जिस चंदन के लिए दक्षिण भारत मशहूर, अब राजस्थान में भी हो रही खेती... किसान ने ऐसे तैयार किए पौधे

राजस्थान के अलवर में किसान अब पारंपरिक खेती से हटकर चंदन की खेती कर रहे हैं. लक्ष्मणगढ़ के मलावाली गांव के किसान रामकृष्ण मीणा ने अपने खेत में 300 चंदन के पौधे लगाए हैं. उन्होंने पहले खेत की मिट्टी जांच के लिए दिल्ली भेजी और रिपोर्ट के आधार पर बेंगलुरु में उसी मिट्टी में पौधे तैयार करवाए. 4-5 फुट के होने पर पौधों को राजस्थान लाकर लगाया गया. अब अलवर के आसपास 10 हजार से ज्यादा चंदन के पौधे लगाए जा चुके हैं.

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अब तक 10 हजार से ज्यादा हो गई है चंदन के पौधों की संख्या. (Photo: Screengrabs) अब तक 10 हजार से ज्यादा हो गई है चंदन के पौधों की संख्या. (Photo: Screengrabs)

हिमांशु शर्मा

  • अलवर,
  • 29 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 1:35 PM IST

राजस्थान के अलवर में अब किसानों ने पारंपरिक खेती से हटकर चंदन की खेती का प्रयोग शुरू किया है. दक्षिण भारत में बड़े पैमाने पर होने वाली चंदन की खेती अब अलवर की जमीन पर भी नजर आने लगी है. यहां चंदन के पौधे तेजी से बढ़ रहे हैं और इन्हें देखने के लिए आसपास ही नहीं, बल्कि दूर-दराज के गांवों से भी किसान पहुंच रहे हैं.

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अलवर के लक्ष्मणगढ़ तहसील के मलावाली गांव के किसान रामकृष्ण मीणा ने अपने खेत में करीब 300 चंदन के पौधे लगाए हैं. खास बात यह है कि उन्होंने सीधे खेत में पौधे लगाने के बजाय इसकी पूरी तैयारी वैज्ञानिक तरीके से की. रामकृष्ण ने सबसे पहले अपने खेत की मिट्टी जांच के लिए दिल्ली भेजी. लैब से रिपोर्ट आने के बाद मिट्टी को बेंगलुरु भेजा गया, जहां उसी मिट्टी में चंदन के पौधे तैयार किए गए.

करीब 4 से 5 फुट ऊंचे होने के बाद इन पौधों को वापस राजस्थान लाया गया और खेत की मिट्टी में लगाया गया. अब ये पौधे काफी बड़े हो चुके हैं और उनकी अच्छी ग्रोथ हो रही है. रामकृष्ण के मुताबिक, उन्होंने 2023 में सरकारी नौकरी से रिटायर होने से पहले ही चंदन की खेती की तैयारी शुरू कर दी थी.

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सोशल मीडिया से मिली चंदन की खेती की जानकारी
रामकृष्ण ने बताया कि पारंपरिक खेती से अलग कुछ करने की इच्छा थी. इसी दौरान उन्होंने चंदन की खेती के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की. उन्होंने YouTube पर कई वीडियो देखे और Google के जरिए चंदन के पौधे लगाने, उनकी देखभाल और खेती से जुड़ी जरूरी जानकारी हासिल की. इसके बाद आंध्र प्रदेश से चंदन के पौधे मंगवाए और खेती शुरू कर दी.

रामकृष्ण कहते हैं कि आज सोशल मीडिया सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं है. उन्होंने इसी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल खेती की नई तकनीक सीखने के लिए किया और इसका फायदा उन्हें मिला.

दूसरे किसान भी सीख रहे चंदन की खेती
रामकृष्ण की चंदन की खेती देखकर आसपास के दूसरे किसानों में भी रुचि बढ़ी है. वह बताते हैं कि उन्होंने अपने जैसे कई किसानों को चंदन के पौधे लगाने और उनकी देखभाल के बारे में जानकारी दी है. उनके मुताबिक, अलवर के राजगढ़, लक्ष्मणगढ़ और मालाखेड़ा इलाके में अब सैकड़ों किसान चंदन के पौधे लगा रहे हैं और आसपास के क्षेत्र में 10 हजार से ज्यादा चंदन के पौधे लगाए जा चुके हैं.

अब रामकृष्ण का खेत चंदन की खेती देखने और समझने वाले किसानों के लिए एक तरह का सीखने का केंद्र बन गया है. दूर-दूर से ग्रामीण यहां पहुंचकर पौधों को देखते हैं और खेती से जुड़ी जानकारी लेते हैं. एक किसान का यह प्रयोग अब इलाके के दूसरे किसानों को भी पारंपरिक खेती के साथ नई संभावनाएं तलाशने के लिए प्रेरित कर रहा है.
 

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