पंजाब की राजनीतिक हवा: 'आप' की कमजोरी किसके लिए संजीवनी?

पंजाब की राजनीति 2027 विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर बदलाव के दौर से गुजर रही है. 2022 में आम आदमी पार्टी ने बड़ी जीत हासिल की थी, लेकिन अब उसके वोट शेयर में गिरावट आई है. भाजपा ने अपने वोट शेयर में वृद्धि की है और संगठनात्मक विस्तार किया है. नशे, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे AAP की कमजोरी के मुख्य कारण हैं.

Advertisement
2022 में AAP ने 92 सीटें जीती थीं. (Photo: ITG) 2022 में AAP ने 92 सीटें जीती थीं. (Photo: ITG)

संयम श्रीवास्तव

  • नई दिल्ली,
  • 02 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 6:23 AM IST

पंजाब की राजनीति एक बार फिर संक्रमण के दौर से गुजर रही है. 2022 में आम आदमी पार्टी (आप) ने 92 सीटों की ऐतिहासिक जीत के साथ सत्ता हासिल की थी और लगभग 42 प्रतिशत वोट शेयर के साथ पारंपरिक कांग्रेस-अकाली द्वंद्व को तोड़ दिया था. अब 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और सत्ताधारी दल की स्थिति पहले जैसी नहीं दिखती.दूसरी तरफ जिस तरह से बीजेपी लगातार पंजाब की राजनीति में घुसी पड़ी है उससे यही संदेश जा रहा है कि यहां पार्टी को कुछ उम्मीद दिख रहा है. सवाल यह है कि क्या आप की इस कमजोरी से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को ठोस लाभ मिलने वाला है?

Advertisement

सत्ताधारी पार्टी आप ने पहली बार 2024 के लोकसभा चुनावों में अपने कमजोर होने के संकेत दिए थे. आप का वोट शेयर 42.3 प्रतिशत से गिरकर 26.2 प्रतिशत रह गया और वह केवल 33 विधानसभा खंडों में आगे थी, जबकि 2022 में उसने 92 सीटें जीती थीं. कांग्रेस 37 खंडों में और भाजपा 23 में आगे रही. भाजपा का वोट शेयर 6.6 प्रतिशत से बढ़कर 18.6 प्रतिशत हो गया. हाल ही में एक इंटेलिजेंस सर्वे (सितंबर-अक्टूबर 2026) में आप को 69-82 सीटों का अनुमान  और वोट शेयर लगभग 38 प्रतिशत मिलता दिख रहा है. कांग्रेस 17-34, भाजपा 4-12 और शिरोमणि अकाली दल 2-6 सीटों पर. कुछ आंतरिक आकलन 45-50 सीटों की बात करते हैं, जो बहुमत (59) से कम है. अन्य मीडिया हाउसेस के सर्वेक्षणों में भी सरकार की परफॉर्मेंस को लेकर असंतोष (लगभग 55 प्रतिशत) सामने आया है.

Advertisement

आप की कमजोरी के कारण स्पष्ट हैं. नशे की समस्या, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था, किसानों के मुद्दे और बढ़ता कर्ज (लगभग 4.5 लाख करोड़ रुपये) प्रमुख हैं. सरकार ने युद्ध नशेयां विरुद्ध अभियान चलाया, जब्ती और गिरफ्तारियां बढ़ाईं, लेकिन चिट्टा की उपलब्धता और युवाओं की मौतों पर आलोचना जारी है. कल्याणकारी योजनाओं (मुफ्त बिजली, महिलाओं के लिए बस यात्रा आदि) के बावजूद आर्थिक दबाव और वादों की पूर्ति न होने की शिकायतें हैं. आंतरिक कलह भी उभर कर सामने आ रही है. दो विधायकों ने इस्तीफा देकर नेतृत्व पर हमला बोला. इससे पहले राज्यसभा सांसदों का भाजपा में जाना और टिकट वितरण से असंतोष भी संगठन को कमजोर कर रहा है.

भाजपा इस स्थिति से लाभ उठाने की कोशिश कर रही है. उसका संगठनात्मक विस्तार शहरी क्षेत्रों, हिंदू मतदाताओं, दलितों और कुछ ओबीसी समूहों में दिख रहा है. 2026 के नगर निकाय चुनावों में उसने वार्डों की संख्या बढ़ाई. केंद्रीय योजनाओं, डबल इंजन की अपील और नशे पर आक्रामक रुख (अमित शाह द्वारा 2029 तक नशामुक्त पंजाब का वादा) उसके पक्ष में काम कर रहे हैं. कुछ रिपोर्टों में अकाली दल के साथ गठबंधन की चर्चा है, जो ग्रामीण सिख वोटों को जोड़ सकता है. अमित शाह ने एनडीए सरकार की बात कही थी. हालांकि भाजपा अकेले लड़ने की भी तैयारी दिखा चुकी है, लेकिन गठबंधन से सीटों का गणित बेहतर हो सकता है.

Advertisement

फिर भी, पंजाब में बीजेपी को बहुत अधिक लाभ होगा इसमें संदेह ही है. पंजाब सिख-बहुल राज्य है और भाजपा की ग्रामीण पंथिक पहचान कमजोर रही है. किसान आंदोलन और कृषि कानूनों की विरासत अभी भी बाधा है. 2024 में भी वह एक भी लोकसभा सीट नहीं जीत सकी. सर्वेक्षणों में उसकी सीटों की संख्या कम ही दिखती है. बहुकोणीय मुकाबला (आप, कांग्रेस, भाजपा, अकाली दल और वारिस पंजाब दे जैसे पंथिक गुट) मतदाताओं को बांटता है. खंडित विपक्ष अक्सर सबसे बड़ी पार्टी को फायदा पहुंचाता है, जैसा 2022 में आप को हुआ था. कांग्रेस भी एंटी-इंकंबनसी का लाभ लेने की कोशिश कर रही है, हालांकि उसका आंतरिक विवाद जारी है. अकाली दल कमजोर है, लेकिन गठबंधन से दोनों पक्षों को कुछ फायदा हो सकता है.

निष्कर्षतः, आप की कमजोरी भाजपा को वोट शेयर और कुछ सीटों में वृद्धि का अवसर जरूर देगी, खासकर शहरी और मिश्रित क्षेत्रों में. अगर गठबंधन बनता है तो वह विपक्षी ध्रुव मजबूत कर सकता है. लेकिन अकेले या सीमित गठबंधन से सत्ता हथियाना आसान नहीं. पंजाब का इतिहास बताता है कि यहां स्थानीय मुद्दे, पहचान और सत्ताधारी दल की जमीनी पकड़ निर्णायक होती है. अगर आप अपनी योजनाओं और संगठनात्मक एकता से कुछ जमीन वापस पा लेती है, तो विपक्ष का लाभ और सीमित हो जाएगा. 2027 का चुनाव अभी भी खुला है और अंतिम परिणाम मतदाताओं की प्राथमिकताओं और दलों की रणनीति पर निर्भर करेगा.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »