Sawan First Somwar 2026: आज सावन का पहला सोमवार है. सावन का पवित्र महीना शिव भक्तों के लिए बेहद खास होता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के सोमवार का व्रत रखने और भगवान भोलेनाथ की सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है और जीवन के सभी दुख-कष्ट दूर हो जाते हैं. सावन के पहले सोमवार पर कई शुभ संयोग बन रहे हैं, जिससे इस दिन की गई पूजा का अक्षय पुण्य प्राप्त होगा.
सावन सोमवार पर जलाभिषेक का मुहूर्त (Sawan Somwar 2026 jalabhishek Muhurat)
ब्रह्म मुहूर्त (सुबह की पूजा)- सुबह 04 बजकर 11 मिनट से सुबह 05 बजकर 33 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त (दोपहर की पूजा)- दोपहर 12 बजकर 19 मिनट से लेकर दोपहर 01 बजकर 10 मिनट तक
संध्या और रात्रि पूजा मुहूर्त- शाम 07 बजकर 13 मिनट से रात 08 बजकर 20 मिनट तक
राहुकाल (पूजा से बचें)- सुबह 07 बजकर 53 मिनट से सुबह 09 बजकर 30 मिनट तक.
सावन सोमवार पूजा विधि ( Sawan Somwar Puja Vidhi)
इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें. घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित कर व्रत व पूजा का संकल्प लें. फिर, शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, शहद, शक्कर और पंचामृत अर्पित करें. महादेव को प्रिय बेलपत्र, भांग, धतूरा, शमी के पत्ते, सफेद फूल और भस्म चढ़ाएं. पूजा के दौरान ऊं नमः शिवाय' या महामृत्युंजय मंत्र का निरंतर जप करते रहें अंत में शिव चालीसा का पाठ करें, आरती उतारें और फल या मिष्ठान का भोग लगाएं.
सावन सोमवार पर करें ये उपाय (Sawan Somwar Upay)
आर्थिक तंगी और कर्ज से मुक्ति के लिए
शिवलिंग पर 21 बेलपत्रों पर चंदन से ऊं नमः शिवाय' लिखकर चढ़ाएं. साथ ही 5 शमी के पत्ते अर्पित करें. आर्थिक तंगी दूर करने और धन वृद्धि के लिए सावन सोमवार को शिवलिंग पर गन्ने के रस से अभिषेक करें.
नौकरी और करियर में तरक्की के लिए
जल में थोड़ा सा कच्चा दूध और काले तिल मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करें. शिवलिंग पर बिना टूटे हुए 21 चावल के दाने अर्पित करें. इससे कार्यक्षेत्र में आ रही बाधाएं दूर होती हैं.
विवाह में देरी और मनोवांछित जीवनसाथी के लिए
अविवाहित कन्याएं या पुरुष जल में थोड़ा सा केसर और कच्चा दूध मिलाकर शिव जी का अभिषेक करें. शिवलिंग पर जल चढ़ाने के बाद माता पार्वती को सिंदूर और सुहाग की सामग्री अर्पित करें.
स्वास्थ्य लाभ और बीमारियों से राहत के लिए
तांबे के लोटे में जल भरकर उसमें थोड़ा सा गंगाजल मिलाएं और ऊं त्र्यम्बकं यजामहे... महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करते हुए जल अर्पित करें. शिवलिंग पर शहद और इत्र लगाकर जल चढ़ाने से पुरानी बीमारियों से राहत मिलती है.
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