मध्य प्रदेश की बीजेपी विधायक उषा ठाकुर ने दावा किया है कि पहले हर साल नवरात्रि के 'गरबा' समारोहों के दौरान 4.5 लाख लड़कियां गैर-हिंदू पुरुषों के साथ भाग जाती थीं, जिससे आबादी के स्वरूप यानी डेमोग्राफिक्स में बदलाव आता था.
इंदौर जिले के डॉ. अंबेडकर नगर-महू विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाली ठाकुर ने गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की वकालत करते हुए यह दावा किया.
विपक्षी कांग्रेस ने उनकी टिप्पणी को हिंदू महिलाओं की पहचान का अपमान बताया है और उनसे सार्वजनिक रूप से माफी की मांग की है.
ठाकुर ने पत्रकारों से कहा कि गरबा समारोहों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश से देश की डेमोग्राफी पर असर पड़ रहा है, क्योंकि हर साल गरबा के दौरान 4.5 लाख लड़कियां गैर-हिंदुओं के साथ भाग जाती थीं.
बता दें कि नवरात्रि में पारंपरिक आध्यात्मिक गरबा नृत्य के साथ डांडिया होता है और जोड़े घेरे में नृत्य करते हैं, 22 सितंबर से 1 अक्टूबर तक मनाया जाएगा.
विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने कहा है कि 'गरबा' कार्यक्रमों में केवल हिंदुओं को ही प्रवेश दिया जाना चाहिए और आयोजकों को सलाह दी है कि वे 'लव जिहाद' की घटनाओं से बचने के लिए प्रवेश करने वालों के आधार कार्ड की जांच करें.
विधायक ने बिना किसी वैज्ञानिक या तार्किक आधार के दावा किया, "ये बालिग लड़कियां हर साल एक बच्चे को जन्म देती थीं, जिससे हर साल नौ लाख बच्चों की दर से आबादी के स्वरूप में बदलाव आता था."
अक्सर अपने विवादास्पद बयानों के कारण चर्चा में रहने वालीं ठाकुर, सत्ताधारी बीजेपी की राज्य इकाई की प्रवक्ता भी हैं.
इस हालात को देखते हुए उन्होंने कहा कि हिंदू समुदाय के संगठनों ने उन लोगों को किसी भी गरबा पंडाल में प्रवेश न देने का संकल्प लिया है जो मूर्ति पूजा नहीं करते हैं.
विधायक ने दावा किया, "अपनी नापाक साजिश के तहत, ये लोग कभी-कभी माथे पर तिलक लगाते हैं, कभी-कभी कलाई पर हिंदुओं द्वारा पहना जाने वाला पवित्र धागा पहनते हैं और हमारे गरबा त्योहारों में भाग लेते हैं, जिससे लड़कियां गुमराह होती हैं और उनकी जिंदगी नरक बन जाती है."
ठाकुर ने कहा कि कोई भी देशभक्त नागरिक इन कथित तौर-तरीकों को जारी रहने नहीं दे सकता, और इसलिए, गैर-हिंदू लोगों को जीवन भर सभी गरबा पंडालों में प्रवेश करने से रोका जाएगा. उन्होंने "गरबा समारोहों के कमर्शियलाइजेशन" को रोकने के लिए हिंदू समुदाय के संगठनों की कोशिशों की भी तारीफ़ की.
BJP विधायक ने कहा, "मैं विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के अपने सभी भाइयों का शुक्रिया अदा करती हूंं, क्योंकि गरबा का जो कमर्शियल रूप सामने आ रहा है, उससे ऐसा लगता है कि देवी के प्रति श्रद्धा लगभग खत्म हो गई है."
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि गरबा शक्ति की पूजा का त्योहार है.
ठाकुर ने कहा, "...लेकिन कमर्शियल गरबा समारोहों ने इसे इतना बदल दिया है कि यह त्योहार अब कपड़े, गहने और टैटू दिखाने का जरिया बन गया है, जिसकी हिंदू आध्यात्मिक रीति-रिवाजों में इजाजत नहीं है."
कांग्रेस के मीडिया कोऑर्डिनेटर नीलाभ शुक्ला ने इस बयान की आलोचना करते हुए कहा, "ठाकुर हिंदू महिलाओं की पहचान का अपमान कर रही हैं और बिना किसी सबूत के उनके चरित्र पर सवाल उठा रही हैं. उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए."
इससे पहले, राज्य के एक और बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने भी गरबा पंडालों में मुसलमानों के प्रवेश पर टिप्पणी करके विवाद खड़ा कर दिया था.
भोपाल के हुजूर निर्वाचन क्षेत्र से विधायक शर्मा ने सोमवार को एक कार्यक्रम में कहा था कि मुस्लिम युवाओं को अकेले गरबा में नहीं आना चाहिए और उन्हें अपनी बहनों और बेटियों को साथ लाना चाहिए. कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने शर्मा की टिप्पणियों की आलोचना की है.
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