अगर सोच बड़ी हो और उस पर लगातार मेहनत की जाए, तो छोटी शुरुआत भी बड़ी सफलता में बदल सकती है. राजस्थान के कोटा के शुभम शर्मा और उनकी पत्नी अर्पिता शर्मा ने यही कर दिखाया है. दोनों ने महज 10 लाख रुपये के निवेश से लिथियम बैटरी निर्माण का कारोबार शुरू किया और आज उनका सालाना कारोबार करीब 5 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है. अब उनका अगला लक्ष्य इसे 15 करोड़ रुपये तक ले जाना है.
शुभम शर्मा वर्ष 2019 में एक निजी कंपनी में नौकरी कर रहे थे. उसी दौरान उन्होंने इलेक्ट्रिक ऑफ-रोड व्हीकल्स के बढ़ते भविष्य को पहचाना. उस समय यह क्षेत्र नया था और बाजार में ऐसे वाहनों की संख्या भी बहुत कम थी. इसके बावजूद शुभम और अर्पिता शर्मा ने इस सेक्टर में संभावनाएं देखीं और रिसर्च एंड डेवलपमेंट शुरू कर दिया. दोनों ने 10 लाख रुपये का निवेश कर अपना स्टार्टअप शुरू किया. यह उनके लिए बड़ा जोखिम था, लेकिन उन्होंने इसे अवसर में बदल दिया.
नौकरी छोड़ इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के भविष्य पर लगाया दांव
लगातार शोध और तकनीकी विकास के बाद वर्ष 2020 में उन्होंने अपना पहला इलेक्ट्रिक ऑफ-रोड व्हीकल तैयार किया. इस वाहन की पहली डिलीवरी उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में की गई. वाहन में इस्तेमाल की गई लिथियम बैटरी की बेहतर परफॉर्मेंस ने ग्राहकों का भरोसा जीत लिया. इसके बाद उनकी बैटरियों की मांग तेजी से बढ़ने लगी. इसी दौरान कोविड-19 महामारी ने कारोबार की रफ्तार पर असर डाला, लेकिन शुभम और अर्पिता ने हार नहीं मानी. उन्होंने बदलते बाजार की जरूरत को समझा और आगे बढ़ते रहे.
वर्ष 2023 में दोनों ने CBS Fliiver Private Limited के तहत लिथियम बैटरी निर्माण का काम शुरू किया. कंपनी आज इलेक्ट्रिक व्हीकल, सोलर सिस्टम और इन्वर्टर के लिए आधुनिक लिथियम बैटरियां तैयार कर रही है. वर्तमान में कंपनी हर दिन 25 से 30 बैटरियां बनाती है. हर महीने करीब 1000 बैटरियों का उत्पादन किया जाता है. कंपनी में 26 इंजीनियर और तकनीशियन काम कर रहे हैं. अर्पिता शर्मा कंपनी की को-फाउंडर के रूप में बिजनेस संचालन की जिम्मेदारी संभालती हैं, जबकि शुभम शर्मा तकनीकी विकास और प्रोडक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं.
कंपनी की बैटरियों की कीमत 8 हजार रुपये से लेकर 2 लाख रुपये तक. खास बात यह है कि ज्यादातर बैटरियां पहले से मिले ऑर्डर के आधार पर तैयार होते ही ग्राहकों तक पहुंचा दी जाती हैं. शुभम शर्मा का कहना है कि इंडस्ट्रियल स्टैंडर्ड, वैज्ञानिक तकनीक और गुणवत्ता से कभी समझौता नहीं करना उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है.
पति ने संभाली टेक्नोलॉजी, पत्नी ने संभाला बिजनेस
इसी सोच की बदौलत 10 लाख रुपये का शुरुआती निवेश आज 5 करोड़ रुपये के कारोबार में बदल चुका है. अब कंपनी आने वाले समय में 15 करोड़ रुपये का सालाना टर्नओवर हासिल करने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है. कोटा के इस युवा दंपती की सफलता की कहानी यह साबित करती है कि सही सोच, जोखिम उठाने का साहस और लगातार नवाचार किसी भी छोटे स्टार्टअप को बड़ी सफलता तक पहुंचा सकता है.
चेतन गुर्जर