भोपाल मेट्रो: जमीन से 24 मीटर नीचे उतरी 'दुर्गावती', जानें कैसे बनेगी सुरंग

भोपाल मेट्रो परियोजना के लिए टनल बोरिंग मशीन (TBM) 'दुर्गावती' ने शहर के नीचे पहली बार जमीन के सीने को चीरकर सुरंग बनाने का काम शुरू किया. मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPMRCL) की इस उपलब्धि के साथ ही भोपाल अब भूमिगत मेट्रो वाले चुनिंदा शहरों की सूची में शामिल होने की ओर एक कदम और बढ़ गया है.

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भोपाल मेट्रो के लिए सुरंग खुदाई का काम शुरू.(Photo:ITG) भोपाल मेट्रो के लिए सुरंग खुदाई का काम शुरू.(Photo:ITG)

aajtak.in

  • भोपाल,
  • 02 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 6:18 PM IST

झीलों की नगरी भोपाल में मेट्रो प्रोजेक्ट के तहत भूमिगत सुरंग यानी अंडरग्राउंड टनल बनाने का काम शुरू हो गया है. मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPMRCL) ने  टनल बोरिंग मशीन यानी TBM 'दुर्गावती को पाताल की गहराई में उतारकर खुदाई का आगाज किया.  

प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, टीबीएम 'दुर्गावती' को एक विशाल लॉन्चिंग शाफ्ट के माध्यम से जमीन से करीब 24 मीटर की गहराई पर उतारा गया है. यह गहराई करीब 8 मंजिला इमारत के बराबर है. यहीं से यह विशालकाय मशीन अब शहर के घने इलाकों के नीचे से रास्ता बनाना शुरू करेगी. 

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क्या है TBM और यह कैसे करती है काम?
- TBM यानी टनल बोरिंग मशीन एक विशाल बेलनाकार इंजीनियरिंग चमत्कार है. इसे 'अंडरग्राउंड फैक्ट्री' भी कहा जा सकता है. 

- यह मशीन जमीन के अंदर आगे बढ़ते हुए मिट्टी और कठोर चट्टानों को काटती है.

- जैसे-जैसे मशीन आगे बढ़ती है, इसके पीछे-पीछे कंक्रीट के रिंग सेगमेंट लगते जाते हैं, जो तुरंत सुरंग की स्थायी और मजबूत दीवार तैयार कर देते हैं.

- खुदाई के दौरान निकलने वाली मिट्टी और चट्टानों का मलबा कन्वेयर बेल्ट या विशेष ट्रॉलियों के जरिए शाफ्ट से बाहर भेज दिया जाता है.

- इस तकनीक की सबसे बड़ी खूबी यह है कि जमीन के ऊपर बनी इमारतों, सड़कों और ट्रैफिक पर इसका कोई असर नहीं पड़ता.

- भोपाल की चट्टानों की स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि 'दुर्गावती' रोजाना लगभग 7 मीटर तक सुरंग खोदने में सक्षम होगी.

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क्यों रखा गया 'दुर्गावती' नाम?
मेट्रो कॉर्पोरेशन ने अपनी मशीनों को ऐतिहासिक पहचान दी है. टीबीएम का नाम रानी दुर्गावती जैसी महान वीरांगना के नाम पर रखने के पीछे एक गहरी सोच है. इसका उद्देश्य परियोजना को स्थानीय विरासत और जन-भावनाओं से जोड़ना है, ताकि भोपाल के नागरिकों को इस आधुनिक ढांचे में अपनी मिट्टी और इतिहास का गौरव महसूस हो सके.

24 मीटर गहराई में 'दुर्गावती' का दम

भोपाल का नया सफर
भोपाल मेट्रो का यह भूमिगत हिस्सा उन संकरे और पुराने इलाकों को जोड़ेगा जहां एलिवेटेड ट्रैक बनाना भौगोलिक रूप से संभव नहीं था. यह परियोजना न सिर्फ शहर की सड़कों से ट्रैफिक का बोझ कम करेगी, बल्कि समय की बचत करेगी, ईको-फ्रेंडली सफर प्रदान करेगी और शहर के आर्थिक विकास को नई गति देगी.

इनका कहना

मैनेजिंग डायरेक्टर एस कृष्ण चैतन्य ने टीम को बधाई देते हुए साफ निर्देश दिए कि निर्माण के दौरान क्वालिटी और सुरक्षा  मानकों के साथ कोई समझौता न हो. उन्होंने कहा कि घने शहरी क्षेत्रों में यह मशीन सबसे सुरक्षित विकल्प है, क्योंकि यह बिना किसी कंपन या ध्वनि प्रदूषण के सटीक खुदाई करती है.

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