Goga Navami 2026: नागों के वो देवता जिन्हें हिंदू-मुस्लिम दोनों पूजते हैं, PAK में भी गहरी आस्था

गोगा जी महाराज को गोगा पीर, जाहर पीर या जाहर वीर बाबा के नाम से भी जाना जाता है. कई जगहों पर यह सांपों से रक्षा करने वाला देवता के रूप में भी पूजे जाते हैं. खास बात यह है कि गोगा जी महाराज के भक्त न सिर्फ हिंदू बल्कि मुस्लिम समुदाय में भी देखने को मिलते हैं. पाकिस्तान में भी कई जगहों पर गोगा जी महाराज की पूजा की जाती है.

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पाकिस्तान के पंजाब प्रांत वाले हिस्सों में भी गोगा जी महाराज या गोगा पीर को लेकर बड़ी मान्यता है. (Photo: ITG) पाकिस्तान के पंजाब प्रांत वाले हिस्सों में भी गोगा जी महाराज या गोगा पीर को लेकर बड़ी मान्यता है. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 05 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 8:31 PM IST

हर साल भाद्रपद कृष्ण नवमी तिथि को गोगा नवमी मनाई जाती है. यह तिथि एक बड़े ही प्रसिद्ध लोक देवता गोगा जी महाराज को समर्पित है. गोगा जी महाराज को गोगा पीर, जाहर पीर या जाहर वीर बाबा के नाम से भी जाना जाता है. राजस्थान, हरियाणा, पंजाब समेत उत्तर भारत के कई हिस्सों में उनकी विशेष मान्यता है. कई जगहों पर यह सांपों से रक्षा करने वाले देवता के रूप में भी पूजे जाते हैं. खास बात यह है कि गोगा जी महाराज के भक्त न सिर्फ हिंदू, बल्कि मुस्लिम समुदाय में भी देखने को मिलते हैं. पाकिस्तान में भी कई जगहों पर गोगा जी महाराज की पूजा की जाती है. इसके वीडियो भी आए दिन सोशल मीडिया पर खूब वायरल होते हैं.

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कौन हैं गोगा जी महाराज?
राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले की भादरा तहसील में गोगा पीर का एक प्रसिद्ध मंदिर है, जिसे गोगामेड़ी कहा जाता है. इस मंदिर को लेकर हिंदू और मुस्लिम दोनों सम्प्रदाय के लोगों में विशेष मान्यता है. हिंदुओं में ये गोगा जी महाराज के नाम से प्रसिद्ध हैं तो वहीं मुस्लिम इन्हें गोगा पीर करते हैं. लोक मान्यताओं के अनुसार, गोगा जी महाराज एक महान योद्धा थे जिन्हें दिव्य, आध्यात्मिक शक्तियां प्राप्त थीं. मान्यता है कि जाहर वीर बाबा की पूजा से नागों का भय दूर होता है. इसलिए लोग इन्हें नागों का राजा या नाग देवता भी कहते हैं.

गोगामेड़ी मंदिर में गोगाजी महाराज एक घोड़े पर सवार हाथ में बरछा लिए हुए दिखाई देते हैं. उनके सिर के ऊपर नागराज छत्र भी दिखाई देता है. हिंदू-मुस्लि दोनों ही धर्मों के लोग गोगामेड़ी मंदिर में पूजा के लिए दूर-दूर से आते हैं. यहां हर साल जुलाई या अगस्त के महीने में बड़ा मेला भी लगता है, जिसमें भक्त लोग पीले वस्त्र पहनकर, मीलों दूर से दण्डवत करते हुए आते हैं.

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गोगा पीर का निशान
गोगा जी महाराज की पूजा करने वालों में उनके निशान को लेकर बड़ी मान्यता है. इस निशान को गोगा छड़ी भी कहा जाता है. यह एक लंबा सजा हुआ नीले और केसरी रंग का ध्वज होता है. एक लंबे बांस में कुछ मोरपंख, रंगीन कपड़े, घुंघरू, चांदी या पीतल के मुखौटे लगाकर इस पवित्र निशान को तैयार किया जाता है. मुख्य पुजारी के साथ मिलकर कुछ लोग ढोल-मंजीरे या डेरू बजाते हुए इस निशान को पवित्र स्थल तक पहुंचाते हैं.

पाकिस्तान में गोगा पीर की मान्यता
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत वाले हिस्सों में भी गोगा जी महाराज या गोगा पीर को लेकर बड़ी मान्यता है. उत्तर भारत की तरह ही यहां भी लोग गोगा पीर के निशान की पूजा करते हैं और गली-गली, गांव-गांव घूमकर उसे पवित्र स्थल तक पहुंचाते हैं. पाकिस्तान के बहावलपुर, रावलपिंडी, सियालकोट और गुजरांवाला में हर साल इसी समय गोगा पीर की निशान की झांकियां निकाल जाती हैं. सोशल मीडिया पर इसके कई वीडियो अब भी वायरल हो रहे हैं.

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