साहित्य आजतक 2018: पीयूष मिश्रा ने कहा, राहुल गांधी है मेरा मैनेजर

साहित्य आजतक 2018 के मंच पर मशहूर लेखक और एक्टर पीयूष मिश्रा ने साहित्य, अपनी किताबें और निजी जिंदगी को लेकर बातें की.

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पीयूष मिश्रा (फोटो- आजतक) पीयूष मिश्रा (फोटो- आजतक)

मोहित पारीक

  • नई दिल्ली,
  • 16 नवंबर 2018,
  • अपडेटेड 1:58 PM IST

साहित्य आजतक 2018 के मंच में मशहूर गायक, लेखक, पटकथा लेखक पीयूष मिश्रा ने फिल्म गुलाल की कुछ पंक्तियों से सेशन  'कुछ इश्क किया कुछ काम किया' की शुरुआत की. इस दौरान उन्होंने अपनी किताब 'कुछ इश्क किया कुछ काम किया' और 'तुम मेरी जान हो रजिया बी' के बारे में बात की. साथ ही उन्होंने अपनी किताबों की कई कविताओं का पाठ भी किया.

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मुझे नहीं पता क्यों नहीं की थी 'मैंने प्यार किया'

वहीं उन्होंने फिल्म 'मैंने प्यार किया' के ऑफर को लेकर कहा, 'मुझे नहीं पता था कि मैंने फिल्म क्यों नहीं की. दरअसल उस दौरान मेरे निर्देशक ने मुझे बुलाया और राजकुमार बड़जात्या से मिलाया. साथ ही उन्होंने बताया कि इन्होंने फिल्म के लिए हीरोइन ढूंढ ली है और हीरो की तलाश कर रहे हैं. उन्होंने अपना कार्ड भी दिया, लेकिन मुझे नहीं पता था कि मैंने क्यों नहीं किया.'

साथ ही उन्होंने बताया कि मैं पागल थोड़ी ना था, जो यह फिल्म छोड़ता और मुझे यह भी नहीं पता था कि मैं कर पाऊंगा या नहीं. उन्होंने बताया कि मेरे पैर छोटे थे, इसलिए डांस नहीं कर पाता था. अपने फिल्मी करियर को लेकर उन्होंने कहा 46 साल की उम्र में ब्रेक मिला था और ऐसा करने वाला पहला निर्देशक था.

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मोदी- राहुल दोनों अच्छे लगते हैं

इस दौरान उन्होंने कहा कि आजकल वो शांत हैं वो कुछ नहीं बोलते हैं. साथ ही उन्होंने कहा, 'नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी दोनों अच्छे लगते हैं. अब मैं खामोश हूं और कुछ नहीं बोलता हूं. शांत होना ठीक नहीं है.' साथ ही उन्होंने बताया, 'मेरे मैनेजर का नाम राहुल गांधी है.'

'एक्टिंग की वजह से करता हूं सारे काम'

उन्होंने अपनी नई किताब 'तुम मेरी जान हो रजिया बी' के बारे में बताया और उसकी एक कविता भी पढ़ी. किताब के नाम को लेकर उन्होंने बताया कि राजिया बी नाम की एक महिला उनके जीवन में आई थी. अपनी तरह के काम करने को लेकर उन्होंने कहा, 'एक्टिंग प्राथमिकता है और एक्टिंग की वजह से ही सभी काम कर पाते हैं.

'7 दिन में तैयार हो गए थे गुलाल के गाने'

फिल्म गुलाल के गाने लिखने वाले मिश्रा ने यह भी बताया कि फिल्म के 8 गाने सात दिन में तैयार हो गए थे और जब अनुराग कश्यप को यह बताया तो कश्यप को कोई आश्चर्य नहीं हुआ. उसके बाद मुझे बुलाया गया और उन्होंने ये गाने कई लोगों को सुनाए.

पॉलीटिकली करेक्ट नहीं होना चाहिए साहित्य

साहित्य को पॉलीटिकली करेक्ट नहीं चाहिए. हकीकत नग्न होती है और उसे जामा नहीं पहनाया जा सकता और वो ही उसकी खूबसूरती है. साहित्य में आफको बेबाक होना जरूरी है. उन्होंने कहा कि अगर किसी दिन कोई पॉलिटिकल करेक्ट बात कह दी जाए तो रात को नींद नहीं आती है.

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'ना हिंदी आती है और ना ही उर्दू'

अपनी कविताओं में तीनों भाषाओं के मिश्रण को लेकर उन्होंने कहा कि मेरा तीनों भाषाओं में ही हाथ तंग है. उन्होंने कहा, 'गालिब साहब बहुत बड़े शायर है, लेकिन मुझे वो समझ नहीं आते, क्योंकि मेरी उर्दू उतनी अच्छी नहीं है. वहीं मेरी हिंदी रामधारी सिंह दिनकर जैसी नहीं है और अंग्रेजी के बारे में तो आप जानते ही हैं.'

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