चीन के शिनजियांग की तियानशान पहाड़ियों में एक ऐसा दुर्लभ फूल पाया जाता है, जो देखने में भारत के ब्रह्म कमल जैसा लगता है. इसे स्नो लोटस कहा जाता है और इसका वैज्ञानिक नाम सौसुरिया इनवोलुक्राटा है. यह पौधा करीब 2400 से 4100 मीटर की ऊंचाई पर उगता है. इतनी ऊंचाई पर मौसम बहुत ठंडा होता है, हवा पतली होती है और सूरज की यूवी रेडिएशन भी ज्यादा होती है. फिर भी यह पौधा इन मुश्किल हालात में आसानी से बढ़ता है.
स्नो लोटस सिर्फ चीन में ही नहीं मिलता. यह कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और मंगोलिया के कुछ पहाड़ी इलाकों में भी पाया जाता है. चीन में यह खास तौर पर शिनजियांग के उत्तरी, मध्य और पश्चिमी हिस्सों में मिलता है. इसमें आमतौर पर जुलाई से अगस्त के बीच फूल आते हैं. फूल के आसपास की बड़ी पत्तियां इसे दूर से ब्रह्म कमल जैसा दिखाती हैं.
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तियानशान में कहां मिलता है स्नो लोटस?
स्नो लोटस ऊंचे पहाड़ी इलाकों में उगने वाला पौधा है. शिनजियांग की तियानशान रेंज में यह 2,400 से 4,100 मीटर की ऊंचाई पर पाया जाता है. यह पहाड़ी ढलानों, घाटियों, घास वाले इलाकों और चट्टानों के बीच उग सकता है. कई जगह यह चट्टानों की दरारों में भी दिखाई देता है.
इतनी ऊंचाई पर तापमान काफी कम रहता है. हवा भी मैदानी इलाकों के मुकाबले पतली होती है. वहां सूरज की यूवी रेडिएशन ज्यादा होती है. स्नो लोटस का पौधा ऐसे ही मौसम में बढ़ने के लिए बना है.
क्या स्नो लोटस ही ब्रह्म कमल है?
नहीं. दोनों देखने में मिलते-जुलते जरूर हैं, लेकिन ये अलग पौधे हैं. स्नो लोटस का वैज्ञानिक नाम सौसुरिया इनवोलुक्राटा है, जबकि भारत के ब्रह्म कमल का वैज्ञानिक नाम सौसुरिया ओवैलाटा है. दोनों एक ही सौसुरिया जीनस के पौधे हैं, लेकिन इनकी स्पीशीज अलग है.
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भारत में ब्रह्म कमल हिमालय के ऊंचे इलाकों में पाया जाता है. बॉटेनिकल सर्वे ऑफ इंडिया के रिकॉर्ड के मुताबिक यह करीब 3,800 से 4,600 मीटर की ऊंचाई पर उगता है. इसे जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में देखा गया है.
क्यों खास और दुर्लभ है ये फूल?
स्नो लोटस की जंगली आबादी पर पहले से दबाव रहा है. इसकी एक वजह इसे बड़ी मात्रा में जंगलों से इकट्ठा करना भी है. इस पौधे का इस्तेमाल पारंपरिक दवाओं में किया जाता रहा है. इसी वजह से चीन में इसके संरक्षण पर ध्यान दिया जा रहा है. हालांकि इसे दुनिया की लुप्तप्राय प्रजाति कहना सही नहीं होगा. केव की जानकारी के मुताबिक इसकी मौजूदा वैश्विक स्थिति ‘नॉट थ्रेटेंड’ है. यानी फिलहाल इसे दुनिया भर में खतरे में पड़ी प्रजाति की कैटेगरी में नहीं रखा गया है.
इस तरह तियानशान का स्नो लोटस देखने में भले ही ब्रह्म कमल जैसा लगे, लेकिन दोनों अलग पौधे हैं. खास बात यह है कि दोनों ही बहुत ऊंचे पहाड़ी इलाकों में उगते हैं, जहां ठंड और मौसम की मुश्किलें आम पौधों के मुकाबले काफी ज्यादा होती हैं.
आजतक साइंस डेस्क