Navratri Paran 2026: हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्र का खास महत्व है. इन नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं. इस दौरान कई लोग पूरे नौ दिन व्रत रखते हैं, जबकि कुछ श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार उपवास करते हैं. नवरात्र के आखिरी दिनों में कन्या पूजन भी किया जाता है. हालांकि, कई लोग इस बात को लेकर असमंजस में रहते हैं कि व्रत का पारण अष्टमी को करना चाहिए या नवमी को. अगर आपने भी नवरात्र का व्रत रखा है, तो आइए जानते हैं कि इसका पारण कब और कैसे करना चाहिए.
शारदीय नवरात्रि की तिथियां
द्रिक पंचांग के अनुसार, शारदीय नवरात्र की शुरुआत अश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है. इस साल नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू हुए हैं. वहीं, 18 अक्टूबर को अष्टमी और 19 अक्टूबर को नवमी मनाई जाएगी. इन दोनों दिनों में मां दुर्गा की पूजा की जाती है और कई घरों में कन्या पूजन भी होता है.
अष्टमी या नवमी, कब करें व्रत का पारण?
नवरात्र का व्रत कुछ लोग अष्टमी के दिन खोलते हैं, तो कुछ नवमी पर पारण करते हैं. यह हर घर की परंपरा पर निर्भर करता है. अगर आपके घर में अष्टमी की पूजा होती है, तो कन्या पूजन के बाद व्रत खोल सकते हैं. वहीं, नवमी की पूजा करने वाले लोग इस दिन कन्या पूजन के बाद व्रत खोलते हैं.
अष्टमी पर कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त
द्रिक पंचांग के अनुसार, अष्टमी के दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 43 मिनट से दोपहर 12 बजकर 28 मिनट तक रहेगा. मान्यता है कि इस समय मां दुर्गा की पूजा और कन्या पूजन करना शुभ होता है.
नवमी पर कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त
द्रिक पंचांग के अनुसार, नवमी के दिन अभिजीत मुहूर्त 19 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 43 मिनट से दोपहर 12 बजकर 28 मिनट तक रहेगा. वहीं, 20 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 43 मिनट से दोपहर 12 बजकर 28 मिनट तक है. इस समय मां दुर्गा की पूजा-अर्चना और कन्या पूजन करना शुभ माना जाता है.
नवरात्रि व्रत का पारण करने की विधि
नवरात्रि के व्रत का समापन करने से पहले मां दुर्गा की विधि-विधान से पूजा करें. इसके बाद कन्याओं को घर बुलाकर उनका आदर-सत्कार करें. कन्याओं के साथ एक बालक को भी भोजन कराने की मान्यता है. भोजन कराने से पहले मां दुर्गा को प्रसाद अर्पित करें. फिर कन्याओं को भोजन कराएं.
भोग के लिए हलवा, पूरी और काले चने जैसे पकवान बनाए जा सकते हैं. इसके अलावा खीर, फल, नारियल और मिठाई भी शामिल कर सकते हैं. भोजन के बाद कन्याओं को अपनी श्रद्धा के अनुसार दक्षिणा या उपहार देकर उनका आशीर्वाद लें. इसके बाद मां दुर्गा से सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करते हुए व्रत का पारण करें.
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