मध्य प्रदेश में बुधवार, 23 सितंबर को व्यापारियों ने 'नो UPI डे' मनाकर 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) का विरोध किया. इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, रतलाम, नीमच, मंदसौर और जावरा समेत कई शहरों में व्यापारियों ने अलग-अलग तरीके से प्रदर्शन किया.
कहीं दुकानों पर लगे UPI QR कोड को काले कपड़े से ढका गया, तो कहीं व्यापारियों ने अपने बारकोड बॉक्स एक जगह रखकर सांकेतिक प्रदर्शन किया. व्यापारिक संगठनों ने ग्राहकों से इस दौरान UPI की जगह नकद भुगतान करने की अपील की. व्यापारियों का कहना है कि उनका विरोध डिजिटल पेमेंट व्यवस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि प्रस्तावित MDR से पड़ने वाले अतिरिक्त आर्थिक बोझ को लेकर है.
भोपाल में QR स्कैनर पर बांधा काला कपड़ा
भोपाल में व्यापारियों ने अपनी दुकानों पर लगे UPI स्कैनर और QR कोड को काले कपड़े से ढककर विरोध जताया. कुछ व्यापारियों ने UPI के प्रतीकात्मक पुतले को भी काले कपड़े से ढककर प्रदर्शन किया.
व्यापारियों का कहना है कि कम मार्जिन वाले कारोबार में यदि डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त लागत आती है तो इसका असर व्यापार की लागत पर पड़ सकता है. उन्होंने सरकार से MDR से जुड़ी व्यवस्था पर पुनर्विचार करने और इसे वापस लेने की मांग की.
भोपाल के व्यापारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि वे UPI के खिलाफ नहीं हैं. उनका कहना है कि डिजिटल भुगतान अब कारोबार का अहम हिस्सा बन चुका है, लेकिन वे UPI लेनदेन पर प्रस्तावित अतिरिक्त शुल्क का विरोध कर रहे हैं.
इंदौर में राजबाड़ा पर रखे गए UPI बारकोड बॉक्स
इंदौर में विरोध का तरीका कुछ अलग रहा. यहां अहिल्या चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के आह्वान पर 125 से अधिक व्यापारिक संगठनों से जुड़े व्यापारियों ने ‘नो UPI डे’ में हिस्सा लिया. व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठानों पर इस्तेमाल होने वाले UPI बारकोड बॉक्स राजबाड़ा पहुंचाए और उन्हें एक जगह रखकर सांकेतिक प्रदर्शन किया.
इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अक्षय जैन ने कहा कि व्यापारियों का उद्देश्य डिजिटल भुगतान को रोकना नहीं, बल्कि प्रस्तावित मर्चेंट शुल्क को लेकर अपनी चिंता सरकार और संबंधित संस्थाओं तक पहुंचाना है.
व्यापारियों का तर्क है कि कम मार्जिन वाले कारोबार में अतिरिक्त शुल्क सीधे कारोबारी लागत को प्रभावित कर सकता है.
UPI बंद होने से ग्राहकों को भी हुई परेशानी
‘नो UPI डे’ के दौरान कुछ बाजारों में ग्राहकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा. डिजिटल भुगतान की आदत पड़ चुके कई ग्राहक खरीदारी के लिए पहुंचे, लेकिन उनके पास पर्याप्त नकदी नहीं थी.
ग्वालियर के दाल बाजार में भी ऐसी तस्वीर देखने को मिली. व्यापारियों ने ग्राहकों को पहले ही UPI भुगतान स्वीकार नहीं करने की सूचना दे दी थी, लेकिन इसके बावजूद कुछ ग्राहक कैश लेकर नहीं पहुंचे.
व्यापारियों के मुताबिक, कुछ ग्राहकों को सामान खरीदने के बाद भुगतान की व्यवस्था करने में परेशानी हुई. कुछ लोगों ने दूसरे लोगों से पैसे लेकर, कुछ ने घर से नकदी मंगाकर और कुछ ग्राहकों ने ATM का सहारा लेकर भुगतान किया.
वहीं, कुछ ग्राहकों ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में UPI भुगतान उनकी रोजमर्रा की आदत बन गया है. ऐसे में अचानक नकद भुगतान करने की स्थिति आने से उन्हें परेशानी हुई.
2000 रुपये से ज्यादा के UPI भुगतान पर क्या है नया MDR?
विवाद का केंद्र 2,000 रुपये से अधिक के व्यक्ति से व्यापारी (P2M) UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक यह नया ढांचा 15 अक्टूबर 2026 से लागू होना है. 2,000 रुपये तक के UPI मर्चेंट भुगतान पर यह MDR लागू नहीं होगा.
0.4 प्रतिशत की दर से 2,000 रुपये के भुगतान पर MDR 8 रुपये और 10,000 रुपये के भुगतान पर 40 रुपये बैठेगा. वहीं, 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर शुल्क की अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन बताई गई है.
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि ग्राहक को UPI से भुगतान करने पर अलग से 0.4 प्रतिशत शुल्क देना होगा. सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस MDR का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला जाना है और UPI से भुगतान करने वाले ग्राहक से अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा.
व्यापारी क्यों कर रहे हैं विरोध?
व्यापारी संगठनों का कहना है कि UPI लंबे समय से बिना MDR के इस्तेमाल हो रहा है और अब अतिरिक्त लागत लागू होने से खासकर कम मार्जिन वाले कारोबार प्रभावित हो सकते हैं.
अहिल्या चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष रमेश खंडेलवाल के मुताबिक, मध्य प्रदेश के कई शहरों में व्यापारियों ने इस अभियान में हिस्सा लिया. उन्होंने कहा कि व्यापारी इस व्यवस्था को लेकर सरकार के सामने अपनी आपत्ति दर्ज करा रहे हैं.
इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अक्षय जैन ने सरकार से 15 अक्टूबर से पहले प्रस्तावित MDR व्यवस्था वापस लेने की मांग की. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि फैसला वापस नहीं हुआ तो व्यापारी UPI QR कोड मशीनों को जलाशयों में विसर्जित करने जैसा विरोध भी कर सकते हैं. यह उनकी ओर से कही गई बात है, न कि लागू की गई कार्रवाई.
जबलपुर में भी विरोध, आपत्तियां नहीं मांगने का आरोप
जबलपुर में नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के पीजी नाजपांडे ने भी UPI शुल्क व्यवस्था पर आपत्ति जताई. उन्होंने आरोप लगाया कि UPI पर शुल्क लगाने से पहले नागरिकों से आपत्तियां आमंत्रित नहीं की गईं. उन्होंने Payment and Settlement Systems Act, 2007 की धारा 10 का हवाला देते हुए कहा कि सरकार को पहले आपत्तियां आमंत्रित करनी चाहिए थीं.
नाजपांडे ने यह भी आशंका जताई कि भले ही शुल्क सीधे ग्राहकों से लेने की अनुमति न हो, लेकिन कारोबारी लागत बढ़ने पर इसका अप्रत्यक्ष असर उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है. यह उनका तर्क और आशंका है; सरकार का कहना है कि MDR ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा.
भोपाल में CAIT का सांकेतिक 'ब्लैक आउट'
भोपाल में कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) से जुड़े व्यापारियों ने भी सांकेतिक ‘नो UPI डे’ मनाया. दुकानों पर लगे QR कोड को काले कपड़े से ढककर यह संदेश दिया गया कि व्यापारी UPI व्यवस्था के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि MDR की अतिरिक्त लागत का विरोध कर रहे हैं.
CAIT भोपाल के जिला अध्यक्ष धर्मेंद्र शर्मा ने MDR यानी ‘Merchant Discount Rate’ के नाम को लेकर भी सवाल उठाया. व्यापारियों का तंज था कि जब उनसे शुल्क लिया जा रहा है तो इसे ‘डिस्काउंट’ यानी छूट क्यों कहा जा रहा है.
सरकार का क्या कहना है?
सरकार की ओर से कहा गया है कि नए MDR ढांचे के बावजूद ग्राहकों से UPI भुगतान के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा. सरकार के अनुसार UPI सिस्टम लगभग छह साल तक पूरी तरह शुल्क-मुक्त रहा और नए ढांचे का उद्देश्य भुगतान इकोसिस्टम को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाना है.
वहीं, व्यापारियों का विरोध मुख्य रूप से इस बात को लेकर है कि MDR का भुगतान कारोबारी पक्ष पर आने से उनके खर्च बढ़ सकते हैं. इसी वजह से उन्होंने 23 सितंबर को ‘नो UPI डे’ के जरिए सरकार तक अपनी मांग पहुंचाने की कोशिश की.
UPI अब सिर्फ पेमेंट का तरीका नहीं, रोजमर्रा की आदत
'नो UPI डे' के दौरान मध्य प्रदेश के अलग-अलग बाजारों में दिखी तस्वीर ने डिजिटल भुगतान की बढ़ती निर्भरता को भी सामने रखा. कई ग्राहकों के लिए नकद भुगतान की व्यवस्था अचानक परेशानी का कारण बनी, जबकि व्यापारियों ने भी माना कि UPI अब उनके कारोबार का नियमित हिस्सा बन चुका है.
एक तरफ व्यापारी प्रस्तावित MDR को लेकर अपनी लागत और कारोबार पर असर की चिंता जता रहे हैं, वहीं सरकार का कहना है कि ग्राहक से UPI भुगतान के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा.
अब 15 अक्टूबर से प्रस्तावित नई MDR व्यवस्था लागू होने से पहले व्यापारियों की मांग और सरकार के रुख के बीच आगे क्या समाधान निकलता है, इस पर नजर रहेगी.
धर्मेंद्र साहू / सर्वेश पुरोहित / धर्मेंद्र कुमार शर्मा