ज्येष्ठ माह में पड़ने वाले मंगलवार को बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहा जाता है. इस बार ज्येष्ठ का पहला बड़ा मंगल 5 मई को होगा. बड़े मंगल पर हनुमान मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. इस दिन श्रद्धालु बजरंगबली की विधि-विधान से पूजा करते हैं और उनका आशीर्वाद पाते हैं. मान्यता है कि ज्येष्ठ मास में ही भगवान श्रीराम और उनके परम भक्त हनुमान जी का मिलन हुआ था. और ज्येष्ठ के मंगलवार को ही हनुमान जी ने 10 हजार हाथियों का बल रखने वाले भीम का अहंकार तोड़ा था. आइए पहले बड़े मंगल पर पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजन विधि जानते हैं.
पहले बड़े मंगल पर पूजा का मुहूर्त क्या है?
5 मई को सुबह 4 बजकर 12 मिनट से लेकर सुबह 4 बजकर 55 मिनट तक ब्रह्म मुहूर्त रहेगा. इस दौरान आप स्नानादि करके व्रत-पूजा का संकल्प ले लीजिए. इसी शुभ घड़ी में सुबह की पूजा भी कर लीजिए. यदि ऐसा संभव न हो तो सुबह 11 बजकर 51 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा. आप इसमें भी पूजा कर सकते हैं. इसके बाद शाम को 6 बजकर 57 मिनट से लेकर शाम 7 बजकर 19 मिनट तक गोधुली मुहूर्त रहेगा. इस दौरान आप शाम की पूजा करके व्रत खोल सकते हैं.
पहले बड़े मंगल पर कैसे करें बजरंगबली की पूजा?
बुढ़वा मंगल पर संकट मोचन हनुमान की आराधना से जीवन के सारे कष्ट दूर हो सकते हैं. इसलिए बड़े मंगल के दिन व्रत रखकर श्रद्धापूर्वक बजरंगबली की पूजा करनी चाहिए. उनके सामने धूप, दीप जलाएं. उन्हें लड्डू, गुड़-चने, पान का बीड़ा या रोट का भोग लगाना बिल्कुल न भूलें. फिर हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ करें. इस दिन हनुमान जी को चोला चढ़ाने की भी परंपरा है.
क्या होता है हनुमान जी चोला?
चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर जो लेप तैयार किया जाता है, उसे चोला कहते हैं. इसी सिंदूरी चोले को हनुमान जी को अर्पित किया जाता है. पवनपुत्र हनुमान को चोला चढ़ाने की परंपरा शास्त्रों में वर्णित है. ऐसा कहा जाता है कि बड़े मंगल के दिन चोला और सिंदूर अर्पित करने से हनुमान जी प्रसन्न होकर अपने भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूरी कर देते हैं. हालांकि ध्यान रहे कि चोला हमेशा संकल्प लेकर ही चढ़ाया जाता है और संख्या 5, 11, 21, 51 या 101 रखी जाती है.
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