6 मिनट 23 सेकंड का अंधेरा! जानिए कब और कहां दिखेगा सदी का सबसे बड़ा सूर्य ग्रहण?

Surya Grahan 2027: 2 अगस्त 2027 को लगेगा 21वीं सदी का सबसे लंबा सूर्य ग्रहण. दोपहर में 6 मिनट 23 सेकंड तक छा जाएगा घना अंधेरा. जानिए भारत पर इसका असर और पूरी जानकारी.

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2 अगस्त 2027 को लगेगा 21वीं सदी का सबसे लंबा सूर्य ग्रहण 2 अगस्त 2027 को लगेगा 21वीं सदी का सबसे लंबा सूर्य ग्रहण

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 03 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 11:00 AM IST

खगोल विज्ञान प्रेमियों और दुनिया भर के वैज्ञानिकों के लिए 2 अगस्त 2027 की तारीख किसी महाउत्सव से कम नहीं है.  इस दिन आसमान में एक ऐसी खगोलीय घटना घटने जा रही है, जो सदियों में बमुश्किल एक बार देखने को मिलती है.  यह 21वीं सदी का सबसे लंबा पूर्ण सूर्य ग्रहण (Total Solar Eclipse) होगा, जिसके दौरान चंद्रमा सूरज को पूरी तरह ढक लेगा. धरती के कई हिस्सों में दोपहर के वक्त ही रात जैसा घना अंधेरा छा जाएगा. 

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मुख्य विशेषताएं 
ग्रहण की अवधि: पूर्ण सूर्य ग्रहण का यह मुख्य चरण लगभग 6 मिनट और 23 सेकंड तक रहेगा. 

सदी का रिकॉर्ड: यह इस शताब्दी के सबसे लंबे पूर्ण सूर्य ग्रहणों में से एक है, जिसे लेकर वैज्ञानिकों में भारी उत्साह है.

खगोलीय महत्व: वैज्ञानिक इस दौरान सूर्य के कोरोना (बाहरी वायुमंडल) और सौर हवाओं का बेहद बारीकी से अध्ययन करेंगे. 

कहां-कहां दिखाई देगा यह महा-सूर्य ग्रहण?
वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष एजेंसियों के मुताबिक, इस अद्भुत सूर्य ग्रहण का सबसे शानदार और पूर्ण नजारा मुख्य रूप से उत्तरी अफ्रीका, दक्षिणी यूरोप और मध्य पूर्व (Middle East) के देशों में देखने को मिलेगा. जिन प्रमुख देशों और क्षेत्रों से यह स्पष्ट रूप से गुजरेगा, उनमें स्पेन, मोरक्को, अल्जीरिया, लीबिया, मिस्र, सऊदी अरब, यमन और सोमालिया शामिल हैं. 

मिस्र के ऐतिहासिक शहर लक्सर (Luxor) के पास इस ग्रहण की अवधि सबसे अधिक दर्ज की जाएगी, जिसे देखने के लिए दुनिया भर के खगोलविद् और पर्यटक अभी से अपनी तैयारियां कर रहे हैं. 

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क्या भारत में दिखाई देगा यह ग्रहण?
भारतीय खगोल प्रेमियों के मन में यह सवाल जरूर उठ रहा होगा कि क्या यह ग्रहण भारत में भी दिखाई देगा? आपको बता दें कि भौगोलिक स्थिति के कारण 2 अगस्त 2027 का यह पूर्ण सूर्य ग्रहण भारत से सीधे तौर पर नजर नहीं आएगा.  चूंकि यह घटना मुख्य रूप से अटलांटिक महासागर, यूरोप, अफ्रीका और अरब देशों के ऊपर से गुजरेगी, इसलिए भारतीय उपमहाद्वीप में इसका कोई प्रत्यक्ष प्रभाव या दृश्यता नहीं होगी.  हालांकि, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इसकी हर एक गतिविधि को ऑनलाइन माध्यमों और स्पेस एजेंसियों की लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए जरूर देखा जा सकेगा. 

क्यों होती है ऐसी घटना और इसका रोमांच?
खगोल विज्ञान के अनुसार, पूर्ण सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बिल्कुल बीच से गुजरता है और सूर्य के प्रकाश को पूरी तरह अवरुद्ध कर देता है.  इस दौरान कुछ पलों के लिए आसमान में तारे और ग्रह जगमगा उठते हैं, तापमान में अचानक गिरावट आ जाती है . पशु-पक्षियों का व्यवहार भी बदल जाता है.  6 मिनट से अधिक समय तक चलने वाला यह ब्लैकआउट अनुभव इंसानी जीवनकाल में बेहद दुर्लभ माना जाता है. 

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