मध्य प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने और देशी नस्ल की गायों के पालन को प्रोत्साहित करने के लिए आयोजित गोपाल-कृष्ण ग्राम पुरस्कार प्रतियोगिता का शनिवार यानी 31 अक्टूबर को आखिरी दिन है. पशुपालन और डेयरी विभाग की ओर से यह प्रतियोगिता पहले साल चयनित प्रदेश के 208 वृंदावन ग्रामों में कराई जा रही है. इसकी शुरुआत 27 अक्टूबर को हुई थी. प्रतियोगिता में सबसे अधिक दूध देने वाली गायों के पशुपालकों को उनके प्रदर्शन के आधार पर पुरस्कृत किया जाएगा. इसमें सभी वर्गों के पशुपालक हिस्सा ले सकते हैं.
पहले स्थान पर 1 लाख, दूसरे पर 50 हजार रुपये का पुरस्कार
गोपाल-कृष्ण ग्राम पुरस्कार प्रतियोगिता के तहत प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले पशुपालक को 1 लाख रुपये, दूसरे स्थान पर रहने वाले को 50 हजार रुपये और तीसरा स्थान प्राप्त करने वाले पशुपालक को 25 हजार रुपये दिए जाएंगे.
पशुपालन और डेयरी विभाग ने प्रतियोगिता के लिए कुल 624 पुरस्कार निर्धारित किए हैं. इनके माध्यम से उत्कृष्ट दुग्ध उत्पादन करने वाले पशुपालकों को लगभग 3 करोड़ 64 लाख रुपये की पुरस्कार राशि वितरित की जाएगी.
देशी नस्ल की गायों के संरक्षण पर जोर
योजना के तहत गिर, साहीवाल, थारपारकर, मालवी, निवाड़ी सहित अन्य उन्नत अधिसूचित स्वदेशी नस्लों के संरक्षण और संवर्धन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. इसका उद्देश्य दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के साथ पशुपालकों की आय में वृद्धि करना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना है.
विभाग के अनुसार, मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना के अंतर्गत गोपाल-कृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना के क्रियान्वयन को स्वीकृति मिल चुकी है. पुरस्कार के रूप में मिलने वाली राशि का उपयोग शत-प्रतिशत देशी गोवंश की खरीद, संरक्षण और संवर्धन के लिए ही किया जा सकेगा.
313 विकासखंडों में होगी प्रतियोगिता
योजना के दूसरे साल यानी 2027-28 से 2030-31 तक प्रदेश के सभी 313 विकासखंडों में विकासखंड स्तर पर प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी. इसके जरिए अधिक से अधिक पशुपालकों को बेहतर नस्ल की गायों के पालन और दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा.
योजना के तहत वृंदावन ग्रामों को दुग्ध उत्पादन और देशी गोवंश के संरक्षण एवं संवर्धन के आदर्श ग्राम के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा.
विकासखंड और जिला स्तर पर समितियां गठित
प्रतियोगिता के संचालन के लिए विकासखंड और जिला स्तर पर समितियां बनाई गई हैं. विकासखंड स्तरीय समिति में अनुभाग अधिकारी (राजस्व) और पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अधिकारी-कर्मचारी शामिल हैं. विकासखंड पशु चिकित्सा अधिकारी समिति के सदस्य सचिव होंगे.
यह समिति प्रतिभागियों से आवेदन लेकर उनका संकलन और परीक्षण करेगी. प्रतियोगिता के परिणाम तैयार होने के बाद उन्हें जिले के उपसंचालक, पशुपालन एवं डेयरी विभाग को भेजा जाएगा.
जिला स्तरीय समिति में कलेक्टर, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, पशुपालन एवं डेयरी विभाग के उपसंचालक, किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के उपसंचालक और सहकारी संस्थाओं के उप पंजीयक शामिल होंगे. समिति निर्धारित मापदंडों के अनुसार प्रस्तावों का परीक्षण और सत्यापन कर पुरस्कार विजेताओं के नाम स्वीकृत करेगी.
प्रतियोगिता के प्रमुख उद्देश्य
गांवों में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देना.
अधिक दूध देने वाले पशुपालकों को प्रोत्साहित करना.
उत्कृष्ट दुग्ध उत्पादक गायों की पहचान करना.
पशुपालकों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा विकसित करना.
देशी नस्ल की गायों के पालन और संरक्षण को बढ़ावा देना.
पशुपालकों की आय बढ़ाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना.
योजना के अनुसार, वृंदावन ग्राम या विकासखंड स्तरीय प्रतियोगिता में एक परिवार से केवल एक प्रतिभागी या एक गाय ही शामिल हो सकेगी.
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