भारत में इस मार्च महीने में मौसम बहुत अजीब हो गया है. मैदानी इलाकों में इतनी गर्मी पड़ रही है कि पारा 40 डिग्री के पार चला गया है. वहीं पहाड़ों पर बारिश और बर्फबारी हो रही है, जिससे ठंडक मिल रही है. कई जगहों पर ओले भी गिर रहे हैं. अब सवाल ये उठ रहा है कि ये सब क्यों हो रहा है? क्या जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज) की वजह से है या कोई और कारण है?
क्या चल रहा है देश में?
पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और गुजरात के मैदानी इलाकों में तेज गर्मी है. कई जगहों पर तापमान 38-42 डिग्री तक पहुंच गया है. राजस्थान के पिलानी में 40.2 डिग्री दर्ज किया गया. गुजरात में भी 41 डिग्री तक तापमान है. हीट वेव (लू) का अलर्ट जारी है.
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उत्तर-पश्चिमी पहाड़ों में ठीक उल्टा हो रहा है. हिमाचल प्रदेश के पांच जिलों (मंडी, बिलासपुर, सोलन, कांगड़ा और कुल्लू) में ओले गिरने का येलो अलर्ट है. जम्मू-कश्मीर और हिमाचल में बारिश और बर्फबारी हो रही है. इससे पहाड़ी इलाकों को राहत मिल रही है, लेकिन मैदानों में गर्मी बनी हुई है. अगले 4-5 दिन कुछ जगहों पर बारिश के आसार हैं, लेकिन गर्मी अभी थमने वाली नहीं है.
वजह क्या है?
मुख्य वजह है पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance). यह एक तरह की हवा की प्रणाली है जो भूमध्य सागर से नमी लेकर आती है. जब यह हिमालय की पहाड़ियों से टकराती है तो बारिश, बर्फबारी और कभी-कभी ओले गिराते हैं. अभी एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है, इसलिए पहाड़ों में यह सब हो रहा है.
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मैदानों में गर्मी क्यों?
क्योंकि पिछले कई महीनों से कोई मजबूत पश्चिमी विक्षोभ नहीं आया. आसमान साफ है, एंटी-साइक्लोन (उच्च दबाव) बन गया है. पश्चिम से गर्म हवाएं आ रही हैं. इससे सूरज की गर्मी सीधे जमीन पर पड़ रही है. तापमान तेजी से बढ़ रहा है.
क्या क्लाइमेट चेंज का असर है?
हां, जलवायु परिवर्तन इसका बड़ा कारण बन रहा है. पश्चिमी विक्षोभ पहले सर्दियों में ज्यादा आते थे, अब उनका पैटर्न बदल गया है. आर्कटिक और भूमध्य सागर के गर्म होने से ये कमजोर हो गए हैं. नतीजा – सर्दी में कम बर्फबारी और मार्च में ही तेज गर्मी.
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क्लाइमेट चेंज की वजह से मौसम ज्यादा अनियमित हो गया है. गर्मी पहले शुरू हो रही है, बारिश और ओले अचानक और तेज हो रहे हैं. भारतीय मौसम विभाग (IMD) भी कह रहा है कि मार्च-मई 2026 में ज्यादातर जगहों पर तापमान सामान्य से ज्यादा रहेगा.
भविष्य में क्या होगा?
अगले कुछ दिनों में पहाड़ों में और बारिश-बर्फबारी हो सकती है. 14 मार्च के बाद एक और पश्चिमी विक्षोभ आने वाला है. लेकिन मैदानों में गर्मी बनी रहेगी. अप्रैल-मई में और तेज गर्मी पड़ने की आशंका है.
यह सब हमें बताता है कि मौसम अब पहले जैसा नहीं रहा. क्लाइमेट चेंज के साथ-साथ प्राकृतिक कारण भी हैं, लेकिन ग्लोबल वार्मिंग इसे और खराब बना रही है.
आजतक साइंस डेस्क