Pitru Paksha 2026: पितृ पक्ष में चीटियों को क्यों खिलाते हैं आटा? जानें गरुड़ पुराण में रहस्य

Pitru Paksha 2026: गरुड़ पुराण के अनुसार मनुष्य के कर्मों का प्रभाव समस्त जीव-जंतुओं पर पड़ता है. पितृ पक्ष में चीटियों जैसे सूक्ष्म जीवों की भूख शांत करने से मिलने वाला सकारात्मक प्रभाव और पुण्य सीधा हमारे पूर्वजों तक पहुंचता है.

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पितृ पक्ष 2026 (Photo: ITG) पितृ पक्ष 2026 (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 06 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 8:39 AM IST

Pitru Paksha 2026: हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का समय पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनकी तृप्ति के लिए बेहद समर्पित माना जाता है. इस दौरान लोग पिंडदान, तर्पण और दान-पुण्य के जरिए अपने पितरों को याद करते हैं. पितृ पक्ष में दान और जीवों की सेवा का विशेष महत्व बताया गया है, जिनमें से चीटियों को आटा या चीनी डालना एक बेहद महत्वपूर्ण उपाय माना जाता है. क्या आपने कभी सोचा है कि विशेष रूप से इन दिनों में चीटियों को भोजन कराना क्यों जरूरी माना गया है? गरुड़ पुराण और धार्मिक मान्यताओं में इससे जुड़े कई गहरे रहस्य और कारण बताए गए हैं. आइए जानते हैं कि पितृ पक्ष के दौरान चीटियों की सेवा करने से पितृ क्यों प्रसन्न होते हैं.

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गरुड़ पुराण में जीव सेवा का महत्व

हिंदू धर्म के पवित्र ग्रंथों, विशेषकर गरुड़ पुराण में यह स्पष्ट रूप से बताया गया है कि मनुष्य के द्वारा किए गए कर्मों का प्रभाव केवल इंसानों पर ही नहीं, बल्कि समस्त जीव-जंतुओं पर भी पड़ता है. ऐसा माना जाता है कि मृत्यु के बाद आत्माएं विभिन्न योनियों में भटकती हैं. चीटियां और अन्य सूक्ष्म जीव भी सृष्टि का एक अहम हिस्सा हैं. पितृ पक्ष में चीटियों को आटा डालने से चींटी जैसे छोटे जीवों की भूख शांत होती है, जिससे उनका आशीर्वाद अदृश्य रूप से हमारे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लेकर आता है.

चीटियों को आटा डालने के प्रमुख धार्मिक और आध्यात्मिक कारण

- चीटियों को खिलाने से दूर होते हैं दोष
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, चीटियों का संबंध राहु-केतु और शनि जैसे ग्रहों से भी जोड़ा जाता है. जब कोई व्यक्ति नियमित रूप से या विशेषकर पितृ पक्ष में चीटियों को शक्कर मिला हुआ आटा डालता है, तो उसके कई प्रकार के ग्रह दोष और बाधाएं शांत होने लगती हैं. इससे जीवन में आ रही अड़चनें दूर होती हैं.

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- ऋणों और पापों से मुक्ति का मार्ग

धर्मग्रंथों में कहा गया है कि अनजाने में हमसे कई छोटे-छोटे जीव-हत्या के पाप हो जाते हैं, जिन्हें 'पंच महायज्ञ' या जीव सेवा के माध्यम से संतुलित किया जाता है. चीटियों को भोजन कराने से चींटी ऋण और अन्य सूक्ष्म जीवों के प्रति कर्ज से मुक्ति मिलती है. इसे चींटी सेवा या 'कीड़ी नगर' डालना भी कहा जाता है, जो पुण्य का बड़ा काम माना गया है.

- पितरों की तृप्ति और उनका आशीर्वाद

ऐसी धार्मिक मान्यता है कि पितृ पक्ष में हमारे पूर्वज किसी न किसी रूप में हमारे आसपास या जीवों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं. जब हम चीटियों या अन्य बेजुबान जानवरों को अन्न दान करते हैं, तो उससे मिलने वाला पुण्य सीधा हमारे पितरों तक पहुंचता है. इससे पितृ तृप्त होते हैं और अपने वंशजों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं.

चीटियों को आटा डालते समय किन बातों का रखें ध्यान?

साफ-सुथरी जगह चुनें: चीटियों को हमेशा खुले में, पेड़ के नीचे या उनके बिल के पास साफ स्थान पर ही आटा डालना चाहिए.

शक्कर या बूरा मिलाएं: सादे आटे की जगह उसमें थोड़ा सा चीनी या बूरा मिलाकर डालने से चीटियां आसानी से उसे ग्रहण कर पाती हैं.

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नियमितता का रखें ख्याल: यदि आप पितृ पक्ष के दौरान यह नियम अपनाते हैं, तो इसे श्रद्धा और निरंतरता के साथ करें, जिससे आपको इसका पूर्ण आध्यात्मिक लाभ मिल सके.

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