धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भोपाल में छात्र सड़कों पर उतर आए. कहीं मिठाई बांटी गई, कहीं नारे लगे तो कहीं युवाओं ने डांस कर खुशी जताई. प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने इसे लंबे आंदोलन की पहली बड़ी जीत बताया. उनका कहना है कि एक मांग पूरी हुई है, लेकिन परीक्षा व्यवस्था में सुधार और बाकी मुद्दों पर लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है.
इस्तीफे की खबर सामने आते ही भोपाल में कई छात्र एक जगह जुट गए. उन्होंने एक-दूसरे का मुंह मीठा कराया, नारे लगाए और खुशी जाहिर की. छात्रों का कहना था कि पिछले करीब ढाई महीने से देशभर में पेपर लीक के मुद्दे पर आवाज उठाई जा रही थी. उनके मुताबिक, इस फैसले ने आंदोलन को नई ताकत दी है.
'सरकार झुकती है, झुकाने वाला चाहिए'
प्रदर्शन में शामिल एक छात्र ने कहा कि उनकी तीन प्रमुख मांगों में से एक पूरी हो चुकी है. उनका कहना है कि छात्र पिछले काफी समय से शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे थे. अब वे 20 जुलाई को हुए लाठीचार्ज की जवाबदेही, दोषियों पर कार्रवाई और छात्रों के सवालों पर सरकार से जवाब चाहते हैं. उनका कहना है कि बाकी मांगें पूरी होने तक संघर्ष जारी रहेगा.
प्रदर्शन के दौरान कुछ छात्रों ने विपक्ष की भूमिका का भी जिक्र किया. उनका कहना था कि छात्रों के मुद्दे को लगातार उठाए जाने से सरकार पर दबाव बढ़ा. कुछ प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि युवाओं की एकजुटता और विपक्ष के समर्थन की वजह से सरकार को फैसला लेना पड़ा. यह प्रदर्शनकारियों का अपना दावा है.
'Gen Z अब सवाल पूछना सीख गया'
प्रदर्शन में शामिल युवाओं का कहना था कि इस आंदोलन ने नई पीढ़ी को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाना सिखाया है. उनका कहना था कि अब छात्र सिर्फ परीक्षा देने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि व्यवस्था से जवाब भी मांगेंगे. कई छात्रों के हाथों में 'Save My Future' लिखे पोस्टर भी दिखाई दिए.
प्रदर्शन में मौजूद छात्रों ने कहा कि यह जश्न सिर्फ इस्तीफे का नहीं, बल्कि लंबे संघर्ष का है. उनका कहना था कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, दोषियों पर कार्रवाई और छात्रों के हितों से जुड़े बाकी मुद्दों पर भी सरकार को कदम उठाने होंगे. छात्रों ने साफ किया कि उनकी नजर अब आगे होने वाले फैसलों पर रहेगी.
रवीश पाल सिंह