मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले से इंसानियत और परोपकार की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जो हर किसी की आंखें नम करने के साथ-साथ समाज को एक नया संदेश दे रही है. जिले के पिपरिया अंतर्गत बनखेड़ी के खापाखुर्द गांव की रहने वाली शिवानी शर्मा की सड़क हादसे में भले ही जान चली गई, लेकिन उनके परिवार के एक बड़े फैसले ने तीन अन्य गंभीर मरीजों की जिंदगियों को बचा लिया. ब्रेन डेड घोषित होने के बाद शिवानी के अंगों का दान किया गया, जिसके बाद उन्हें राजकीय सम्मान (गार्ड ऑफ ऑनर) के साथ अंतिम विदाई दी गई.
दरअसल, 10 अक्टूबर को शिवानी अपने पति अखिलेश शर्मा के साथ बाइक पर सवार होकर प्रसिद्ध धार्मिक स्थल सलकनपुर देवी धाम के दर्शन के लिए निकल थीं. सीहोर जिले के बुधनी के पास सलकनपुर रोड पर अचानक बाइक से गिरने के कारण वह गंभीर रूप से घायल हो गईं. फौरन उन्हें बेहतर इलाज के लिए AIIMS Bhopal में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया.
दुख की घड़ी में परिवार ने लिया महादान का फैसला
अपनों को खोने का असहनीय दर्द झेल रहे परिवार ने इस विकट परिस्थिति में भी अद्भुत संवेदनशीलता का परिचय दिया. परिवार ने शिवानी के अंगदान का फैसला किया, जिससे भोपाल एम्स में उनकी दोनों किडनी और लिवर को सुरक्षित किया गया. इन अंगों के प्रत्यारोपण से जरूरतमंद मरीजों को जीवनदान मिला है.
मुख्यमंत्री ने दी श्रद्धांजलि
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस साहसिक और मानवीय फैसले की सराहना की है. सीएम मोहन यादव ने सोशल मीडिया और अपने संदेश में कहा कि श्रीमती बिलाश टांटी शर्मा (शिवानी) के एम्स भोपाल में अंगदान से तीन लोगों को नया जीवन मिला है. असहनीय दुख की घड़ी में उनके परिजनों का यह निर्णय मानवता और परोपकार की अनूठी मिसाल है."
शासन के निर्देशानुसार, दिवंगत शिवानी के पैतृक गांव में उनका पार्थिव शरीर पहुंचने पर मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया.
ग्रामीण इलाकों में बढ़ रही है जागरूकता
प्रशासन और सरकार का मानना है कि इस तरह की घटनाएं समाज और खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में अंगदान के प्रति लोगों की सोच को बदल रही हैं. बिलासा का यह महादान न केवल तीन परिवारों के लिए वरदान साबित हुआ है, बल्कि यह पूरे प्रदेश में अंगदान के प्रति जागरूकता की एक नई अलख जगा रहा है.
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