Pitru Paksha 2026: चाणक्य नीति में इन 4 लोगों को भी दिया गया है पिता का दर्जा, जानें

चाणक्य नीति में पूर्वज और पितृ संस्कार को लेकर भी एक बड़ी महत्वपूर्ण बात कही है. चाणक्य का मानना था कि सामान्यत: लोग सिर्फ जन्म देने वाले या पिछली पीढ़ियों को ही पितृ का दर्जा देते हैं. जबकि पितृ शब्द का वास्तविक पैमाना इससे कहीं ज्यादा बड़ा है.

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इस साल पितृपक्ष 26 सितंबर से लेकर 10 अक्टूबर तक रहने वाला है.  (Photo: ITG) इस साल पितृपक्ष 26 सितंबर से लेकर 10 अक्टूबर तक रहने वाला है. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 02 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 8:03 PM IST

Pitru Paksha 2026: आचार्य चाणक्य को भारत का सबसे महान अर्थशास्त्री और विद्वान रणनीतिकार माना जाता है. उन्होंने अपने ग्रंथ चाणक्य नीति में जीवन की कई जटिल समस्याओं का उपाय बताया है. इसके अलावा, चाणक्य नीति में पूर्वज और पितृ संस्कार को लेकर भी एक बड़ी महत्वपूर्ण बात कही है. चाणक्य का मानना था कि सामान्यत: लोग सिर्फ जन्म देने वाले या पिछली पीढ़ियों को ही पितृ का दर्जा देते हैं. जबकि पितृ शब्द का वास्तविक पैमाना इससे कहीं ज्यादा बड़ा है. आइए इस बारे में विस्तार से समझते हैं.

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चाणक्य नीति में एक श्लोक है- 
"जनिता चोपनेता च यस्तु विद्यां प्रयच्छति।
अन्नदाता भयत्राता पञ्चैते पितरः स्मृताः ।।"

इस श्लोक का अर्थ है कि पिता सिर्फ वो नहीं है, जो हमें जन्म देता है. पालन-पोषण करने वाला और शिक्षा, ज्ञान देने वाला भी पिता ही है. इसके अलावा जो हमारा पेट भरता है और भय से हमारी रक्षा करता है, वो भी पिता ही है. इसलिए पिता के अर्थ को जन्म देने वाले व्यक्ति तक सीमित रखना ठीक नहीं है. हमें सही मायनों में जीवन का मूल उद्देश्य समझाने वाला और संरक्षण देने वाला व्यक्ति भी पिता ही होता है.

पितृपक्ष 2026 तिथि
इस साल पितृपक्ष 26 सितंबर से लेकर 10 अक्टूबर तक रहने वाला है. पितृपक्ष में लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए उनका श्राद्ध करते हैं. मान्यता है कि इन दिनों में श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान आदि करने से पितृ दोष दूर होता है. पितरों की कृपा हमारे ऊपर बनी रहती है. जीवन में चल रही किसी भी तरह की दिक्कतों से छुटकारा मिलता है. मान्यता है कि श्राद्धकर्म के दौरान चावल या जौ के आटे, काले तिल, घी, शहद और दूध से बने पिंड अर्पित करने से हमारे पितृ शांत होते हैं और अपनी कृपा बरसाते हैं.

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पितृपक्ष में मृतक की तिथि के हिसाब से ही उनका श्राद्ध किया जाता है. लेकिन जिन पितरों की तिथि ज्ञात नहीं होती है, उनका श्राद्ध सर्वपितृ अमावस्या पर यानी पितृपक्ष के अंतिम दिन किया जा सकता है. इस साल सर्वपितृ अमावस्या का श्राद्ध 10 अक्टूबर को किया जाएगा.

पितृ पक्ष 2026 की पूरी तारीखें
पूर्णिमा श्राद्धा- 26 सितंबर 2026, शनिवार
प्रतिपदा तिथि श्राद्ध- 27 सितंबर 2026, रविवार
द्वितीया श्राद्ध- 28 सितंबर 2026, सोमवार
तृतीया श्राद्ध- 29 सितंबर 2026, मंगलवार
चतुर्थी और पंचमी तिथि का श्राद्ध- 30 सितंबर 2026, बुधवार
षष्ठी तिथि का श्राद्ध- 1 अक्टूबर 2026, गुरुवार
सप्तमी तिथि का श्राद्ध- 2 अक्टूबर 2026, शुक्रवार
अष्टमी तिथि का श्राद्ध- 3 अक्टूबर 2026, शनिवार
नवमी तिथि का श्राद्ध- 4 अक्टूबर 2026, रविवार
दशमी तिथि का श्राद्ध- 5 अक्टूबर 2026, सोमवार
एकादशी तिथि का श्राद्ध- 6 अक्टूबर 2026, मंगलवार
द्वादशी तिथि का श्राद्ध- 7 अक्टूबर 2026, बुधवार
मघा तिथि का श्राद्ध- 7 अक्टूबर 2026, बुधवार
त्रयोदशी तिथि का श्राद्ध- 8 अक्टूबर 2026, गुरुवार
चतुर्दशी तिथि का श्राद्ध- 9 अक्टूबर 2026, शुक्रवार
सर्वपितृ अमावस्या-10 अक्टूबर 2026, शनिवार

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