Guru Purnima 2026 Kab Hai: आज या कल, कब है गुरु पूर्णिमा? नोट करें स्नान-दान का शुभ मुहूर्त

Guru Purnima 2026 Kab Hai: हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण पर्वों में से एक गुरु पूर्णिमा है. यह शुभ दिन गुरु की पूजा और उनका सम्मान करने के लिए समर्पित है, जो ज्ञान और आत्मज्ञान के मार्ग पर व्यक्तियों का मार्गदर्शन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

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गुरु पूर्णिमा 2026 (Photo: ITG) गुरु पूर्णिमा 2026 (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 28 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 6:53 AM IST

Guru Purnima 2026 Kab Hai: हिंदू सनातन परंपरा में गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊपर माना गया है. गुरु ही मार्गदर्शक बनकर शिष्य को अज्ञानता के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं. हर साल आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व बेहद श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है. इस दिन को महाभारत और पुराणों के रचयिता महर्षि वेद व्यास जी की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं. आइए जानते हैं कि साल 2026 में गुरु पूर्णिमा किस दिन मनाई जाएगी, पूर्णिमा तिथि का शुभ मुहूर्त क्या है और इसकी सही पूजा विधि क्या है.

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गुरु पूर्णिमा 2026 की सही तिथि (Guru Purnima 2026 Date)

द्रिक पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में आषाढ़ पूर्णिमा तिथि का आरंभ 28 जुलाई की शाम 6 बजकर 18 मिनट से होगा और इसका समापन 29 जुलाई की रात को रात 8 बजकर 5 मिनट पर होगा. उदयातिथि के नियम के अनुसार गुरु पूर्णिमा का पर्व 29 जुलाई 2026, बुधवार को मनाया जाएगा.

गुरु पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त ( Guru Purnima 2026 Pujan Shubh Muhurat)

29 जुलाई को दिनभर पूर्णिमा तिथि रहने के कारण गुरु पूजन और स्नान-दान के लिए पूरा दिन शुभ रहेगा.

स्नान दान का मुहूर्त- सुबह 4 4 बजकर 17 मिनट से लेकर सुबह 4 बजकर 59 मिनट तक रहेगा.

प्रातःकाल पूजा का मुहूर्त: सुबह 05:40 बजे से सुबह 09:05 बजे तक

अभिजित व शुभ चौघड़िया मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से दोपहर 12:55 बजे तक

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संध्या पूजा मुहूर्त: शाम 05:30 बजे से शाम 07:15 बजे तक

गुरु पूर्णिमा का धार्मिक महत्व (Guru Purnima 2026 Significance)

धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन प्रथम गुरु महर्षि वेद व्यास जी का जन्म हुआ था. उन्होंने ही चारों वेदों का वर्गीकरण किया, 18 पुराणों और महाभारत जैसे महाकाव्यों की रचना की. इस दिन केवल आध्यात्मिक गुरु ही नहीं, बल्कि माता-पिता, शिक्षकों और उन सभी मार्गदर्शकों का आशीर्वाद लिया जाता है जिन्होंने जीवन में सही राह दिखाई है. गुरु पूर्णिमा पर गुरुओं का पूजन करने से ज्ञान, बुद्धि, भक्ति और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है.

गुरु पूर्णिमा पूजा विधि (Guru Purnima 2026 Pujan Vidhi)

गुरु पूर्णिमा के दिन प्रातःकाल उठकर पवित्र नदी में स्नान करें या घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें. स्वच्छ वस्त्र (संभव हो तो पीले वस्त्र) धारण करें. फिर, घर के मंदिर में उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके भगवान विष्णु, महर्षि वेद व्यास और अपने गुरु की तस्वीर स्थापित करें. इसके बाद रोली, चंदन, अक्षत, पीले फूल और फल अर्पित करें. गुरुजी को पीले वस्त्र या मिठाई का भोग लगाएं.

यदि आपके गुरु प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित हैं, तो उनके चरण धोकर स्पर्श करें, उन्हें माला पहनाएं, दक्षिणा या वस्त्र भेंट करें और उनका आशीर्वाद लें. इस दिन ऊं गुरुभ्यो नमः या अपने गुरु द्वारा दिए गए गुरुमंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें.

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गुरु वंदना मंत्र

गुरु पूजन करते समय इस पौराणिक श्लोक का स्मरण अवश्य करना चाहिए

"गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः.
गुरुः साक्षात परंब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥"

अर्थ: गुरु ही ब्रह्मा हैं, गुरु ही विष्णु हैं और गुरु ही भगवान शिव हैं. गुरु ही साक्षात परब्रह्म हैं, ऐसे श्री गुरुदेव को मेरा बारंबार प्रणाम है.

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