जेनेरेशन कोई भी हो शनिवार के दिन का सबको बेसब्री से इंतजार होता है. खासकर उन लोगों को जो जॉब करते है. क्योंकि छुट्टी की जो खुशी शनिवार रात होती है वो शायद रविवार को नहीं होती. फ्राइडे को आदमी काम से वापस लौटता है और सोचता है अब दो दिन वो सुकून से काटेगा.
शनिवार रात उसे इस अफसोस में नहीं सोना पड़ता की उसे अगले दिन उठकर मंडे का मुंह देखना है. ऑफिस के लिए फिर खुद को तैयार करना है. ये कल्चर लंबे वक्त से चला आ रहे है. जहां लोग 5 दिन काम करने के बाद वीकेंड पर खुद को रिलैक्स देने और इन्जॉय करने का प्लान बनाते है.
वीकेंड इन्जॉय करने के सबके अपने तरीके हैं- कोई इसे मूवी देखकर इन्जॉय करता है. कोई फैमिली के साथ डिनर पर जाकर तो कोई घर पर ही अपने मन पसंद खाने को बनाकर और गाने लगाकर करता है. जहां मिलेनियल्स और उसके पहले के जेनेरेशन में वीकेंड्स बाहर जाकर इन्जॉय करते थे.
वहीं जेन-जी ने इसका उलटा अपनाया है. वे घर पर रहकर अपना वीकेंड इन्जॉय करना चाहते है. जेन-जी हर वीकेंड मूवी प्लान या डिनर प्लान नहीं करना पसंद करते वल्कि वो अपने ढीले-ढाले पजामों में बैठकर घर पर ही अपने ही तरीके से छुट्टी के ये दो दिन इन्जॉय करना चाहते है.
शनिवार रात है. दोस्तों के ग्रुप में पार्टी के प्लान बन रहे हैं, इंस्टाग्राम पर कोई क्लब की स्टोरी डाल रहा है तो कोई डिनर की तस्वीर. ऐसे में घर पर पजामा पहनकर अपनी पसंदीदा सीरीज देखना कभी ‘बोरिंग’ माना जाता था. लेकिन Gen Z ने इस सोच को थोड़ा बदल दिया है.
अब हर वीकेंड बाहर जाना या हर प्लान का हिस्सा बनना जरूरी नहीं है. अगर दोस्तों के बाहर जाने के बावजूद आपका मन घर पर रहने, कुछ अच्छा खाने और पूरी रात अपनी फेवरेट सीरीज देखने का है, तो इसमें कुछ भी मिस करने जैसा नहीं है.
यही FOMO से JOMO तक का सफर है- दूसरों के मजे को देखकर बेचैनी महसूस करने के बजाय अपनी शांति में खुशी ढूंढना. आजकल जेन-जी फोमो (फीयर ऑफ मिसिंग आउट) से ज्यादा जोमो (जॉय ऑफ मिसिंग आउट) फील कर रहे है.
FOMO और JOMO की बीच शायद दूसरी जेनेरेशन उलझती नजर आए, लेकिन जेन-जी का वर्डिक्ट क्लियर- JOMO एनीडे.
क्या जोमो का मतलब एंटीसोशल होना है?
JOMO का मतलब एंटी-सोशल होना नहीं है, बल्कि अपनी पसंद और कम्फर्ट को प्रायोरिटी देना है. हर इन्वीटेशन एक्सेप्ट करना और हर वीकेंड बाहर निकलने के कल्चर को जेन-जी लगातार ठुकराती नजर आ रही है. दोस्तों के साथ समय बिताना अपनी जगह है, लेकिन कभी अकेले रहना, आराम करना या अपनी पसंद की चीजें करना भी जरूरी है. क्योंकि हर खुशी भीड़ में नहीं मिलती, कुछ सुकून अपने कमरे में पजामा पहनकर अपनी फेवरेट सीरीज देखने, गाने सुनने और हॉबी में भी मिल जाती है.
कभी-कभी जिंदगी की सबसे अच्छी पार्टी वही होती है, जिसमें आप शामिल हुए ही नहीं. जब बाहर जाने के बजाय घर पर पजामा, पसंदीदा सीरीज और सुकून आपका प्लान हो. क्योंकि हर खुशी भीड़ का हिस्सा बनने में नहीं, अपनी पसंद चुनने में भी है. Gen Z के लिए अब कुछ मिस करना FOMO नहीं, JOMO है.
सारा सिंह