Vat Savitri 2026: वट सावित्री पूजा का महामुहूर्त बस कुछ ही देर में, ये 54 मिनट सबसे शुभ

Vat Savitri 2026: आज मनाया जा रहा है वट सावित्री व्रत. जानिए पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त, बरगद पूजा की आसान विधि, कथा और व्रत टूटने पर किए जाने वाले सरल उपाय.

Advertisement
ज्येष्ठ अमावस्या तिथि आज सुबह 05:11 बजे से शुरू हो चुकी है. ज्येष्ठ अमावस्या तिथि आज सुबह 05:11 बजे से शुरू हो चुकी है.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 16 मई 2026,
  • अपडेटेड 10:20 AM IST

Vat Savitri Vrat 2026: आज देश भर में सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अच्छी सेहत के लिए वट सावित्री का व्रत रख रही हैं.  हिंदू धर्म में इस व्रत का बहुत बड़ा महत्व है. मान्यता है कि इसी दिन माता सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प और भक्ति से यमराज के हाथों से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस छीन लिए थे.  तभी से शादीशुदा महिलाएं अपने सुहाग की रक्षा के लिए हर साल ज्येष्ठ महीने की अमावस्या को यह व्रत रखती हैं. इस बार का वट सावित्री व्रत और भी खास है क्योंकि आज शनिवार होने की वजह से शनि जयंती और शनिश्चरी अमावस्या का बेहद शुभ संयोग भी बन रहा है. 

Advertisement

पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
ज्योतिषियों के मुताबिक, ज्येष्ठ अमावस्या तिथि आज सुबह 05:11 बजे से शुरू हो चुकी है, जो देर रात (अगले दिन सुबह) 01:30 बजे तक रहेगी. पूजा वैसे तो सुबह से की जा रही है, लेकिन पूजा करने का सबसे उत्तम और महाशुभ समय सुबह 11:50 बजे से दोपहर 12:44 बजे के बीच (अभिजीत मुहूर्त) है.  इस समय में की गई पूजा बहुत फलदायी मानी जाती है. 

पूजा की थाली में क्या-क्या होना चाहिए? 

अगर आप पूजा के लिए जा रही हैं, तो अपनी थाली में ये चीजें रखना न भूलें:

बांस का पंखा (जिससे बरगद के पेड़ और सत्यवान-सावित्री को हवा झली जाती है)

लाल या पीला कलावा (कच्चा सूत)

धूप, अगरबत्ती, घी का दीपक और कपूर

रोली, चंदन, हल्दी और अक्षत (साबुत चावल)

भीगे हुए चने, फल (विशेषकर आम और खरबूजा) और मिठाई

Advertisement

सुहाग का सामान (सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, आदि) और एक तांबे के लोटे में शुद्ध जल

बरगद के पेड़ की पूजा का महत्व और विधि
इस व्रत में बरगद (वट) के पेड़ की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बरगद के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव जी) तीनों देवों का वास होता है और यह पेड़ दीर्घायु (लंबी उम्र) का प्रतीक है. 

महिलाएं आज के दिन नए कपड़े पहनकर, पूरा 16 श्रृंगार करके बरगद के पेड़ को जल व दूध अर्पित करती हैं.  इसके बाद पेड़ पर हल्दी-कुमकुम का तिलक लगाकर फल-फूल चढ़ाती हैं.  फिर पेड़ के चारों ओर कच्चा सूत या कलावा लपेटते हुए 7, 11 या 108 बार परिक्रमा करती हैं और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं. अंत में हाथ में भीगे चने लेकर वट सावित्री की कथा सुनी जाती है. 

सुखी दांपत्य जीवन के लिए आज करें ये उपाय
चूंकि आज शनिवार भी है, इसलिए आज के दिन कुछ खास उपाय करने से वैवाहिक जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं:

पति-पत्नी मिलकर करें दीपदान: आज शाम को बरगद के पेड़ के नीचे या पीपल के पेड़ के पास सरसों के तेल का दीपक जलाएं. इससे शनि दोष दूर होता है.

भीगे चने का दान: आज पूजा में चढ़ाए गए भीगे चने और कुछ सिक्के किसी जरूरतमंद को दान करने से घर में बरकत आती है.

Advertisement

अगर गलती से व्रत टूट जाए तो क्या करें?
कई बार सेहत ठीक न होने, गर्भावस्था या अनजाने में महिलाओं से कोई गलती हो जाती है और व्रत टूट जाता है. ऐसी स्थिति में घबराने या मन छोटा करने की जरूरत नहीं है. शास्त्रों में इसके कुछ आसान उपाय बताए गए हैं:

माफी मांगें: अगर अनजाने में कुछ खा-पी लिया है, तो भगवान विष्णु और माता सावित्री के सामने हाथ जोड़कर अपनी भूल के लिए माफी मांगें. भगवान भाव के भूखे होते हैं, वे क्षमा कर देते हैं. 

दान-पुण्य करें: व्रत टूटने के दोष से बचने के लिए किसी जरूरतमंद महिला या ब्राह्मण को अनाज, फल या सुहाग की सामग्री (जैसे सिंदूर, चूड़ियां) दान करें.

हवन या कीर्तन: मन की शांति और शुद्धि के लिए घर में छोटा सा गायत्री हवन कर सकती हैं या 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप कर सकती हैं.

व्रत का पारण (व्रत खोलना) कैसे करें?
वट सावित्री व्रत का पारण करने का भी खास नियम है.  कथा और परिक्रमा पूरी होने के बाद महिलाएं यमराज के प्रतीक के रूप में बरगद के पेड़ की एक कली (कोपल) और ७ भीगे हुए चने को पानी के साथ निगलकर अपना व्रत खोलती हैं. इसके बाद घर के बड़ों और सास के पैर छूकर आशीर्वाद लिया जाता है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement