Dwidwadash Rajyog 2026: वैदिक ज्योतिष में ग्रहों के राजा सूर्य और देवताओं के गुरु बृहस्पति की स्थिति का विशेष महत्व होता है. 17 अगस्त यानी कल सूर्य देव अपनी स्वराशि सिंह में गोचर कर चुके हैं, जिसमें यह 17 सितंबर तक रहेंगे. सूर्य के सिंह राशि में प्रवेश करते ही गुरु बृहस्पति और सूर्य के बीच द्विद्वादश योग का निर्माण हुआ. इस स्थिति में गुरु ग्रह सूर्य से बारहवें भाव में और सूर्य गुरु से दूसरे भाव में स्थित होंगे.
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य और गुरु दोनों के बीच परस्पर मित्रता का भाव होता है. सूर्य मान-सम्मान, नेतृत्व और आत्मा के कारक हैं, जबकि गुरु ज्ञान, धर्म और वृद्धि के कारक माने जाते हैं. सिंह राशि में सूर्य के आते ही बनने वाला यह द्विद्वादश योग कई राशियों के लिए अत्यंत शुभ, धन-धान्य और प्रगति दिलाने वाला साबित होगा. आइए जानते हैं किन राशियों को इसका सबसे ज्यादा फायदा होगा.
मेष राशि (Aries)
मेष राशि के जातकों के लिए सूर्य और गुरु की यह स्थिति विशेष फलदायी सिद्ध होगी. कार्यक्षेत्र में आपकी नेतृत्व क्षमता की सराहना होगी. पदोन्नति और वेतन वृद्धि के प्रबल योग बन रहे हैं. व्यापारियों के लिए नए व्यावसायिक अनुबंध लाभदायक रहेंगे. आय के नए स्रोत बनेंगे. अचानक धन लाभ की संभावना है, जिससे आपकी आर्थिक स्थिति काफी मजबूत होगी. समाज में आपकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी. उच्च अधिकारियों का पूरा सहयोग प्राप्त होगा.
सिंह राशि (Leo)
सूर्य आपकी ही राशि में गोचर कर रहे हैं, जिससे आपके अंदर एक नया आत्मविश्वास और तेज देखने को मिलेगा. आपके निर्णय लेने की क्षमता में वृद्धि होगी. आपका अटका हुआ काम गति पकड़ेगा. रुका हुआ धन वापस मिल सकता है. नए निवेश से भविष्य में बड़ा आर्थिक लाभ होने के संकेत हैं. परिवार में मांगलिक कार्यों का आयोजन हो सकता है. वरिष्ठों का मार्गदर्शन और आशीर्वाद प्राप्त होगा.
धनु राशि (Sagittarius)
धनु राशि के स्वामी स्वयं गुरु बृहस्पति हैं. सूर्य का यह गोचर आपके लिए अत्यंत भाग्यशाली रहने वाला है. अटके हुए काम आसानी से पूरे होंगे. धर्म-कर्म और आध्यात्मिक कार्यों में आपकी रुचि बढ़ेगी. प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को शुभ समाचार मिल सकता है. विदेश से जुड़े काम या व्यापार में बड़ी सफलता मिलेगी. सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी और परिवार में खुशी का माहौल रहेगा.
विशेष उपाय
सूर्य और गुरु के इस शुभ प्रभाव को और बढ़ाने के लिए प्रतिदिन प्रातःकाल सूर्यदेव को तांबे के लोटे से जल में रोली और पीला पुष्प डालकर अर्घ्य दें, तथा ऊं घृणिः सूर्याय नमः और ऊं बृं बृहस्पतये नमः मंत्र का जाप करें.
aajtak.in