दिवाली से पहले धनतेरस के मौके पर बाजारों में रौनक और घरों में साफ-सफाई की उम्मीद है, लेकिन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में तस्वीर इसके उलट नजर आ रही है. शहर की सड़कों, कॉलोनियों और बाजारों से लेकर मंत्रालय के बाहर तक कचरे के ढेर लगे हैं. सफाई कर्मचारियों की तीन दिन से जारी अनिश्चितकालीन हड़ताल ने राजधानी की सफाई व्यवस्था को पूरी तरह चरमरा दिया है. डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन बंद होने से भोपाल कचरे के ढेर में तब्दील होता जा रहा है.
धनतेरस जैसे बड़े त्योहार के दिन भोपाल के न्यू मार्केट में जहां ग्राहकों की भीड़ और कारोबार की रौनक होनी चाहिए थी, वहां सड़कों पर फैला कचरा और बदबू व्यापारियों और लोगों की परेशानी बढ़ा रही है. हालात सिर्फ बाजारों तक सीमित नहीं हैं. मध्य प्रदेश सरकार के मंत्रालय वल्लभ भवन के सामने भी कचरे का ढेर लगा है.
मुख्यमंत्री सचिवालय और तमाम सरकारी विभागों के कार्यालयों वाले इस परिसर के बाहर गंदगी का अंबार राजधानी की सफाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है.
2550 टन कचरा जमा होने का अनुमान
85 वार्डों में सफाई व्यवस्था ठप, 2550 मीट्रिक टन कचरा जमा होने का अनुमानभोपाल के 85 वार्डों, 21 जोन और 7 हजार से ज्यादा सफाई कर्मचारियों पर शहर की सफाई व्यवस्था निर्भर है. कचरा उठाने वाली 400 से अधिक गाड़ियां भी हड़ताल की चपेट में हैं. दुकानदारों को खुद करनी पड़ी सफाई:-
राजधानी में प्रतिदिन करीब 850 मीट्रिक टन कचरा निकलता है. ऐसे में तीन दिनों की हड़ताल के दौरान करीब 2550 मीट्रिक टन कचरा जमा होने का अनुमान है. डोर-टू-डोर कलेक्शन बंद होने से सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर कचरे का ढेर लगातार बढ़ रहा है.
मंत्रियों और अफसरों की कॉलोनी में भी गंदगी
मंत्रियों और अफसरों की पॉश कॉलोनी 4 इमली भी गंदगी से बेहालभोपाल की वीआईपी कॉलोनी 4 इमली में भी सफाई व्यवस्था का बुरा हाल है. इस कॉलोनी में उपमुख्यमंत्री, कई मंत्री, पूर्व मंत्री और IAS-IPS अधिकारियों के बंगले हैं. इसके बावजूद सड़कों पर कचरे के ढेर और गंदगी फैली हुई है. कूड़े के बीच भोजन तलाशती गायों की तस्वीरें त्योहार के दौरान राजधानी की बदहाल सफाई व्यवस्था को उजागर कर रही हैं.
10,500 रुपये वेतन, 25 हजार करने की मांग
10 हजार 500 रुपये वेतन पाने वाले सफाईकर्मी 25 हजार की मांग पर अड़ेसफाई कर्मचारियों की हड़ताल के पीछे वेतन और सेवा संबंधी मांगें हैं. कर्मचारी फिलहाल करीब 10,500 रुपये मासिक वेतन मिलने की बात कहते हुए इसे बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने की मांग कर रहे हैं.
इसके अलावा ठेका व्यवस्था खत्म करने, स्थायी नियुक्ति, सरकारी कर्मचारी का दर्जा और कर्मचारी की मृत्यु होने पर पति या पत्नी में से किसी एक को अनुकंपा नियुक्ति देने की मांग भी शामिल है. मध्यप्रदेश सफाई कर्मचारी ट्रेड यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष अशोक वर्मा के मुताबिक, कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं.
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दिलाया भरोसा
CM मोहन ने दिलाया भरोसाइस बीच मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सफाई कर्मचारियों और जनता की परेशानी से जुड़े सवाल पर सबका ध्यान रखने का भरोसा दिलाया है.
धनतेरस और दिवाली के बीच राजधानी की सफाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित है. एक तरफ सफाई कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ आम जनता, व्यापारी और शहर के लोग गंदगी से परेशान हैं. अब बड़ा सवाल यह है कि सरकार और नगर निगम हड़ताल खत्म कराने के लिए क्या कदम उठाते हैं और क्या दिवाली से पहले भोपाल की सड़कों को कचरे से राहत मिल पाएगी?
रवीश पाल सिंह