Chitragupta Puja 2026: दिवाली के अगले दिन भाई दूज का त्योहार मनाया जाता है. इस दिन भगवान चित्रगुप्त की पूजा का भी खास महत्व होता है. इस दिन लोग भगवान चित्रगुप्त की पूजा करने के साथ कलम और दवात की भी पूजा करते हैं. खासतौर पर कायस्थ समाज के लोग इस परंपरा को पूरे विधि-विधान से निभाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि चित्रगुप्त पूजा के दिन कलम और दवात क्यों पूजी जाती है? आइए जानते हैं इसके पीछे की धार्मिक मान्यता.
कौन हैं भगवान चित्रगुप्त?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान चित्रगुप्त यमराज के सहायक हैं. उनका काम इंसान के अच्छे और बुरे कर्मों का हिसाब रखना है. मान्यता है कि इंसान अपने जीवन में जो भी अच्छे या बुरे काम करता है, भगवान चित्रगुप्त उन सभी का लेखा-जोखा रखते हैं. मृत्यु के बाद इसी हिसाब के आधार पर उसके कर्मों का फैसला होता है. इसलिए भगवान चित्रगुप्त को कर्मों का हिसाब रखने वाला देवता माना जाता है.
चित्रगुप्त पूजा पर क्यों होती है कलम की पूजा?
चित्रगुप्त पूजा के दिन कलम और दवात की पूजा करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. इसके पीछे मान्यता है कि भगवान चित्रगुप्त लिखने और कर्मों का हिसाब रखने के अधिष्ठाता देवता हैं. वह अपने लेखे-जोखे में मनुष्य के हर अच्छे और बुरे कर्म को दर्ज करते हैं. ऐसे में कलम को उनके लेखन कार्य का प्रतीक माना जाता है. यही वजह है कि इस दिन कलम, दवात और बहीखातों की पूजा की जाती है. खासतौर पर व्यापारी वर्ग के लोग इस दिन अपने नए बहीखाते की शुरुआत करते हैं और भगवान चित्रगुप्त से अपने काम में तरक्की और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं.
कैसे की जाती है भगवान चित्रगुप्त की पूजा?
इस दिन सुबह स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनें. पूजा स्थल पर भगवान चित्रगुप्त की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें. इसके बाद फूल, अक्षत, रोली, मिठाई और फल अर्पित करें. पूजा में कलम, दवात और बहीखाते भी रखें. इसके बाद भगवान चित्रगुप्त का ध्यान करें. उनसे सद्बुद्धि, अच्छे कर्म करने की शक्ति और जीवन में सफलता की प्रार्थना करें.
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