MP: थाने में 'गिरफ्तारी' देने पहुंचे मऊगंज विधायक प्रदीप पटेल को BJP ने किया तलब, अब बदल गए सुर

पिछले दिनों हुए घटनाक्रम की जानकारी जब संगठन तक पहुंची, तो विधायक को भोपाल तलब किया गया. शनिवार दोपहर में बीजेपी विधायक पटेल प्रदेश बीजेपी कार्यालय पहुंचे, जहां मुख्यमंत्री मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और संगठन मंत्री हितानंद शर्मा ने प्रदीप पटेल से अकेले में चर्चा की. 

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भोपाल BJP कार्यालय में मऊगंज विधायक प्रदीप पटेल. भोपाल BJP कार्यालय में मऊगंज विधायक प्रदीप पटेल.

अमृतांशी जोशी

  • भोपाल ,
  • 26 अप्रैल 2025,
  • अपडेटेड 4:50 PM IST

मध्य प्रदेश की मऊगंज सीट से बीजेपी विधायक प्रदीप पटेल अक्सर चर्चाओं में बने रहते हैं. पिछले दिनों MLA पटेल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था, जिसमें वे नईगढ़ी थाने के अंदर बैठे नजर आ रहे थे. काफी देर तक विधायक वहां बैठे रहे, लेकिन थाना प्रभारी नहीं आए.

दरअसल, मऊगंज विधायक खुद अपनी 'गिरफ्तारी' देने के लिए थाने पहुंच गए थे. थाने में बैठने की वजह पूछे जाने पर विधायक प्रदीप पटेल ने कहा था- ''कुछ दिन पहले ही थाना प्रभारी ने एक स्थानीय मीडियाकर्मी को कलेक्ट्रेट से पकड़ लिया था और थाने ले आए थे. विधायक ने कहा कि इस घटना की जानकारी मिलने पर उन्होंने थाना प्रभारी से कारण जानने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने बात नहीं की. साथ ही मीडियाकर्मी से कहा कि अगला मेरा नंबर है. पता नहीं ऐसा कौन सा मुकदमा है मेरे ऊपर. घसीटकर न ले जाना पड़े, इसलिए मैं खुद गिरफ्तारी देने थाने आ गया हूं. मैं यह जानने का प्रयास कर रहा हूं कि कोई अपराध है या नहीं, या उन्होंने ऐसा क्यों कहा. मैं जानने के लिए आया हूं. कोई भरोसा नहीं है, रास्ते में कोई मुझे घसीट ले, इसलिए मैं थाने में पूछने आया हूं.'' 

इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी जब बीजेपी संगठन तक पहुंची, तो संगठन ने शनिवार को बीजेपी विधायक को भोपाल तलब किया. दोपहर में बीजेपी विधायक पटेल प्रदेश बीजेपी कार्यालय पहुंचे, जहां मुख्यमंत्री मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और संगठन मंत्री हितानंद शर्मा ने प्रदीप पटेल से अकेले में चर्चा की. 

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गौरतलब है कि इस घटनाक्रम से बीजेपी संगठन नाराज था, क्योंकि इससे पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचता है. तमाम दिग्गजों से प्रदीप पटेल की लंबी चर्चा हुई.

अब बदल गए सुर 

हालांकि, संगठन से चर्चा के बाद प्रदीप पटेल ने कहा, "मैं कार्यालय आया था. क्षेत्र के विकास को लेकर मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष से चर्चा हुई. मैंने कोई धरना नहीं दिया था. कोई नाराजगी नहीं थी. पुलिस ने ऐसा कुछ कमेंट किया था, इसलिए मैंने पता लगाने के लिए कहा था. उन्होंने बता दिया है कि मुझ पर कोई अपराध दर्ज नहीं है. बिंदुवार क्षेत्र के बारे में सिर्फ चर्चा की थी."  



हालांकि, बीजेपी संगठन ने कई अन्य नेताओं को भी भोपाल बीजेपी कार्यालय तलब किया. विधायक प्रीतम लोधी, बीना की नगरपालिका अध्यक्ष, देवास महापौर और सागर महापौर को भी संगठन ने बातचीत के लिए बुलाया था. इनमें से प्रीतम लोधी और सागर महापौर नहीं पहुंचे. प्रीतम लोधी शाम तक संगठन के सामने पेश होंगे. वहीं, सागर महापौर संगीता तिवारी को बीजेपी नोटिस जारी कर रही है.

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दरअसल, नगरपालिका अध्यक्ष लता सकवार ने विवाद को लेकर संगठन को जानकारी दिए बिना महापौर परिषद को भंग कर दिया था, जिसके बाद भाजपा जिलाध्यक्ष और प्रदेश नेतृत्व ने इस मामले को गंभीरता से लिया था. प्रीतम लोधी के बयानों के कारण पार्टी ने उन्हें तलब किया, वहीं सागर और देवास महापौर ने भी संगठन की जानकारी के बिना मनमर्जी से महापौर परिषद में नियुक्तियां कर दी थीं.

विधायक और जनप्रतिनिधियों से चर्चा के बाद प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, मुख्यमंत्री मोहन यादव और संगठन मंत्री हितानंद शर्मा के बीच भी चर्चा हुई. बैठक में विधायकों के बिगड़ते बोल और स्थानीय मामलों में अनियमितताओं पर चर्चा की गई. विधायकों को अनुशासन का पाठ पढ़ाने का निर्णय लिया गया, ताकि वे संगठन के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझें.

अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं: वीडी शर्मा

बैठक के बाद प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने कहा, "संगठन में किसी भी तरह की अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी. समय-समय पर ऐसे मामले आने पर हम अपने कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों को बुलाते हैं. सागर महापौर को हम नोटिस जारी कर रहे हैं. हमारी पार्टी कार्यपद्धति एक संगठित ढांचे पर आधारित है. इसलिए हम अपने कार्य प्रणाली के तहत कभी कोई कार्यकर्ता, चाहे वह कोई भी हो, समय-समय पर कोई बात आती है, तो हम खुद उनसे बात करते हैं. हमारी बातचीत हुई है. चाहे कोई भी हो, बीजेपी में अनुशासनहीनता शब्द है ही नहीं. यहां सब तत्काल होता है. सारी बातचीत हो गई है."

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'कानून के बल पर सम्मान नहीं चाहता'

विधायक और सांसद को सैल्यूट करने के आदेश पर प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने कहा, "मैं ऐसा कार्यकर्ता हूं जो कानून के बल पर सम्मान नहीं चाहता. यह भी नहीं कि कानून बने, तब सांसद-विधायक को सम्मान मिले. यह एक सामान्य सर्कुलर है. पहले से सांसद, विधायक और अधिकारियों के लिए प्रोटोकॉल चल रहा है. सांसद-विधायक अपने कृतित्व और व्यक्तित्व से सम्मान पाते हैं. मेरा तो मानना है कि हर व्यक्ति को उसके व्यक्तित्व के आधार पर सम्मान मिलना चाहिए. इस दिशा में समाज के हर व्यक्ति को सम्मान मिलना चाहिए. यह एक रूटीन सर्कुलर है, यह किसी की डिमांड पर नहीं आया है."

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