गुजरात के महीसागर जिले से एक चौंकाने वाली और गंभीर खबर सामने आई है. जहां लूनवाड़ा के एक ही स्कूल के 5 से अधिक बच्चों में एक दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर- (GBS गुइलेन-बैरे सिंड्रोम) के लक्षण मिलने से हड़कंप मच गया है. बच्चों में इस बीमारी के सिम्टम्स की पुष्टि होने के बाद से पालकों और स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है.
22 से 42 हजार रुपये में मिलता है एक इंजेक्शन
जानकारी के मुताबिक आदर्श स्कूल में पढ़ने वाले छात्र जहान के पिता केयूर पटेल ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि GBS के कारण उनके बच्चे की बोलने की क्षमता तक चली गई थी. हालांकि, समय पर त्वरित चिकित्सा मिलने के कारण अब उनकी स्थिति में सुधार है और उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई है. यह एक अत्यंत दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल विकार है, जिसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता खुद अपने ही तंत्रिका तंत्र पर हमला कर देती है. इसकी चिकित्सा बेहद खर्चीली है, जहां इसका एक इंजेक्शन 22 हजार से लेकर 42 हजार रुपये तक का आता है.
GBS के मुख्य लक्षण में मरीज की शरीर में गंभीर कमजोरी, हाथ और पैर की उंगलियों में सुन्नपन या झुनझुनी लकवा जैसी स्थिति उत्पन्न होना, मांसपेशियों पर नियंत्रण घटना, गले में तकलीफ और सांस लेने में कठिनाई ओर चलने और बैठने में अत्यधिक कमजोरी महसूस होना जैसे सिम्टम्स दिखाई पड़ते हे. GBS के सिम्टम्स दिखाई देने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या हॉस्पिटल में डॉक्टर का तुरंत संपर्क करनें को आरोग्य विभागकी और से अपील की गई है.
पिछले एक हफ्ते से स्वास्थ्य विभाग द्वारा निरंतर सर्वे चल रहा है. नगर पालिका क्षेत्र के 24 स्कूलों के 13106 बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की गई है और पेयजल के 7 महत्वपूर्ण सैंपल भी लिए गए हैं. साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में 415 घरों का डोर-टू-डोर सर्वे भी कराया गया है.
कलेक्टर ने दिया ये निर्देश
जिला आरोग्य अधिकारी महीसागर, डॉ. सीआर पटेलिया ने बताया कि एक ही स्कूल के बच्चों में इस तरह के मामले सामने आते ही महिसागर जिला स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया. बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए जिला कलेक्टर अर्पित सागर ने खुद कमान संभाली. कलेक्टर ने लूनवाड़ा के आदर्श विद्यालय, वाइब्रेंट वेव्स इंटरनेशनल एकेडमी, क्रिस्टल इंटरनेशनल स्कूल, क्रिस्टल साइंस स्कूल, कन्या प्राथमिक स्कूल, आंगनवाड़ी, वेदांत कॉलेज, इन्फिनिटी स्कूल और ब्राइट विद्या संकुल का राजस्व, पंचायत, फूड सेफ्टी, स्वास्थ्य, शिक्षा और DSO की संयुक्त टीमों के साथ दौरा किया ओर स्कूलों और आंगनवाड़ियों में बच्चों को मिलने वाले भोजन, पेयजल और साफ-सफाई की बारीकी से जांच की.
जिला कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि किसी भी बच्चे में GBS से जुड़ा कोई भी लक्षण दिखाई दे, तो बिना किसी देरी के स्वास्थ्य विभाग के कंट्रोल रूम या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से तुरंत संपर्क करें. साथ ही, निजी चिकित्सकों से भी अनुरोध किया गया है कि यदि उनके पास ऐसा कोई संदिग्ध मामला आता है, तो वे तुरंत स्वास्थ्य टीम को इसकी सूचना दें.
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