मुंबई-कोलकाता के लाखों घर डूबेंगे, नजदीक आ रहा है समंदर: UN

UN की रिपोर्ट में कहा गया है दक्षिण एशिया के निचले डेल्टा इलाकों और भारत के कोलकाता और मुंबई और बांग्लादेश के ढाका जैसे शहरों में सबसे बड़ा असर लोगों के विस्थापन के रूप में दिख रहा है. यहां 1.4 करोड़ से अधिक लोगों के घर हमेशा के लिए पानी में डूबने का खतरा है.

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मुंबई के मरीन ड्राइव में समुद्र की लहरें. (File Photo: PTI) मुंबई के मरीन ड्राइव में समुद्र की लहरें. (File Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 9:35 PM IST

कोलकाता और मुंबई में लाखों लोगों के घरों पर अस्तित्व का खतरा मंडरा रहा है. संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि समुद्र का जलस्तर बढ़ने और हमेशा पानी में डूबे रहने के कारण यहां लाखों लोग "तुरंत खतरे" का सामना कर रहे हैं. 

संयुक्त राष्ट्र महासचिव की रिपोर्ट में कहा गया है कि समुद्र का बढ़ता जलस्तर अब कोई दूर का खतरा नहीं है, यह अभी हो रहा है और रिकॉर्ड किए गए इतिहास में किसी भी समय की तुलना में तेजी से हो रहा है. इसकी रफ़्तार भी बढ़ रही है, यूएन की ये रिपोर्ट कहती है कि समुद्र के जलस्तर में वृद्धि दुनिया भर की आबादी के लिए चाहे वे विकसित देश हों या विकासशील, सबसे गंभीर खतरों में से एक बन गई है.

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सोमवार को जारी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि समुद्र के जलस्तर में वृद्धि पहले से ही शहरी बुनियादी ढांचे, वाटर सिस्टम , परिवहन नेटवर्क, ऊर्जा ग्रिड, इमारतों और भूजल संसाधनों को नुकसान पहुंचा रही है.  इसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं. 

रिपोर्ट में कहा गया है, "दक्षिण एशिया के निचले डेल्टा इलाकों में जैसे भारत में कोलकाता और मुंबई और ढाका में सबसे बड़ा असर लोगों के बेघर होने का है. समुद्र का जलस्तर बढ़ने से यहां 1.4 करोड़ से ज़्यादा लोगों के घर हमेशा के लिए पानी में डूबने का तुरंत खतरा है."

इसमें आगे कहा गया है कि यह अंतर तटीय इलाकों के खतरे और जोखिम का आकलन करने वाले पैमानों को मज़बूत और व्यापक बनाने की ज़रूरत को दिखाता है। यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि इंसानी ज़िंदगी और विस्थापन से जुड़े सामाजिक जोखिमों को भी उतना ही महत्व मिले, जितना आर्थिक नुकसान के तौर पर मापे जाने वाले जोखिमों को मिलता है।

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रिपोर्ट के अनुसार समुद्र का जलस्तर बढ़ने से जन-स्वास्थ्य पर असर पड़ता है. इसके कारण तटीय इलाकों में स्वास्थ्य और साफ़-सफ़ाई के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचता है, पानी से होने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ता है, साफ-सफाई व्यवस्था बाधित होती है, चोट लगने और मौत का जोखिम बढ़ता है और मानसिक तनाव की समस्या भी बढ़ती है.

ग्लोबल वार्मिंग मुख्य वजह

समुद्र के जलस्तर में तेज़ी से हो रही बढ़ोतरी की मुख्य वजह इंसानों की वजह से हो रही ग्लोबल वार्मिंग है, जिसके कारण ग्लेशियर पिघल रहे हैं और गर्म होते महासागरों का पानी फैल रहा है. 

2014 और 2023 के बीच दुनिया भर में समुद्र का जलस्तर हर साल 4.7 मिलीमीटर बढ़ा. अकेले 2024 में समुद्र का जलस्तर 5.9 मिलीमीटर बढ़ा जो एक नया रिकॉर्ड है. इसकी मुख्य वजह महासागरों का बहुत ज़्यादा गर्म होना था. 

कुछ इलाकों में तो यह गर्मी पिछले 4,000 सालों में सबसे ज़्यादा थी. उम्मीद है कि 2050 तक यह रफ़्तार बढ़ती रहेगी क्योंकि क्लाइमेट सिस्टम में पहले से ही गर्मी जमा हो चुकी है. 

2012–2025 के दौरान समुद्र के जलस्तर में बढ़ोतरी की सालाना दर 4.75 मिलीमटर थी. 2025 में दुनिया भर में समुद्र का औसत जलस्तर 2024 के रिकॉर्ड-हाई लेवल के बराबर ही रहा, जबकि 2023–2024 के दौरान अल नीनो की वजह से महासागरों के बहुत ज़्यादा गर्म होने से इसमें लगभग 5 मिलीमीटर की तेज़ी से बढ़ोतरी हुई थी.

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समुद्र के जलस्तर में बढ़ोतरी पहले से ही लोगों के रहने-सहने, काम करने और अपने आस-पास के माहौल के साथ उनके तालमेल के तरीके को बदल रही है. रिपोर्ट के मुताबिक लगभग 77 करोड़ लोग यानी दुनिया की आबादी का करीब 10 प्रतिशत हिस्सा समुद्र के किनारे ऐसे इलाकों में रहते हैं जो हाई टाइड लाइन से 5 मीटर से भी कम ऊंचे हैं, जिससे उन पर बहुत ज़्यादा खतरा मंडरा रहा है. 
 

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