Ahoi Ashtami 2026: आज कितने बजे दिखेगा अहोई अष्टमी का चांद? जानें कब खोलें माताएं अपना व्रत

Ahoi Ashtami 2026 Chandrodaya Time: आज अहोई अष्टमी पर माताएं संतान की लंबी उम्र के लिए व्रत रखेंगी. जानें 2026 में चांद निकलने का समय, तारों के दर्शन का समय और चंद्रमा को अर्घ्य देने की विधि.

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आज अहोई अष्टमी पर चांद का इंतजार होगा कब खत्म? (Photo: ITG) आज अहोई अष्टमी पर चांद का इंतजार होगा कब खत्म? (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 9:46 AM IST

Ahoi Ashtami 2026 Chandrodaya Time: अहोई अष्टमी का व्रत माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और खुशहाली के लिए रखती हैं. इस दिन महिलाएं पूरे दिन उपवास करती हैं और शाम को अहोई माता की पूजा करती हैं. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से व्रत और पूजा करने से संतान पर आने वाली परेशानियां दूर होती हैं. साथ ही, घर में सुख-शांति बनी रहती है. वहीं, जिन दंपतियों को संतान सुख की प्राप्ति नहीं हुई है, वे भी संतान प्राप्ति की मनोकामना के साथ अहोई अष्टमी का व्रत रखते हैं. परंपरा के अनुसार, व्रत का पारण तारों या चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद किया जाता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि इस साल अहोई अष्टमी पर चंद्रमा कब निकलेगा और अर्घ्य देने का सही तरीका क्या है.

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अहोई अष्टमी व्रत: 1 नवंबर 2026, रविवार
अष्टमी तिथि प्रारंभ: दोपहर 2:51 बजे
अष्टमी तिथि समाप्त: 2 नवंबर, दोपहर 1:10 बजे
पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 5:36 बजे से 6:54 बजे तक

अहोई अष्टमी पर कितने बजे निकलेगा चांद?

अहोई अष्टमी पर चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत पूरा करने वाली महिलाओं के लिए चंद्रोदय का समय जानना जरूरी है. पंचांग के अनुसार, 1 नवंबर 2026 को अहोई अष्टमी के दिन रात 11 बजकर 5 मिनट पर चंद्रोदय होगा. हालांकि, अलग-अलग शहरों में चंद्रोदय के समय में अंतर हो सकता है. वहीं, जो महिलाएं तारों को देखकर अपना व्रत खोलती हैं, वे शाम करीब 6 बजे तारे दिखाई देने के बाद पारण कर सकती हैं. 

अहोई अष्टमी पर चंद्रमा को अर्घ्य कैसे दें?

अहोई अष्टमी पर सबसे पहले पूजा के लिए एक साफ थाली तैयार कर लें. इसमें जल से भरा एक लोटा या कलश रखें. जल में थोड़ा कच्चा दूध, रोली, अक्षत और फूल डाल दें. अब थाली में घी का दीपक जलाकर रख लें. चंद्रोदय होने पर दोनों हाथों से लोटा पकड़कर चंद्रमा को जल अर्पित करें. इसके बाद चंद्रदेव की आरती करें. उन्हें फूल व भोग चढ़ाएं. पूजा पूरी होने के बाद घर के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लें और फिर व्रत का पारण करें.

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