लद्दाख में हंगामा करने वाली Gen Z युवती को सेना का ‘सबक’

लद्दाख के मिनमार्ग चेकपॉइंट पर Gen Z युवती का हंगामा वायरल हुआ. टैक्स और जेन-जेड का नाम लेकर सुरक्षाकर्मियों से भिड़ी. लेकिन आर्मी के दिग्गजों ने गुस्से की जगह उसे समझाइश दी. भ्रम तोड़ा, सबक सिखाया और माफ भी कर दिया. युवती भूल गई थी कि यहीं से कारगिल जंग का इलाका शुरू होता है, जहां सैकड़ों सैनिक शहीद हुए थे.

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लद्दाख में सेना और पुलिस से उलझती Gen-Z युवती का वायरल वीडियो देश में बहस का विषय बन गया है. लद्दाख में सेना और पुलिस से उलझती Gen-Z युवती का वायरल वीडियो देश में बहस का विषय बन गया है.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 20 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 3:01 PM IST

लद्दाख में एक Gen Z युवती का वायरल वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है. युवती ने मिनमार्ग चेकपॉइंट पर सुरक्षाकर्मियों से बहस की, धरना दे दिया और यहां तक कि आर्मी काफिले को भी रोकने की कोशिश की. उसने बार-बार कहा कि हम Gen Z हैं, हम ये बर्दाश्त नहीं करेंगे. टैक्स हम देते हैं, तनख्वाह इन्हीं से मिलती है. सड़क बंद थी, लोग घंटों इंतजार कर रहे थे. युवती का गुस्सा फूट पड़ा और वीडियो ने पूरे देश में तूल पकड़ लिया.

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लेकिन इस हंगामे के बाद भारतीय सेना के कई दिग्गजों ने अपने अंदाज में जवाब दिया. न कोई गाली-गलौज, न कोई अपमान. बल्कि पहले भ्रम तोड़ा, फिर थोड़ा सबक सिखाया, थोड़ी समझाइश दी और बहुत सारी उम्मीदों के साथ माफ भी कर दिया.

कई पूर्व आर्मी अफसरों ने साफ कहा कि लद्दाख जैसे संवेदनशील इलाके में सड़क बंद होना कोई मनमानी नहीं होती. सुरक्षा कारणों से होता है. मिनमार्ग चेकपॉइंट पर उस दिन सेना के महत्वपूर्ण ऑफिसर्स का काफिला गुजर रहा था. खराब मौसम की वजह से हवाई यात्रा रद्द हो गई थी, इसलिए सड़क से जाना पड़ा. लोग घंटों रुके जरूर, लेकिन ये कोई आम जगह नहीं है. ये वो इलाका है जहां सुरक्षा बहुत जरूरी है.

हंगामा करने वाली युवती का भ्रम तोड़ते हुए कारगिल युद्ध लड़ चुकीं कैप्टन याशिका त्यागी कहती हैं- यदि Gen Z की उम्र 20-25 साल होती है, तो मैं बताना चाहती हूं कि मैं मेरे साथी फौजी याद करेंगे कि हमने 20-22 साल की उम्र में ही फौज ज्वाइन की थी. कारगिल युद्ध शुरू हुआ तो मैं 25 साल की थी, और उसी एरिया में ऑपरेट कर रही थी, जहां इस लड़की ने हंगामा किया. मैं न सिर्फ जंग लड़ रही थी, बल्कि अपने गर्भ में एक बच्चे को भी पाल रही थी. वो मेरी प्रेग्नेंसी का चौथा, पांचवां और छठा महीना था. तब हम Gen Z तो नहीं कहे जाते थे, लेकिन हम थे बिल्कुल इसी उम्र के. तो हमें पता है कि उम्र का तूफान क्या होता है, और यदि उसे सही दिशा में डायरेक्ट किया जाए तो लोग कैसे निखर कर आते हैं, मैंने देखा है ये. क्या हम विक्रम बत्रा को भूल सकते हैं. क्या हम मनोज पांडेय को भूल सकते हैं, वो भी क्या युवा थे और क्या कुर्बानी देकर चले गए हैं. तो मैं कहूंगी कि Gen Z एक बड़ी जिम्मेदारी है. हमारा देश आपकी तरफ देख रहा है.
हम लाए हैं तूफान से कश्ती निकाल के,
इस देश को रखना मेरे बच्चों संभाल के
मैं इतना कहूंगी कि युवा ही हमारा भविष्य हैं, और उन्हीं को देश को आगे ले जाना है.

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फिर थोड़ा सबक सिखाने की बारी आई. लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लन ने सीधे युवती को संबोधित करते हुए X पोस्ट लिखी - माय डियर लेडी, सैनिक अपना टैक्स पहले ही चुका देते हैं, वेतन मिलने से पहले ही. आप ऐसे क्षेत्रों में छुट्टियां मनाने जा सकती हैं क्योंकि हमारे सैनिक दिन-रात, अपनी जान की कीमत पर भी उसकी रक्षा कर रहे हैं. आपकी भाषा अच्छी परवरिश और शिक्षा का प्रतिबिंब है. हमेशा सम्मानजनक रहें. हक जताने से पहले कानून का पालन करने वाले एक अच्छे नागरिक बनना सीखें.
और अंत में….
‘गेट वेल सून’
जय हिंद

टैक्स वाली दलील को धूल में मिलाते हुए लेफ्टिनेंट जनरल डीपी पांडेय ने कहा- मैं उस महिला को शर्मिंदा नहीं करना चाहता जिसने लद्दाख में हंगामा किया. लेकिन उसने कुछ ऐसे नुकसान पहुंचाए हैं, जो देश को जानना चाहिए.
उसने कश्मीरियों के साथ फूट डालने की कोशिश की. कश्मीरी भी भारत के बराबर नागरिक हैं और सुरक्षा जांच का सामना करते रहे हैं. कोई सरकार या सुरक्षा बल इसे मजे से नहीं करता.
आज शांति है, उसी वर्दी की वजह से जिसका उसने मजाक उड़ाया कि वह उसके टैक्स से तनख्वाह लेती है.
इतनी छोटी सी रकम के लिए... और मैं खुशी से क्राउड फंडिंग करके उसे एक महीने की तनख्वाह दे दूंगा, ताकि वह सियाचिन या उसी जगह पर सेवा करे जहां उसने हंगामा किया, और अपने जैसे लोगों से निपटे.
हम (सैनिक) रिटायरमेंट के बाद भी टैक्स देते हैं. असल में पहले टैक्स काट लिया जाता है, फिर तनख्वाह मिलती है. यानी हम पहले से टैक्स देते हैं.
उसने Gen Z को गलत तरीके से बदनाम किया है. दुनिया भर में यही कोशिश हो रही है. मैं खुद बहुत सारे Gen Z से मिलता हूं. वे धैर्यवान, विनम्र, सम्मान करने वाले और अच्छे व्यवहार वाले होते हैं... भले ही डिजिटल दुनिया में हों. जम्मू-कश्मीर और बाकी भारत में मुझे अभी तक उसके जैसे कोई नहीं मिला. अपवाद हर समय रहे हैं.
शायद वह कभी नहीं मानेगी कि उसका गुस्सा गलत था, लेकिन उसे स्वीकार करना चाहिए कि वर्दी वाले Gen Z और उनके अधिकारी ने उसके साथ कितनी शालीनता से व्यवहार किया.

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मिनमार्ग चेकपाइंट, जिसके आगे से शुरू होता है कारगिल जंग का मैदान

सेना के अफसरों ने गुस्सा नहीं दिखाया. उन्होंने समझाया कि सुरक्षा व्यवस्था क्यों जरूरी है. टैक्स वाला भ्रम तोड़ा. लेकिन इस पूरे हंगामे में एक बड़ी बात छूट गई. मिनमार्ग चेकपॉइंट, जहां ये सब हुआ, उसके आगे लेह की ओर बढ़ते हुए वो इलाका शुरू होता है जहां 1999 में कारगिल की जंग लड़ी गई थी. उसी इलाके में सैकड़ों सैनिकों और अफसरों ने अपनी जान दी थी. बर्फीली चोटियों पर, दुश्मन के खिलाफ लड़ते हुए. टाइगर हिल, तोलोलिंग जैसी जगहों पर बहादुरी के किस्से आज भी याद किए जाते हैं. युवती शायद भूल गई कि वो जिस जमीन पर खड़ी होकर टैक्स और Gen Z की बात कर रही थी, उसी जमीन पर कुछ साल पहले खून बहा था. सैनिकों ने अपनी जान दी थी ताकि देश सुरक्षित रहे, ताकि लोग घूम सकें, ताकि शांति बनी रहे.

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