आजकल सोशल मीडिया खोलते ही कोई न कोई ऐसा मीम जरूर दिख जाता है, जो आपकी हंसी छुड़ा देता है. कभी नौकरी न मिलने का दर्द मीम बन जाता है, तो कभी ब्रेकअप, अकेलापन और पैसों की तंगी पर मजेदार पोस्ट देखने को मिल जाती हैं. खास बात ये है कि इन मीम्स को बनाने और शेयर करने वालों में जेन जी की बड़ी भूमिका है. जिस बात पर लोग कभी खुलकर चर्चा करने से बचते थे, जेन जी उसी पर मीम बनाकर अपनी बात कह देते हैं.
परेशानियों को हंसी में बदलने का तरीका
जेन जी के ह्यूमर की सबसे खास बात ये है कि वे मुश्किल हालात में भी हंसने का कोई न कोई बहाना ढूंढ लेते हैं. नौकरी नहीं मिल रही, महीने के आखिर में अकाउंट खाली है या ऑफिस में काम का दबाव बढ़ गया है, इन सभी पर मीम्स की कमी नहीं है. कई बार ये मीम्स सिर्फ मजाक नहीं होते, बल्कि उन फीलिंग्स को जाहिर करने का तरीका होते हैं, जिन्हें शब्दों में समझाना मुश्किल होता है.
डार्क ह्यूमर भी है पसंद
जेन जी के बीच डार्क ह्यूमर भी काफी पॉपुलर है. इसमें परेशानियों, असफलताओं और जिंदगी के मुश्किल एक्सपीरियंसेस को व्यंग्य और मजाक के जरिए दिखाया जाता है. मेंटल स्ट्रेस, ओवरथिंकिंग और फ्यूचर की चिंता जैसे विषय भी मीम्स का हिस्सा बन गए हैं. हालांकि, हर गंभीर मुद्दे पर मजाक करना सही नहीं होता.
मीम्स से मिलता है अपनापन
मीम्स लोगों को ये एहसास कराते हैं कि वे अपनी परेशानी में अकेले नहीं हैं. जब कोई युवा अपनी जैसी स्थिति पर बना मीम देखता है, तो उसे लगता है कि दूसरे लोग भी कुछ ऐसा ही अनुभव कर रहे हैं. यही वजह है कि लोग मीम्स को दोस्तों के साथ शेयर करके अपनी फीलिंग्स जाहिर करते हैं.
यह भी पढ़ें: Gen Z Macha Craze: माचा के दीवाने क्यों हो रहे हैं Gen Z? जानें इसकी खासियत
इसका एक उदाहरण कोरोना के दौरान देखने को मिला था. अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन में पब्लिश्ड 2021 की एक रिसर्च में 748 लोगों को शामिल किया गया. इसमें पाया गया कि कोरोना से जुड़े मीम्स देखने वाले लोगों ने कम तनाव महसूस किया.
ह्यूमर ताकत है, हल नहीं
जेन जी का मीम कल्चर दिखाता है कि वे परेशानियों को अलग नजरिए से देखना जानते हैं. उनके लिए हंसी सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि अपनी बात कहने और दूसरों से जुड़ने का तरीका भी है. हालांकि, हर परेशानी को मजाक में उड़ाना उसका हल नहीं है. जरूरत पड़ने पर अपनी फीलिंग्स को समझना और मदद मांगना भी उतना ही जरूरी है.
aajtak.in