Easter 2025: आज है ईस्टर संडे, जानें प्रभु यीशु के बलिदान से लेकर पुनर्जीवन तक की कहानी

Easter 2025: इस वर्ष ईस्टर संडे 20 अप्रैल यानी आज मनाया जा रहा है और यह दिन ईसाई समुदाय के लिए विशेष महत्व रखता है. ईसाई मान्यता के अनुसार, प्रभु यीशु मसीह को ईश्वर का पुत्र माना जाता है. ईस्टर संडे प्रभु यीशु मसीह के पुनर्जीवित होने की याद में मनाया जाता है.

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क्यों मनाया जाता है ईस्टर का पर्व? क्यों मनाया जाता है ईस्टर का पर्व?

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 20 अप्रैल 2025,
  • अपडेटेड 7:30 AM IST

Easter 2025: ईस्टर संडे ईसाई धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे पूरे विश्व में बड़े श्रद्धा और धूमधाम के साथ मनाया जाता है. यह दिन प्रभु यीशु मसीह के पुनर्जीवित होने की याद में मनाया जाता है. इस वर्ष ईस्टर संडे 20 अप्रैल यानी आज मनाया जा रहा है और यह दिन ईसाई समुदाय के लिए विशेष महत्व रखता है.

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ईस्टर क्यों मनाया जाता है? (Why is easter celebrated?)

ईसाई लोगों की मान्यता के अनुसार, प्रभु यीशु मसीह को ईश्वर का पुत्र माना जाता है. वे लोगों को एक-दूसरे की मदद करने, नफरत को त्याग कर प्रेम को अपनाने और ईश्वर में आस्था रखने की सीख देते थे. लेकिन उनकी लोकप्रियता और बढ़ती हुई मान्यता से कुछ लोग चिंतित हो गए और उन्होंने झूठे आरोपों के आधार पर यीशु को सूली पर चढ़ा दिया.

यह घटना 'गुड फ्राइडे' के दिन हुई, जब प्रभु यीशु को क्रूस पर लटकाया गया था. लेकिन इस दुखद घटना के तीन दिन बाद, रविवार के दिन, एक चमत्कार हुआ- प्रभु यीशु पुनर्जीवित हो गए. तभी से इस दिन को ईस्टर संडे के रूप में मनाया जाता है.

ईस्टर के दिन क्या होता है?

ईस्टर संडे का दिन प्रार्थना, भक्ति और उत्सव से भरा होता है. सुबह से ही चर्चों में विशेष प्रार्थनाएं आयोजित की जाती हैं, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं. चर्चों को विशेष रूप से सजाया जाता है. मोमबत्तियों, फूलों और धार्मिक प्रतीकों से वातावरण को पवित्र बनाया जाता है. प्रार्थना के बाद लोग एक-दूसरे को ईस्टर की शुभकामनाएं देते हैं और प्रभु यीशु के बलिदान एवं पुनरुत्थान की कथा को याद करते हैं. कई स्थानों पर जुलूस और संगीत समारोह भी आयोजित किए जाते हैं. 

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ईस्टर अंडे का महत्व (Easter Sunday Significance)

ईस्टर पर्व में अंडे का विशेष स्थान होता है. अंडा जीवन की उत्पत्ति और नए आरंभ का प्रतीक माना जाता है. जैसे अंडे से जीवन चूजे की शुरुआत होती है, वैसे ही ईस्टर का संदेश भी नया जीवन, नई आशा और पुनर्जन्म से जुड़ा है. प्राचीन परंपराओं के अनुसार, ईस्टर पर रंग-बिरंगे अंडे तैयार किए जाते हैं. इन अंडों को चित्रकारी कर सजाया जाता है और बच्चों को उपहार स्वरूप दिया जाता है. यह परंपरा बच्चों और बड़ों दोनों में उत्साह भर देती है. 

ईस्टर अंडा, केवल एक प्रतीक नहीं बल्कि एक ऐसा संदेश है जो बताता है कि हर अंत के बाद एक नई शुरुआत होती है, हर रात के बाद एक नई सुबह आती है, और हर दुःख के बाद एक नई आशा जागती है.

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