एक एकड़ में सालाना 10 लाख रुपये तक कमा सकते हैं किसान, विशेषज्ञों ने बताया मल्टी क्रॉपिंग का तरीका

मध्य प्रदेश स्थापना दिवस समारोह में कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि मल्टी क्रॉपिंग और उद्यानिकी फसलों के मूल्य संवर्धन से किसान एक एकड़ जमीन से सालाना 10 लाख रुपये तक की आय हासिल कर सकते हैं.

Advertisement
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को दी अहम जानकारी.(Photo:AI Generated) कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को दी अहम जानकारी.(Photo:AI Generated)

aajtak.in

  • भोपाल,
  • 02 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 10:32 PM IST

खेती में कम जमीन से भी अच्छी कमाई की जा सकती है. इसके लिए किसानों को पारंपरिक तरीके के साथ नई तकनीकों और फसल विविधता पर ध्यान देना होगा. मध्य प्रदेश स्थापना दिवस समारोह के दूसरे दिन किसानों और कृषि विशेषज्ञों के बीच हुए संवाद में बताया गया कि मल्टी क्रॉपिंग यानी बहुफसली खेती के जरिए एक एकड़ जमीन से सालाना 10 लाख रुपये तक की आय हासिल की जा सकती है.

Advertisement

विशेषज्ञों ने इसके लिए मल्टी क्रॉपिंग के साथ उद्यानिकी फसलों का मूल्य संवर्धन अपनाने पर जोर दिया. उन्होंने बताया कि पूर्वोत्तर राज्यों में भी कई किसान इस तरह की खेती कर रहे हैं.

प्राकृतिक और जैविक खेती में क्या अंतर?

रीजनल सेंटर फॉर ऑर्गेनिक फार्मिंग, नागपुर के रीजनल डायरेक्टर एएस राजपूत ने प्राकृतिक और जैविक खेती के बीच अंतर समझाया. उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में देश में आगे बढ़ रहा है.

उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती में बाजार से खरीदकर खेत में ऐसे संसाधनों का इस्तेमाल नहीं किया जाता, जो भूमि, पानी, पर्यावरण और जीवों को नुकसान पहुंचाएं. खेत में उपयोग होने वाले संसाधन पर्यावरण के अनुकूल होने चाहिए.

राजपूत ने कहा कि प्राकृतिक खेती के उत्पादों का प्रमाणीकरण जरूरी है. इससे बाजार में इन उत्पादों की अलग पहचान बनती है. केंद्र सरकार इसके लिए दो तरह की व्यवस्था अपनाती है. पहली तृतीय पक्ष प्रमाणन और दूसरी भागीदारी गारंटी प्रणाली (PGS) है. तृतीय पक्ष प्रमाणन में 36 संस्थाएं कार्यरत हैं. यह व्यवस्था APEDA और केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय से जुड़ी है, जबकि भागीदारी गारंटी प्रणाली किसान-केंद्रित और विश्वास आधारित है.

Advertisement

प्राकृतिक खेती के लिए बताए ये मानक

राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन की जानकारी देते हुए राजपूत ने बताया कि किसान खेत की सेहत और बाजार में मांग को देखते हुए प्राकृतिक खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं.

उन्होंने प्राकृतिक खेती के कुछ प्रमुख मानक भी बताए. इनमें कृत्रिम रसायनों, उर्वरकों और कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं करना, खेत में तैयार जीवामृत और नीमास्त्र का उपयोग, गोबर और गोमूत्र से बने मिश्रण का इस्तेमाल, बहुफसली खेती और मिट्टी के स्वास्थ्य का प्रबंधन शामिल है.

गुणवत्तापूर्ण बीज की पहचान समझाई

कृषि महाविद्यालय पोवारखेड़ा, नर्मदापुरम के प्रोफेसर डॉ. विनोद कुमार ने किसानों को सीड टेक्नोलॉजी की जानकारी दी. उन्होंने बीज की परिभाषा और उसके विभिन्न प्रकारों के बारे में बताया.

डॉ. कुमार ने गुणवत्तापूर्ण बीज की पहचान करने के तरीके समझाए. साथ ही बीज परीक्षण का महत्व बताते हुए किसानों को वैधानिक तरीकों से बीज की जांच कराने की जानकारी दी.

ई-विकास से खाद वितरण में मदद

उप संचालक कृषि आशुतोष पांडे ने खाद वितरण व्यवस्था और ई-विकास की जानकारी साझा की. उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था से किसानों को खाद के लिए लंबी लाइनों में नहीं लगना पड़ा और खेत की जरूरत के मुताबिक समय पर खाद उपलब्ध हुई.

उनके मुताबिक, इससे खाद की कालाबाजारी पर नियंत्रण करने में भी मदद मिली.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »