बड़े शहरों में खुद का मकान खरीदना आसान नहीं है. इसलिए एक बड़ी आबादी किराये के मकान या फ्लैट में रहने को मजबूत है. ऐसे में ज्यादातर लोग किराए का घर चुनने के लिए सिर्फ बजट और लोकेशन पर ही ध्यान देते हैं. जबकि इसमें वास्तु शास्त्र से जुड़ी बातों का ध्यान रखना भी जरूरी होता है. ज्योतिषविद कहते हैं कि पुराने घरों, मकानों में नकारात्मक ऊर्जा या वास्तु दोष होने की संभावना अधिक रहती है. इसलिए किराए पर मकान लेने से कुछ खास बातों का ध्यान रखना जरूरी है.
ग्राउंड फ्लोर या ऊपरी मंजिल?
वास्तु शास्त्र के अनुसार, किराए के मकान के लिए ऊपरी मंजिल का चुनाव ज्यादा बेहतर माना जाता है. इसलिए हमेशा ग्राउंड फ्लोर की जगह फर्स्ट फ्लोर, सेकंड फ्लोर या उससे ऊपर के किसी फ्लोर का ही चुनाव करें. बहुत जरूरी होने पर या किसी विशेष स्थिति में ही ग्राउंड फ्लोर को चुनें.
घर में सूर्य की रोशनी
किराए का मकान या कमरा लेते समय यह सुनिश्चित करें कि उसमें सूर्य का प्राकृतिक प्रकाश पहुंचता हो. इसके लिए जरूरी है कि घर में बड़ी खिड़कियां और रोशनदान हों. ऐसी जगह को अधिक सकारात्मक माना जाता है. ऐसी जगह न सिर्फ सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, बल्कि सूर्य की पर्याप्त रोशनी से और भी कई फायदे होते हैं.
सुनसान जगहों से दूर
वास्तु के अनुसार, किराए का मकान लेते समय ध्यान रहे कि वो किसी सुनसान जगह, श्मशान, खंडहर हो चुकी पुरानी इमारत से दूर होना चाहिए. ऐसी जगहों पर नकारात्मक ऊर्जा का दबाव अधिक रहता है. इसलिए संभव हो तो ऐसी जगहों पर घर लेने से बचें.
मकान की कंडीशन
अक्सर लोग कम बजट के चक्कर में ऐसे घर, फ्लैट या मकान के चक्कर में पड़ जाते हैं जिसमें वास्तु दोष होने की संभावना बहुत ज्याद रहती है. अगर घर की दीवारों पर सीलन है तो उसे किराए पर लेने से बचें. घर में जाले हों या फर्श टूटा हुआ हो तो उसमें शरण न लें. अगर घर में स्विच बोर्ड या इलेक्ट्रिसिटी से संबंधित कोई और दिक्कत है तो ऐसी जगह भी न बसें.
घर पर पेड़ की अशुभ छाया
वास्तु शास्त्र के अनुसार, ऐसी मकान को किराए पर लेने से बचना चाहिए जिस पर कुछ खास वृक्षों की छाया पड़ती हो. खासतौर से अगर मकान पर पीपल, कांटेदार वृक्षया इमली के वृक्ष की छाया पड़ती हो तो उससे बचें. जबकि अशोक, नीम और शमी का पेड़ घर के सामने होना अच्छा माना जाता है.
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