2 बार की BJP सांसद हिमाद्री सिंह ने पति से लिया तलाक, 2017 में हुई थी शादी; कई साल से रह रहे थे अलग

Shahdol MP Himadri Singh Divorce News: शहडोल से बीजेपी सांसद हिमाद्री सिंह और नरेंद्र मरावी का हुआ तलाक. कोर्ट ने जारी की डिक्री. जानें शादी से अलगाव तक का पूरा राजनीतिक और व्यक्तिगत सफर...

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शहडोल सांसद हिमाद्री सिंह और नरेंद्र मरावी का रिश्ता खत्म.(Photo:ITG) शहडोल सांसद हिमाद्री सिंह और नरेंद्र मरावी का रिश्ता खत्म.(Photo:ITG)

रावेंद्र शुक्ला

  • शहडोल,
  • 14 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 8:18 PM IST

मध्यप्रदेश के शहडोल संसदीय क्षेत्र से दो बार की बीजेपी सांसद हिमाद्री सिंह का पति नरेंद्र सिंह मरावी का तलाक हो गया है. दोनों पिछले कई वर्षों से अलग-अलग रह रहे थे. कोर्ट ने तलाक के आवेदन पर निर्णय देते हुए डिक्री पारित कर दी है. दोनों की शादी 23 नवंबर 2017 को अनूपपुर जिले के पुष्पराजगढ़ में हुई थी. दोनों की एक बेटी गिरिशा कुमारी सिंह है, जो हिमाद्री के साथ रहती हैं.

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दरअसल, हिमाद्री सिंह मध्यप्रदेश के बड़े आदिवासी राजनीतिक परिवार से आती हैं. उनके पिता दलवीर सिंह कांग्रेस के कद्दावर आदिवासी नेता रहे और राजीव गांधी सरकार में केंद्रीय मंत्री भी थे. उनकी मां राजेश नंदिनी सिंह कोतमा से विधायक और शहडोल से सांसद रह चुकी थीं. हिमाद्री के माता-पिता दोनों का निधन हो चुका है.

कांग्रेस से BJP में आईं, दो बार बनीं सांसद

हिमाद्री सिंह ने 2016 में कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा था. इसके बाद 2019 में वह कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गईं. भाजपा के टिकट पर उन्होंने 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव में शहडोल सीट से जीत दर्ज की.

दिल्ली से हुई हिमाद्री की पढ़ाई

हिमाद्री की शिक्षा दिल्ली में हुई है और उन्हें देश के प्रमुख युवा आदिवासी नेताओं में गिना जाता है. हाल ही में उन्होंने उज्बेकिस्तान के समरकंद में आयोजित दुनिया भर के युवा सांसदों के सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व भी किया था.

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नरेंद्र मरावी की भी रही राजनीतिक पृष्ठभूमि

हिमाद्री सिंह के पति नरेंद्र सिंह मरावी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और भाजपा की राजनीतिक पृष्ठभूमि से आते हैं. उन्होंने 2009 के लोकसभा चुनाव में हिमाद्री की मां राजेश नंदिनी सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ा था, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा था.

नरेंद्र मरावी बाद में राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष भी रहे. राजनीतिक तौर पर नरेंद्र की भूमिका हिमाद्री को कांग्रेस से भाजपा में लाने में भी अहम मानी जाती रही है.

2009 के बाद 2018 में भी चुनाव लड़े

लोकसभा चुनाव में हार के बाद नरेंद्र मरावी ने 2018 के विधानसभा चुनाव में हिमाद्री के गृह क्षेत्र पुष्पराजगढ़ से चुनाव लड़ा था. इस चुनाव में भी उन्हें हार मिली. समय के साथ जहां हिमाद्री सिंह का राजनीतिक कद बढ़ता गया, वहीं भाजपा की राजनीति में नरेंद्र मरावी का प्रभाव पहले की तुलना में कम होता गया.

मासूम बेटी हिमाद्री के साथ रहेगी.(Photo:ITG)

राजनीतिक मतभेद की भी होती रही चर्चा

हिमाद्री और नरेंद्र पिछले कई वर्षों से अलग रह रहे थे. जब दोनों के बीच अलगाव की खबरें सामने आईं, तब राजनीतिक हलकों में इसे लेकर अलग-अलग चर्चाएं होती रहीं. 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी नरेंद्र सिंह मरावी अपने लिए भाजपा से टिकट की कोशिश कर रहे थे.

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हालांकि, दोनों के निजी रिश्ते में अलगाव की वास्तविक वजह को लेकर सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है. अब कोर्ट की ओर से तलाक की डिक्री पारित किए जाने के बाद दोनों का वैवाहिक रिश्ता कानूनी रूप से समाप्त हो गया है.

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