MP News: रीवा के संजय गांधी अस्पताल के मेडिसिन विभाग में इलाज के लिए भर्ती बुजुर्ग को कथित तौर पर मृत घोषित किए जाने का मामला सामने आया है. परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर ने डेथ डिक्लेयर कर उन्हें शव सुपुर्दगी की पर्ची थमा दी. परिजन बुजुर्ग के शरीर को शव समझकर अस्पताल के ग्राउंड फ्लोर स्थित शव वाहन तक ले गए. इसी दौरान शव वाहन में रखने से पहले बुजुर्ग के शरीर में हरकत हुई और उन्होंने होश में आने के बाद दर्द से कराहना शुरू कर दिया. इसके बाद परिजन उन्हें दोबारा मेडिसिन विभाग लेकर पहुंचे, जहां उनका इलाज जारी है.
मामला 4 सितंबर की देर रात का बताया जा रहा है. जानकारी के मुताबिक सीधी निवासी गिरजा गुप्ता (66) को उल्टी और दस्त की शिकायत के बाद परिजन उपचार के लिए संजय गांधी अस्पताल लेकर पहुंचे थे. डॉक्टर अनुराग चौरसिया की देखरेख में उन्हें अस्पताल की तीसरी मंजिल स्थित आईसीयू वार्ड में भर्ती कराया गया था.
फ्लैट ईसीजी के बाद डेथ डिक्लेयर करने का आरोप
परिजनों के मुताबिक 5 सितंबर की दोपहर आईसीयू में मौजूद चिकित्सकीय टीम ने मरीज की जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया. आरोप है कि इस दौरान मरीज को सीपीआर देने की कोशिश नहीं की गई और न ही आंखों की पुतलियों की प्रतिक्रिया की पर्याप्त जांच की गई. इसके बाद परिजनों को शव सुपुर्दगी की पर्ची दे दी गई.
परिजन रोते-बिलखते बुजुर्ग के शरीर को स्ट्रेचर पर लेकर अस्पताल के ग्राउंड फ्लोर स्थित पार्किंग में पहुंचे. शव वाहन में शरीर को रखने की प्रक्रिया शुरू ही हुई थी कि अचानक बुजुर्ग के शरीर में हरकत हुई. वह दर्द से कराहने लगे. यह देखकर परिजनों के होश उड़ गए. आनन-फानन में उन्हें वापस मेडिसिन विभाग ले जाया गया.
अब वेंटिलेटर पर चल रहा इलाज
परिजनों के मुताबिक बुजुर्ग को दोबारा अस्पताल के मेडिसिन वार्ड में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है और उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है. फिलहाल चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार जारी है.
विभागाध्यक्ष ने माना- प्रथम दृष्टया हुई चूक
मामले को लेकर मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. प्रदीप बघेल ने प्रथम दृष्टया चिकित्सकीय स्तर पर चूक होने की बात स्वीकार की है. उन्होंने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी और जांच में लापरवाही सामने आने पर संबंधित चिकित्सक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
वहीं, मरीज की आंखों की पुतलियों की प्रतिक्रिया सहित अन्य जरूरी जांच किए जाने को लेकर पूछे गए सवालों पर विभागाध्यक्ष की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया. पूरे मामले ने संजय गांधी अस्पताल की चिकित्सकीय व्यवस्था और मरीजों की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
फिलहाल यह जांच का विषय है कि मरीज को मृत घोषित करने में आखिर किस स्तर पर चूक हुई और डेथ डिक्लेरेशन से पहले निर्धारित चिकित्सकीय प्रोटोकॉल का पालन किया गया था या नहीं.
विजय कुमार विश्वकर्मा