सोचिए, आपकी महीने की कमाई 15 हजार रुपये है. सुबह दुकान खोलते हैं, दिनभर कपड़ों की सिलाई करते हैं, शाम को हिसाब लगाते हैं कि घर का खर्च कैसे चलेगा. फिर एक दिन दरवाजे पर एक सरकारी नोटिस आता है. आप लिफाफा खोलते हैं. अंदर लिखा है- 974.97 करोड़ रुपये. पहले तो शायद आपको लगे कि कोई मजाक है. फिर दोबारा पढ़ेंगे. फिर परिवार को बुलाएंगे. फिर किसी जानकार को फोन करेंगे.
और जब पता चलेगा कि नोटिस सच में इनकम टैक्स विभाग की तरफ से आया है, तो सवाल यही होगा- भाई, मैंने ऐसा क्या कर दिया? अजमेर के गोविंदगढ़ में रहने वाले 62 साल के रेखराज ठाड़ा के साथ कुछ ऐसा ही हुआ है. रेखराज की कहानी इसलिए चौंकाती है, क्योंकि वह कोई करोड़पति कारोबारी नहीं हैं. बड़ा बाजार में किराये की छोटी सी दुकान पर सिलाई करते हैं. साथ में इंश्योरेंस कंपनी के एजेंट हैं.
दोनों कामों से महीने में करीब 15 हजार रुपये कमाने का दावा करते हैं. लेकिन इनकम टैक्स के नोटिस में उनके सामने करीब 975 करोड़ रुपये की टैक्स रिकवरी खड़ी कर दी गई. रेखराज का कहना है कि मैं तो जिंदगी में गुजरात तक नहीं गया. फिर सूरत की डायमंड कंपनी में उनका नाम डायरेक्टर कैसे पहुंच गया?
13 अगस्त को रेखराज के घर एक नोटिस पहुंचता है. नोटिस सूरत इनकम टैक्स विभाग की तरफ से था. उन्होंने शायद सोचा होगा कि सामान्य टैक्स से जुड़ा कोई कागज होगा. लेकिन नोटिस खोलते ही मामला उल्टा पड़ गया. इसमें बताया गया कि रेखराज सूरत की रूप रजत डायम नाम की डायमंड कंपनी के डायरेक्टर हैं और उनके ऊपर करीब 974.97 करोड़ रुपये की टैक्स रिकवरी है.
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अब जरा रेखराज की असली जिंदगी देखिए. गोविंदगढ़ के बड़ा बाजार में किराये की छोटी सी दुकान. काम- कपड़ों की सिलाई. दूसरा काम- इंश्योरेंस कंपनी के एजेंट. कुल मासिक कमाई- रेखराज के मुताबिक करीब 15 हजार रुपये है.
और सामने टैक्स का आंकड़ा- 975 करोड़ रुपये के आसपास.
यानी जितने पैसे की बात नोटिस में है, उतनी रकम तो रेखराज ने शायद सपने में भी एक साथ नहीं देखी होगी. रेखराज के लिए रकम से भी बड़ा झटका कंपनी के नाम ने दिया. क्योंकि उन्होंने दावा किया कि उन्होंने कभी सूरत में कोई डायमंड कंपनी नहीं चलाई, बल्कि गुजरात तक नहीं गए. फिर वो डायरेक्टर बने कैसे? रेखराज ने मामले की जांच एक CA से कराई. और यहीं से कहानी में एक और मोड़ आया. CA ने जांच की तो पता चला कि सूरत की एक और डायमंड कंपनी जय बाबेरी डायम में भी रेखराज का नाम डायरेक्टर के तौर पर दर्ज है. अब रेखराज के सामने सवालों की पूरी लिस्ट थी.
एक कंपनी में नाम कैसे पहुंचा? दूसरी कंपनी में भी नाम कैसे पहुंच गया? कंपनियां कौन चला रहा था? और अगर कारोबार उनका नहीं था, तो टैक्स की इतनी बड़ी देनदारी उनके नाम पर कैसे आ गई?
रेखराज का आरोप है कि किसी ने उनके PAN कार्ड का गलत इस्तेमाल किया. उनका कहना है कि उनकी पहचान के दस्तावेजों का इस्तेमाल करके कथित तौर पर फर्जी कंपनियां बनाई गईं और उन्हें उन कंपनियों का डायरेक्टर दिखा दिया गया.
अब असली जांच यही है कि रेखराज की आईडी का इस्तेमाल किसने किया. क्या सिर्फ PAN कार्ड की जानकारी इस्तेमाल हुई? क्या दूसरे दस्तावेज भी लगाए गए?कंपनियों के रिकॉर्ड में उनका नाम किस प्रक्रिया से दर्ज हुआ? और इन कंपनियों में आखिर कितने करोड़ का कारोबार हुआ? इन सवालों के जवाब जांच के बाद सामने आएंगे.
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इस कहानी का एक हिस्सा ऐसा है, जिसे रेखराज सबसे ज्यादा हैरानी से बताते हैं. रेखराज के मुताबिक, वह 2009 से LIC एजेंट हैं. हर साल अपना इनकम टैक्स रिकॉर्ड रखते हैं. उनके मुताबिक, उन्हें कई सालों से करीब 5 हजार रुपये का टैक्स रिफंड मिलता रहा है. यानी एक तरफ उनका सामान्य आर्थिक रिकॉर्ड है, जिसमें उन्हें रिफंड मिलता है. और दूसरी तरफ अचानक 975 करोड़ रुपये की टैक्स रिकवरी का नोटिस.
रेखराज का सवाल है कि जिस विभाग के पास उनके इनकम टैक्स से जुड़े रिकॉर्ड मौजूद हैं, वहां उनके नाम से इतने बड़े कारोबारी लेनदेन कैसे सामने आए?फिलहाल इस सवाल का जवाब जांच में तलाशा जा रहा है.
ई-मेल के जरिए रेखराज ने भेजा अपना जवाब
नोटिस मिलने के बाद रेखराज ने इनकम टैक्स विभाग को ई-मेल के जरिए अपना जवाब भेजा. लेकिन परिवार की परेशानी यहीं खत्म नहीं हुई. अब रेखराज अपने बेटों के साथ पुलिस और प्रशासन के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं. उन्होंने अजमेर SP कार्यालय पहुंचकर एडिशनल SP ग्रामीण से मदद मांगी. पुलिस ने शिकायत दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है.
अब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि रेखराज के दस्तावेजों का इस्तेमाल किसने किया और सूरत की दोनों कंपनियों से उनका नाम किस तरह जुड़ा. अगर ये कंपनियां फर्जी थीं, तो उनके नाम पर कारोबार कैसे हुआ? कितने बैंक खाते खुले? कितने वित्तीय लेनदेन हुए? और इस पूरे खेल में और कितने लोगों की पहचान इस्तेमाल हुई? ये सब जांच का हिस्सा है. महीने के 15 हजार रुपये कमाने वाला एक दर्जी अब उस आंकड़े से जूझ रहा है, जिसे देखकर बड़े कारोबारी भी परेशान हो जाएं.
रेखराज कहते हैं कि उन्होंने न ऐसी कोई कंपनी बनाई, न सूरत में कोई कारोबार किया और न ही खुद को किसी डायमंड कंपनी का डायरेक्टर बनाया. उनका आरोप है कि उनकी पहचान का गलत इस्तेमाल किया गया. अब सच क्या है, ये जांच से सामने आएगा.
चंद्रशेखर शर्मा