Pitru Paksha 2026: कल या परसों, पितृ पक्ष का पहला दिन कब? जानें श्राद्ध तिथियां और कब होगा समापन

Pitru Paksha 2026: पितृ पक्ष में भोजन कराने से पहले गाय, कुत्ते, कौए, देव और चींटी के लिए 'पंचबलि' का भोजन निकालना भी अनिवार्य होता है. वहीं, पितरों के तर्पण के लिए दोपहर 11:36 से 12:24 बजे तक का कुतुप काल सर्वश्रेष्ठ माना गया है. जानें तर्पण के संपूर्ण नियम.

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पितृ पक्ष की तिथि 2026 (Photo: AI Generated) पितृ पक्ष की तिथि 2026 (Photo: AI Generated)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 25 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 12:12 PM IST

Pitru Paksha 2026: हिंदू धर्म में पितृ पक्ष यानी श्राद्ध पक्ष का समय पूर्वजों के प्रति आदर, श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का सबसे पावन काल माना गया है. भाद्रपद पूर्णिमा से लेकर आश्विन अमावस्या तक चलने वाले इन 16 दिनों में पितृलोक से हमारे पूर्वज सूक्ष्म रूप में धरती पर अपने परिजनों के बीच पधारते हैं. 

साल 2026 में पितृ पक्ष का प्रारंभ 27 सितंबर 2026, रविवार को आश्विन प्रतिपदा श्राद्ध के साथ होने जा रहा है, जो कि 10 अक्टूबर 2026 (शनिवार) को सर्वपितृ अमावस्या के साथ समाप्त होगा. इस बार किसी भी तिथि का क्षय न होने के कारण यह पावन पर्व पूरे 16 दिनों तक श्रद्धा और विधि-विधान के साथ मनाया जाएगा. आइए जानते हैं पितृ पक्ष 2026 की शुरुआत, तर्पण के लिए शुभ मुहूर्त, क्या करना चाहिए और क्या करने से बचना चाहिए.

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कब है पहला श्राद्ध?

प्रतिपदा श्राद्ध (प्रथम तिथि): 27 सितंबर 2026 (रविवार)

सर्वपितृ अमावस्या (समापन): 10 अक्टूबर 2026 (शनिवार)

26 सितंबर को क्या है?

ज्योतिषियों के मुताबिक, 26 सितंबर को भाद्रपद पूर्णिमा है, जिसे श्राद्ध पूर्णिमा के नाम से नाम से भी जाना जाता है. इस दिन भी पितरों का श्राद्ध किया जा सकता है. लेकिन, असल में पितृ पक्ष की शुरुआत 27 सितंबर यानी रविवार से होगी. 

श्राद्ध और तर्पण के लिए शुभ मुहूर्त

शास्त्रों के अनुसार, पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान हमेशा दोपहर के समय ही करना चाहिए. इसके लिए विशेष रूप से कुतप और रोहिणी काल को सर्वश्रेष्ठ माना गया है.

कुतप मुहूर्त- दोपहर 11 बजकर 36 मिनट से दोपहर 12 बजकर 24 मिनट तक

रोहिणी मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 24 मिनट से दोपहर 1 बजकर 12 मिनट तक

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अपराह्न काल- दोपहर 1 बजकर 12 मिनट से दोपहर 3 बजकर 36 मिनट तक

प्रातः काल सूर्योदय के तुरंत बाद या संध्या काल में श्राद्ध कर्म करना सख्त मना होता है. 

श्राद्ध पक्ष में क्या करें?

- श्राद्ध के दिन ब्राह्मण भोजन कराने से पहले भोजन का कुछ हिस्सा गाय, कुत्ता, कौआ, देव और चींटी के लिए अवश्य निकालें. मान्यता है कि इनके माध्यम से अर्पित किया गया अन्न सीधे हमारे पितरों तक पहुंचता है.

- पितरों को जलांजलि देते समय तांबे के पात्र में स्वच्छ जल, थोड़ा सा कच्चा दूध, गंगाजल और काले तिल मिलाएं. तर्पण करते समय दाहिने हाथ की अनामिका उंगली में कुशा धारण करना अनिवार्य होता है.

- इन दिनों में जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, जूते-चप्पल और तिल का दान करना अत्यंत फलदायी माना गया है.

- तर्पण करते समय हमेशा दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जल अर्पित करें, क्योंकि दक्षिण दिशा को पितरों की दिशा माना जाता है.

पितृ पक्ष में क्या न करें? 

तामसिक भोजन से दूरी 
पूरे 16 दिनों तक घर में लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा और बासी भोजन का सेवन न करें.

मांगलिक कार्य न करें 
इस दौरान नए घर का गृह प्रवेश, मुंडन, सगाई या विवाह जैसे शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं.

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नई खरीदारी से बचें 
सामान्यतः श्राद्ध पक्ष में नए कपड़े, वाहन या प्रॉपर्टी आदि की खरीदारी करने से बचना चाहिए.

अतिथि का अनादर न करें 
द्वार पर आए किसी भी भिक्षुक, असहाय व्यक्ति या पशु-पक्षी को खाली हाथ या भूखा न लौटाएं.

शारीरिक संयम 
पितृ पक्ष के दौरान बाल, दाढ़ी या नाखून काटने से बचना चाहिए और ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए.

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