाव करेगा, जिससे वह अपनी निर्धारित कक्षा तक पहुंच सके. हालांकि L2 एरिया में पहुंचने के तुरंत बाद वैज्ञानिक अध्ययन शुरू नहीं होंगे.

NASA इसके लिए करीब तीन महीने की कमीशनिंग प्रक्रिया पूरी करेगा. इस दौरान इंजीनियर टेलीस्कोप के सिस्टम और वैज्ञानिक उपकरणों को सक्रिय करने के साथ उनकी जांच करेंगे. सभी सिस्टम ठीक से काम करने की पुष्टि होने के बाद इसे वैज्ञानिक अभियानों के लिए तैयार किया जाएगा.

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क्यों खास है Roman Space Telescope?

Nancy Grace Roman Space Telescope को ब्रह्मांड में किसी एक खगोलीय पिंड पर फोकस करने के बजाय आसमान के बेहद बड़े हिस्से का सर्वे करने के लिए डिजाइन किया गया है. इसका 2.4 मीटर का प्राइमरी मिरर आकार में Hubble Space Telescope के मिरर के लगभग बराबर है.

लेकिन इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका Wide Field Instrument है. यह एक बार में Hubble के मुकाबले कम से कम 100 गुना बड़े एरिया का अवलोकन कर सकता है. इससे वैज्ञानिक अपेक्षाकृत कम समय में ब्रह्मांड के विशाल हिस्से से डेटा जुटा सकेंगे.

Roman Telescope के प्रमुख उद्देश्यों में ब्रह्मांड की दो बड़ी पहेलियों डार्क एनर्जी और डार्क मैटर की स्टडी शामिल है. इसके अलावा यह आकाशगंगाओं के विकास को समझने और हमारे सौरमंडल से बाहर मौजूद ग्रहों यानी एक्सोप्लैनेट्स की खोज में भी मदद करेगा.

James Webb से कितना अलग?

James Webb Space Telescope अंतरिक्ष में मौजूद खास खगोलीय पिंडों को बेहद बारीकी से देखने के लिए जाना जाता है, जबकि Roman Telescope की भूमिका कुछ अलग होगी. Roman एक साथ अंतरिक्ष के बड़े हिस्से का सर्वे कर ब्रह्मांड की व्यापक तस्वीर तैयार करेगा.

कमीशनिंग और परीक्षण पूरा होने के बाद Roman अपने वैज्ञानिक सर्वे शुरू करेगा. इससे ब्रह्मांड का एक विशाल नक्शा तैयार होने की उम्मीद है और मिलने वाला डेटा खगोल विज्ञान के कई बड़े सवालों के जवाब तलाशने में वैज्ञानिकों की मदद कर सकता है.

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