सीता का हरण करने के बाद युद्ध भूमि में राम को ललकारना रावण को भारी पड़ा. उसका अहंकार ही उसके पतन की वजह बन गया. अंतत: राम के हाथों उसका वध हुआ. इस उपलक्ष्य में हर साल दशहरे पर रावण का पुतला दहन भी किया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि रावण की मृत्यु के बाद असुर कुल के किस सदस्य ने उसका अंतिम संस्कार किया था. आपको जानकर हैरान होगी कि रावण की मृत्यु के बाद उसका अंतिम संस्कार भी भगवान राम के कहने पर ही हुआ था.
कृपादृष्ठि प्रभु ताहि बिलोका। करहु क्रिया परिहरि सब सोका।।
कीन्ही क्रिया प्रभु आयसु मानी।। बिधिवत देस काल जियँ जानी।।
रावण की मृत्यु के बाद उसके छोटे भाई विभीषण ने उसका अंतिम संस्कार करने का संकोच किया. वह रावण की मृत्यु से दुखी था, लेकिन अंतिम संस्कार के लिए आगे नहीं बढ़ पा रहा था. तब भगवान श्रीराम ने लक्ष्मण को विभीषण के पास भेजा, ताकि वे उन्हें समझाकर अंतिम संस्कार के लिए तैयार कर सकें. लक्ष्मण की बात सुनने के बाद विभीषण राम के पास लौटे. तब राम ने उनसे कहा कि अपना शोक त्यागकर रावण की अंत्येष्टि करें. राम की आज्ञा मानकर विभीषण ने उचित विधि से अपने बड़े भाई का अंतिम संस्कार किया.
अंतिम संस्कार के बाद विभीषण का राजतिलक
रावण का दाह संस्कार पूरा होने के बाद राम ने विभीषण को लंका का राजा बनाने की व्यवस्था की. उन्होंने लक्ष्मण और वानर सेना के प्रमुख योद्धाओं को विभीषण के साथ जाकर उनका राजतिलक करने का निर्देश दिया. इस प्रसंग में राम ने पिता के वचन का पालन करने के कारण स्वयं नगर में प्रवेश न करने की बात कही और अपने प्रतिनिधियों को यह जिम्मेदारी सौंपी.
विभीषण के लौटने पर राम ने लक्ष्मण को बुलाया और सुग्रीव, अंगद, नल, नील, जामवंत व हनुमान के साथ विभीषण के राजतिलक की व्यवस्था करने को कहा. राम ने बताया कि पिता के वचन के कारण वे स्वयं नगर में प्रवेश नहीं करेंगे, इसलिए अपने सहयोगियों और छोटे भाई को भेज रहे हैं.
विभीषण ने ही खोला था रावण की मौत का राज
रावण एक शक्तिशाली राजा और अस्त्र-शस्त्र में प्रवीण था. जब राम और रावण के बीच महायुद्ध हुआ तो राम के धनुष से निकला बाणों का उस पर कोई असर नहीं हो रहा था. राम का हर बाण, हर प्रहार खाली जा रहा था. तब विभीषण ने राम को रावण के अमर रहने का रहस्य बताया था. विभीषण ने राम से कहा कि रावण की नाभि में अमृत कुंड है और उसे नष्ट किए बिना रावण का अंत नामुमकिन है. तब भगवान राम ने अपने बाण से पहले रावण की नाभि में मौजूद अमृत कुंड को नष्ट किया और फिर उसका वध किया.
aajtak.in