मध्य प्रदेश के उज्जैन में करीब 170 साल पुराने खड़े हनुमान मंदिर का ढांचा टूट चुका है. हनुमानजी की प्रतिमा अब मंदिर के गर्भगृह में नहीं, बल्कि एक टेंट में है. हर दिन भक्त यहां पहुंचते हैं, दर्शन करते हैं और पूजा-पाठ करते हैं. लेकिन प्रतिमा को लेकर प्रशासन की कवायद अब भी जारी है. इसी बीच सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात कुछ ऐसा हुआ, जिसने इस पूरे मामले को फिर चर्चा में ला दिया. भोपाल से एक सर्वे टीम उज्जैन पहुंची. रात के वक्त मंदिर खुलवाया गया और आधुनिक मशीनों से हनुमानजी की प्रतिमा की जांच शुरू हुई. टीम करीब डेढ़ घंटे तक वहां रही.
जांच में यह पता लगाने की कोशिश की गई कि प्रतिमा जमीन के भीतर कितनी गहराई तक है, उसकी पकड़ कैसी है और उसे हटाने की स्थिति में नुकसान पहुंचने का कितना खतरा है. लेकिन इस कार्रवाई के बाद एक सवाल खड़ा हो गया- जब जांच इतनी अहम थी, तो इसे आधी रात को चुपचाप कराने की जरूरत क्यों पड़ी?
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यह मामला उज्जैन के सराफा इलाके में स्थित खड़े हनुमान मंदिर का है. सिंहस्थ मेले की तैयारियों के लिए शहर की सड़कों को चौड़ा किया जा रहा है. कंठाल से छत्रीचौक तक जाने वाले रास्ते में करीब 170 साल पुराना यह मंदिर भी आ रहा है.
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मंदिर को दूसरी जगह ले जाने की कोशिश अगस्त के आखिर से चल रही है. जिला प्रशासन मंदिर का मुख्य ढांचा तोड़ चुका है, लेकिन हनुमानजी की प्रतिमा को अब तक हटाया नहीं जा सका है. फिलहाल प्रतिमा को टेंट में रखा गया है. भक्त यहीं पहुंचकर दर्शन करते हैं. मंदिर सेवक रामू गुरु के मुताबिक, लोग लगातार यहां पूजा-पाठ के लिए आ रहे हैं. यानी मंदिर का ढांचा भले ही नहीं बचा, लेकिन श्रद्धालुओं का आना जारी है.
भोपाल से आई टीम ने मशीनों से क्या देखा?
सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात मंदिर बंद होने के बाद उसे खुलवाया गया. भोपाल से आई सर्वे टीम के साथ उज्जैन के एसडीएम एलएन गर्ग भी मौजूद थे. टीम ने आधुनिक मशीनों और उपकरणों की मदद से प्रतिमा की जांच की. खास तौर पर दो चीजें समझने की कोशिश की गईं. पहली यह कि प्रतिमा जमीन के भीतर कितनी गहराई तक मौजूद है. दूसरी चीज यह कि प्रतिमा की जमीन के साथ पकड़ यानी उसका लॉकिंग सिस्टम कैसा है.
करीब डेढ़ घंटे तक चली इस जांच का मकसद यह समझना था कि अगर प्रतिमा को हटाया जाता है, तो उसे सुरक्षित तरीके से कैसे निकाला जा सकता है और इस दौरान उसे नुकसान पहुंचने की कितनी आशंका है. हालांकि, जांच के बाद प्रशासन ने अब तक रिपोर्ट या नतीजे सार्वजनिक नहीं किए हैं. यह भी साफ नहीं किया गया है कि प्रतिमा को हटाने का फैसला लिया गया है या नहीं.
आधी रात को जांच कराने पर उठे सवाल
अब हिंदूवादी नेता और पूर्व पार्षद संतोष व्यास ने देर रात जांच कराने के तरीके पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि अगर प्रशासन को प्रतिमा की बनावट और जमीन में उसकी पकड़ की जांच करनी थी, तो यह काम पारदर्शी तरीके से सबके सामने भी किया जा सकता था. उनका सवाल है कि रात के अंधेरे में बिना सार्वजनिक जानकारी के टीम बुलाने की क्या जरूरत थी? इससे श्रद्धालुओं के मन में भ्रम और आशंका पैदा हो सकती है.
संतोष व्यास ने छत्रीचौक की शाही मस्जिद का भी जिक्र किया. उनका कहना है कि वहां एक हिस्सा हटाए जाने के बाद निर्माण शुरू हो गया है, जबकि हनुमान मंदिर का ढांचा टूटने के बाद से प्रतिमा अब तक टेंट में है. यह उनकी ओर से उठाया गया सवाल है. प्रशासन की ओर से इस तुलना और आरोपों पर कोई आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है.
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि हनुमानजी की प्रतिमा का आगे क्या होगा? क्या सर्वे के बाद उसे दूसरी जगह ले जाने की तैयारी है, या प्रशासन कोई दूसरा रास्ता तलाश रहा है? फिलहाल प्रशासन ने न तो प्रतिमा को हटाने की बात कही है और न ही यह बताया है कि सर्वे में क्या सामने आया.
संदीप कुलश्रेष्ठ