Shardiye Navratri 2026: शरीर पर बोई जौ, गांव की खुशहाली के लिए महिला का अनोखा संकल्प

जौ नवरात्र के दौरान बोए जाने वाले जौ के अंकुर होते हैं, जिन्हें देवी आराधना और शुभता का प्रतीक माना जाता है. सामान्यतः इन्हें मिट्टी के पात्र या पूजा स्थल पर बोया जाता है. लेकिन झांसी में एक महिला ने गांव की खुशहाली के लिए अपने शरीर पर ही जौ बौने का संकल्प लिया है.

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जानकी देवी के शरीर पर जौ उगाए जाने की मान्यता के चलते विशेष धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं. (Photo: ITG) जानकी देवी के शरीर पर जौ उगाए जाने की मान्यता के चलते विशेष धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं. (Photo: ITG)

अजय झा

  • झांसी,
  • 18 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 12:43 PM IST

बुंदेलखंड की धरती पर देवी आराधना और लोक आस्था की परंपराएं सदियों से चली आ रही हैं. नवरात्र के दिनों में इन परंपराओं की झलक मंदिरों और देवी दरबारों में देखने को मिलती है. इसी बीच झांसी जिले के मऊरानीपुर क्षेत्र के बुखारा गांव स्थित गौरैया माता मंदिर में इन दिनों एक अनोखी साधना चर्चा का विषय बनी हुई है. यहां जानकी देवी ने अपने शरीर पर ज्वारे (जौ) उगाए हैं. परिवार और ग्रामीणों का कहना है कि सपने में देवी के दर्शन होने के बाद उन्होंने यह संकल्प लिया. उनके अद्भुत संकल्प को देखने के लिए आस-पास के क्षेत्रों से श्रद्धालु यहां आ रहे हैं.

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ग्राम बुखारा स्थित गौरैया माता मंदिर को स्थानीय लोग गोड़ैया माता मंदिर के नाम से भी संबोधित करते हैं. यहां जानकी देवी के शरीर पर जौ उगाए जाने की मान्यता के चलते विशेष धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि करीब 15 दिनों से मंदिर में पूजा-पाठ और सेवा का सिलसिला चल रहा है.

जौ नवरात्र के दौरान बोए जाने वाले जौ के अंकुर होते हैं, जिन्हें देवी आराधना और शुभता का प्रतीक माना जाता है. सामान्यतः इन्हें मिट्टी के पात्र या पूजा स्थल पर बोया जाता है. इस मामले में शरीर पर जौ उगने की बात स्थानीय मान्यता के रूप में सामने आई है, जिसने श्रद्धालुओं की उत्सुकता बढ़ा दी है. मंदिर पहुंचने वाले लोग इस साधना को देखने के साथ गौरैया माता के दर्शन कर रहे हैं और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं.

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मंदिर में किए जा रहे धार्मिक अनुष्ठान
मंदिर के पुजारी मुकेश कुमार पौसवार के अनुसार, गोड़ैया माता मंदिर में चल रहा आयोजन माता रानी के प्रति श्रद्धा और सामूहिक सेवा का प्रतीक है. उन्होंने बताया कि ग्रामीणों की मान्यता के अनुसार, गांव की एक बहू के शरीर पर जौ उगने के बाद धार्मिक अनुष्ठान शुरू किया गया. मंदिर में पूजा-पाठ, मंत्र-जाप और भजन संध्या सहित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. गांव के लोग अपनी श्रद्धा के अनुसार सहयोग कर रहे हैं और बाहर से आने वाले भक्त भी माता की सेवा में शामिल हो रहे हैं.

गांव की सुख-संपन्नता के लिए संकल्प
शरीर पर जौ बोने वाली जानकी देवी ने बताया कि वह इस धार्मिक आयोजन को लेकर माता रानी के प्रति श्रद्धा रखती हैं और सभी लोगों के कल्याण की कामना करती हैं. उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा है कि गांव और क्षेत्र के सभी लोग सुखी रहें. आयोजन का उद्देश्य किसी एक व्यक्ति या परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी के लिए मंगलकामना करना है.

उन्होंने कहा कि गांव के लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के प्रति भी उनके मन में सम्मान का भाव है. उनकी कामना है कि जो भी व्यक्ति माता के दरबार में आए, वह प्रसन्न रहे और किसी को निराश होकर न लौटना पड़े. जानकी देवी ने सभी को सुखी और समृद्ध रहने का आशीर्वाद देते हुए कहा कि माता रानी की कृपा सभी पर बनी रहे.

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