Hindu Dharam: भारत की पहचान उसके प्राचीन और भव्य मंदिरों से है. देश के हर राज्य में ऐसे अनगिनत मंदिर हैं, जहां दर्शन करने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं. इनमें से कुछ मंदिर अपनी धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ रहस्यमयी परंपराओं और अनोखी विशेषताओं के लिए भी जाने जाते हैं. तो आइए जानते हैं भारत के ऐसे ही कुछ रहस्यमयी मंदिरों के बारे में.
करणी माता मंदिर, राजस्थान
राजस्थान के बीकानेर में स्थित करणी माता मंदिर देश के रहस्यमयी मंदिरों में से एक माना जाता है. यह मंदिर देवी करणी माता को समर्पित है, जिन्हें देवी दुर्गा का अवतार माना जाता है. माता की प्रतिमा मंदिर के गर्भगृह में स्थापित है और उनके दोनों ओर उनकी बहनों की प्रतिमाएं भी मौजूद हैं.
इस मंदिर की सबसे खास बात यहां रहने वाले हजारों चूहे हैं. मान्यता है कि मंदिर में करीब 25 हजार से ज्यादा चूहे रहते हैं. यहां आने वाले श्रद्धालु इन चूहों को दूध, मिठाई और प्रसाद खिलाते हैं. इनमें सफेद चूहों को विशेष रूप से पवित्र माना जाता है. मान्यता है कि इन्हें करणी माता और उनके परिवार से जुड़ा हुआ माना जाता है.
तिरुपति वेंकटेश्वर मंदिर, आंध्र प्रदेश
आंध्र प्रदेश में स्थित तिरुपति वेंकटेश्वर मंदिर देश के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है. मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से भगवान वेंकटेश्वर की पूजा करता है, उसकी मनोकामना पूरी होती है.
भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार यहां बाल भी दान करते हैं. मंदिर से जुड़ी एक मान्यता के अनुसार भगवान वेंकटेश्वर की प्रतिमा पर दिखाई देने वाले बाल असली हैं और कभी उलझते नहीं हैं. यह भी कहा जाता है कि मूर्ति के पास कान लगाने पर समुद्र की लहरों जैसी आवाज सुनाई देती है.
कामाख्या देवी मंदिर, असम
असम के गुवाहाटी में नीलांचल पर्वत पर स्थित कामाख्या देवी मंदिर देश के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है. पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब माता सती ने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में आत्मदाह किया, तब भगवान शिव उनके शरीर को लेकर तांडव करने लगे.
भगवान शिव को शांत करने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के अलग-अलग हिस्से किए. मान्यता है कि जहां माता सती का योनि भाग गिरा, वहीं कामाख्या देवी मंदिर स्थित है.
स्तंभेश्वर महादेव मंदिर, गुजरात
गुजरात में अरब सागर के तट पर स्थित स्तंभेश्वर महादेव मंदिर अपनी अनोखी विशेषता के लिए प्रसिद्ध है. यह मंदिर समुद्र और खंभात की खाड़ी से घिरा हुआ है.
इस मंदिर की खास बात यह है कि ज्वार बढ़ने पर मंदिर समुद्र के पानी में डूब जाता है और ज्वार उतरने के बाद दोबारा दिखाई देने लगता है. इसी वजह से यहां दर्शन करने का समय समुद्र के ज्वार-भाटे पर निर्भर करता है.
मेहंदीपुर बालाजी मंदिर, राजस्थान
राजस्थान के दौसा जिले में स्थित मेहंदीपुर बालाजी मंदिर भगवान हनुमान को समर्पित है. यहां देशभर से श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं. मंदिर को लेकर कई तरह की धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं और लोग नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति की कामना लेकर यहां पहुंचते हैं.
मंदिर में कई तरह की पारंपरिक धार्मिक प्रक्रियाएं भी की जाती हैं. यहां आने वाले श्रद्धालु बालाजी महाराज से अपनी परेशानियों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं.
अचलेश्वर महादेव मंदिर, धौलपुर
राजस्थान के धौलपुर जिले में स्थित अचलेश्वर महादेव मंदिर अपनी अनोखी मान्यता के लिए जाना जाता है. यह मंदिर राजस्थान और मध्य प्रदेश की सीमा के पास चंबल क्षेत्र में स्थित है.
मान्यता है कि यहां स्थापित शिवलिंग दिन में तीन बार अपना रंग बदलता है. सुबह इसका रंग लाल, दोपहर में केसरिया और शाम के समय सांवला दिखाई देने की बात कही जाती है.
वराह श्याम मंदिर, भीनमाल
राजस्थान के भीनमाल में स्थित वराह श्याम मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है. यह मंदिर काफी प्राचीन बताया जाता है और इससे कई धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं. मान्यता है कि भगवान वराह श्याम का स्वरूप बेहद विशाल है और उनके पैर पाताल लोक, सिर इंद्रलोक तथा हाथों में धरती होने की धार्मिक कल्पना की जाती है.
निष्कलंक महादेव मंदिर, भावनगर
गुजरात के भावनगर में कोलियाक तट से कुछ दूरी पर अरब सागर में स्थित निष्कलंक महादेव मंदिर बेहद अनोखा है. यहां समुद्र की लहरें रोज शिवलिंग का जलाभिषेक करती हैं. भक्त समुद्र का पानी कम होने पर पैदल चलकर मंदिर तक पहुंचते हैं. ज्वार बढ़ने के बाद मंदिर का बड़ा हिस्सा पानी में डूब जाता है और केवल मंदिर की पताका और कुछ हिस्सा ही दिखाई देता है. यहां पांच शिवलिंग एक ही चबूतरे पर स्थापित हैं. समुद्र में मंदिर की यह स्थिति इसे देश के अनोखे शिव मंदिरों में शामिल करती है.
लक्ष्मणेश्वर मंदिर, छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ के खरौद में स्थित लक्ष्मणेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित है. खरौद को धार्मिक रूप से छत्तीसगढ़ की काशी भी कहा जाता है. मान्यता है कि यहां स्थित शिवलिंग में एक लाख छेद हैं, इसलिए इसे लक्षलिंग या लखेश्वर भी कहा जाता है. कहा जाता है कि इनमें से एक छेद पाताल लोक से जुड़ा हुआ है, जिसमें डाला गया पानी नीचे चला जाता है. वहीं एक छेद हमेशा पानी से भरा रहता है, जिसे अक्षय कुंड कहा जाता है.
रंगनाथ स्वामी मंदिर, तमिलनाडु
तमिलनाडु के श्रीरंगम में स्थित रंगनाथ स्वामी मंदिर दुनिया के विशाल मंदिर परिसरों में गिना जाता है. यह मंदिर करीब 156 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है और भगवान रंगनाथ को समर्पित है. मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार, जिस स्थान पर भगवान रंगनाथ की प्रतिमा थी, वह समय के साथ जंगल में बदल गया था. बाद में चोल वंश के एक राजा को जंगल में भगवान की प्रतिमा मिली और इसके बाद मंदिर का विकास कराया गया.
हनुमंता मंदिर, मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश के भिंड जिले में स्थित यह हनुमान मंदिर अपनी अनोखी मान्यताओं के लिए जाना जाता है. स्थानीय लोगों का मानना है कि यहां भगवान हनुमान को डॉक्टर के रूप में भी पूजा जाता है. श्रद्धालु मानते हैं कि मंदिर में आकर भगवान हनुमान से प्रार्थना करने से उन्हें बीमारियों और परेशानियों से राहत मिलती है. इसी विश्वास के कारण दूर-दूर से लोग यहां दर्शन करने आते हैं.
कोणार्क सूर्य मंदिर, ओडिशा
ओडिशा का कोणार्क सूर्य मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है. यह मंदिर सूर्यदेव को समर्पित है और इसे विशाल रथ के आकार में बनाया गया है. मंदिर के रथ में 12 जोड़ी पहिए हैं, जिन्हें साल के 12 महीनों से जोड़कर देखा जाता है. इन पहियों की बनावट इतनी अनोखी है कि इन्हें देखकर समय का अनुमान लगाने की बात भी कही जाती है. कोणार्क मंदिर से जुड़ी कई रहस्यमयी कहानियां भी प्रचलित हैं, जिनमें मंदिर के विशाल चुंबक और हवा में मूर्ति के टिके होने की मान्यताएं शामिल हैं.
बिजली महादेव मंदिर, हिमाचल प्रदेश
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में स्थित बिजली महादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित है. यह मंदिर काफी ऊंचाई पर स्थित है और यहां से कुल्लू घाटी का सुंदर नजारा दिखाई देता है. मान्यता है कि यहां स्थापित शिवलिंग पर समय-समय पर बिजली गिरती है, जिससे शिवलिंग खंडित हो जाता है. इसके बाद मंदिर के पुजारी शिवलिंग के टुकड़ों को विशेष लेप की मदद से जोड़ते हैं और कुछ समय बाद शिवलिंग फिर अपने पुराने स्वरूप में दिखाई देने लगता है. स्थानीय मान्यता के अनुसार, भगवान शिव बिजली के रूप में प्रकट होकर क्षेत्र की रक्षा करते हैं.
श्री कृष्ण मठ मंदिर, उडुपी
कर्नाटक के उडुपी में स्थित श्री कृष्ण मठ मंदिर भगवान कृष्ण के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है. यहां भगवान कृष्ण की प्रतिमा के दर्शन एक छोटी खिड़की के नौ छेदों से किए जाते हैं, जिसे कनकन किंडी कहा जाता है.
भगवान कृष्ण की प्रतिमा को बेहद सुंदर तरीके से सजाया जाता है. विशेष अवसरों पर उन्हें सोने और अन्य आभूषणों से सजाया जाता है. यहां दर्शन करने के लिए हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.
aajtak.in