FD पर फर्जी लोन, फिर सरकारी रकम की हेराफेरी... ओडिशा में को-ऑपरेटिव बैंक के पूर्व मैनेजर समेत 2 गिरफ्तार

ओडिशा में सहकारी बैंक से जुड़ी वित्तीय अनियमितता के दो मामलों में कार्रवाई हुई है. मयूरभंज सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक की बहल्दा शाखा के पूर्व मैनेजर और कर्मचारी को ग्राहकों की FD पर फर्जी लोन खाते बनाकर 64.42 लाख रुपये के गबन के आरोप में गिरफ्तार किया गया. वहीं, बोलांगीर में PACS के पूर्व सचिव पर 22.19 लाख की वित्तीय गड़बड़ी का आरोप है.

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24 FD के खिलाफ बनाए गए फर्जी LATD खाते.(Photo: Representational) 24 FD के खिलाफ बनाए गए फर्जी LATD खाते.(Photo: Representational)

aajtak.in

  • भुवनेश्वर,
  • 06 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 10:55 PM IST

ओडिशा में सहकारी बैंक से सरकारी धन की कथित हेराफेरी के मामले में विजिलेंस विभाग ने दो पूर्व बैंककर्मियों को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि ग्राहकों की जानकारी और सहमति के बिना उनकी फिक्स्ड डिपॉजिट के आधार पर फर्जी लोन खाते बनाए गए और बाद में रकम निकाल ली गई. इस मामले में कुल 64.42 लाख रुपये के नुकसान की बात सामने आई है.

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गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मयूरभंज सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड की बहल्दा शाखा के पूर्व मैनेजर डिचेन कुमार मिश्रा और पूर्व कर्मचारी मलय दत्ता के रूप में हुई है. अधिकारियों के मुताबिक, दोनों ने तीन अन्य बैंक कर्मचारियों के साथ मिलकर कथित तौर पर यह गड़बड़ी की.

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जांच एजेंसी के अनुसार, वर्ष 2019 से 2024 के बीच ग्राहकों की 24 फिक्स्ड डिपॉजिट के खिलाफ बिना उनकी जानकारी के Loan Against Term Deposit यानी LATD खाते बनाए गए. इन फर्जी खातों के जरिए रकम का इस्तेमाल किया गया, जिससे बैंक और सरकारी धन को 64.42 लाख रुपये का नुकसान पहुंचा.

24 FD के खिलाफ बनाए गए फर्जी LATD खाते

विजिलेंस विभाग के मुताबिक, आरोपियों ने ग्राहकों की टर्म डिपॉजिट को आधार बनाकर लोन तैयार किए. ग्राहकों को इसकी जानकारी तक नहीं थी और न ही उन्होंने इसके लिए सहमति दी थी. इसके बाद इन खातों से जुड़ी रकम कथित तौर पर दूसरे इस्तेमाल में ले ली गई.

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मामला सामने आने के बाद विजिलेंस ने जांच शुरू की और बैंक के रिकॉर्ड समेत संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल की. जांच में पूर्व मैनेजर और कर्मचारी की भूमिका सामने आने के बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया.

अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में अभी जांच जारी है. तीन अन्य बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है. एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी लोन तैयार करने और रकम को निकालने की पूरी प्रक्रिया में किस-किस की भूमिका रही.

बाकी आरोपियों की भूमिका भी खंगाली जा रही

विजिलेंस विभाग ने बताया कि मामले की आगे की जांच के दौरान बाकी आरोपियों की भूमिका और कथित वित्तीय धोखाधड़ी की वास्तविक सीमा का पता लगाया जाएगा. एजेंसी बैंक के रिकॉर्ड और लेनदेन की विस्तृत जांच कर रही है.

इस बीच ओडिशा में वित्तीय अनियमितता से जुड़ा एक अलग मामला भी सामने आया है. बोलांगीर जिले में सुनामुंडी प्राइमरी एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव सोसाइटी यानी PACS के पूर्व सचिव को भी विजिलेंस विभाग ने गिरफ्तार किया है.

PACS के पूर्व सचिव पर 22.19 लाख की अनियमितता का आरोप

गिरफ्तार पूर्व सचिव की पहचान मौसम बेहरा के रूप में हुई है. अधिकारियों के मुताबिक, उन पर 22.19 लाख रुपये से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं का आरोप है. इस मामले में भी विजिलेंस विभाग ने कार्रवाई की है और संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की जा रही है.

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दोनों मामलों ने ओडिशा के सहकारी वित्तीय संस्थानों में रिकॉर्ड और धन के इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़े किए हैं. एक मामले में ग्राहकों की FD के आधार पर फर्जी लोन तैयार करने का आरोप है, जबकि दूसरे प्रकरण में PACS के स्तर पर लाखों रुपये की वित्तीय अनियमितता सामने आई है.

विजिलेंस विभाग दोनों मामलों में आगे की जांच कर रहा है. बैंक फ्रॉड वाले मामले में तीन अन्य कर्मचारियों की भूमिका और कुल नुकसान का आकलन किया जा रहा है, जबकि बोलांगीर के PACS मामले में भी वित्तीय गड़बड़ी से जुड़े तथ्यों की पड़ताल जारी है.

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