Women's Day: इन 10 संवैधानिक अधिकारों के बारे में हर महिला को पता होना चाहिए

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हमारा देश खेल से लेकर तकनीक और शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है. इस प्रगति में पुरुषों के साथ महिलाओं का भी उतना ही योगदान है. महिलाएं प्रगति कर रही हैं और वो आगे बढ़ना चाहती हैं. लेकिन कई बार वे अधिकारों की जानकारी के अभाव में वो पीछे रह जाती हैं.

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प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

रोहित

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  • 08 मार्च 2018,
  • अपडेटेड 9:28 AM IST

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हमारा देश खेल से लेकर तकनीक और शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है. इस प्रगति में पुरुषों के साथ महिलाओं का भी उतना ही योगदान है. महिलाएं प्रगति कर रही हैं और वो आगे बढ़ना चाहती हैं. लेकिन कई बार वे अधिकारों की जानकारी के अभाव में वो पीछे रह जाती हैं. हम यहां कुछ ऐसे अधिकारों के बारे में आपको बता रहे हैं, जिससे महलिाएं अपना आर्थ‍िक, मानसिक, शारीरिक और यौन शोषण से बचाव कर सकें.

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1. समान वेतन का अधिकार: समान पारिश्रमिक अधिनियम के अनुसार, अगर बात वेतन या मजदूरी की हो तो लिंग के आधार पर किसी के साथ भी भेदभाव नहीं किया जा सकता.

2. ऑफिस में हुए उत्पीड़न के खिलाफ अधिकार: काम पर हुए यौन उत्पीड़न अधिनियम के अनुसार आपको यौन उत्पीड़न के खिलाफ शिकायत दर्ज करने का पूरा अधिकार है.

3. नाम न छापने का अधिकार: यौन उत्पीड़न की शिकार महिलाओं को नाम न छापने देने का अधिकार है. अपनी गोपनीयता की रक्षा करने के लिए यौन उत्पीड़न की शिकार हुई महिला अकेले अपना बयान किसी महिला पुलिस अधिकारी की मौजूदगी में या फिर जिलाधिकारी के सामने दर्ज करा सकती है.

4. घरेलू हिंसा के खिलाफ अधिकार: ये अधिनियम मुख्य रूप से पति, पुरुष लिव इन पार्टनर या रिश्तेदारों द्वारा एक पत्नी, एक महिला लिव इन पार्टनर या फिर घर में रह रही किसी भी महिला जैसे मां या बहन पर की गई घरेलू हिंसा से सुरक्षा करने के लिए बनाया गया है. आप या आपकी ओर से कोई भी शिकायत दर्ज करा सकता है.

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5. मातृत्व संबंधी लाभ के लिए अधिकार: मातृत्व लाभ कामकाजी महिलाओं के लिए सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि ये उनका अधिकार है. मातृत्व लाभ अधिनियम के तहत एक नई मां के प्रसव के बाद 6 महीने तक महिला के वेतन में कोई कटौती नहीं की जाती और वो फिर से काम शुरू कर सकती हैं.

6. कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ अधिकार: भारत के हर नागरिक का ये कर्तव्य है कि वो एक महिला को उसके मूल अधिकार- 'जीने के अधिकार' का अनुभव करने दें. गर्भाधान और प्रसव से पूर्व पहचान करने की तकनीक(लिंग चयन पर रोक) अधिनियम (PCPNDT) कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ अधिकार देता है.

7. मुफ्त कानूनी मदद के लिए अधिकार: बलात्कार की शिकार हुई किसी भी महिला को मुफ्त कानूनी मदद पाने का पूरा अधिकार है. स्टेशन हाउस आफिसर (SHO)के लिए ये जरूरी है कि वो विधिक सेवा प्राधिकरण (Legal Services Authority) को वकील की व्यवस्था करने के लिए सूचित करे.

8. रात में गिरफ्तार न होने का अधिकार: एक महिला को सूरज डूबने के बाद और सूरज उगने से पहले गिरफ्तार नहीं किया जा सकता, किसी खास मामले में एक प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही ये संभव है.

9. गरिमा और शालीनता के लिए अधिकार: किसी मामले में अगर आरोपी एक महिला है तो, उसपर की जाने वाली कोई भी चिकित्सा जांच प्रक्रिया किसी महिला द्वारा या किसी दूसरी महिला की उपस्थिति में ही की जानी चाहिए.

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10. संपत्ति पर अधिकार: हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत नए नियमों के आधार पर पुश्तैनी संपत्ति पर महिला और पुरुष दोनों का बराबर हक है.

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