शराब बनाते-बनाते, गलती से बना था डोसा! जानें कैसे हुआ था इस साउथ इंडियन नाश्ते का ‘इजाद’

डोसा जो दक्षिण भारत का पसंदीदा नाश्ता है. पहली बार डोसा कैसे बना था, इसको लेकर कई कहानियां हैं. तो आइए जानते हैं, डोसा के बारे में कौन-कौन सी कहानियों प्रचलित हैं.

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डोसा फेमस साउथ इंडियन डिश है. (Photo: ITG) डोसा फेमस साउथ इंडियन डिश है. (Photo: ITG)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 16 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:15 PM IST

सुनहरा और क्रिस्पी पतली सी परत....उसके अंदर आलू की मसालेदार फिलिंग...अलग-अलग चटनी और सब्जियों वाला सांबर...बस, ये मिल जाए तो हर किसी की डोसा खाने की दिली इच्छा पूरी हो जाती है. वैसे तो डोसा दक्षिण भारत का प्रमुख भोजन है लेकिन आज के समय में पूरे भारत में इसे काफी चाव से खाया जाता है. इसे घोचावल और उड़द दाल के घोल से बनाया जाता है. 

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आजकल डोसे कई तरह के होते हैं लेकिन इसका सबसे फेमस आज भी सादा मसाला डोसा ही है. इसमें एक डोसा या चावल की पतली सी परत होती है जिसे प्लेन डोसा के नाम से जाना जाता है. जब इसमें मसालेदार आलू की फिलिंग सरसों के बीज, कसा हुआ नारियल, हल्दी पाउडर, धनिया पत्ती और नींबू के साथ होती है तो मसाला डोसा बनता है.

लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये दक्षिण भारत का फेमस नाश्ता पहली बार कैसे बना था? हालांकि इसके बारे में काफी सारी कहानियां हैं जो अलग-अलग दावे करती हैं. तो आइए उन कहानियों के बारे में जान लीजिए. 

शराब बनाने के चक्कर में बना डोसा

वेबसाइट्स की लोककथा के मुताबिक,  डोसा एक उडुपी ब्राह्मण रसोइए का आविष्कार माना जाता था. दरअसल, वह अपनी धार्मिक बेड़ियों से आजाद होना चाहता था. ब्राह्मणों के लिए शराब निषिद्ध थी लेकिन उसने चावल को फर्मेंट करके शराब बनाने की कोशिश की, जो उसके समुदाय और उसकी मान्यताओं के खिलाफ था. 

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उसने चावल को फर्मेंट करने के लिए रखा और सुबह देखा कि वो बैटर खट्टा हो गया है लेकिन उससे भी शराब नहीं बनी. ऐसे में उसने गुस्से में कार उस बैटर को फेंका तो वो तवे पर जाकर गिर गया. उसने जब देखा तो एक पतली सी परत बन गई और जब उसे टेस्ट किया तो वह खाने में कुरकुरा और काफी टेस्टी लगा. बस यही डोसा का अविष्कार माना जाता है.

फूड हिस्टोरियन पी. थंकप्पन नायर के मुताबिक, डोसा की जड़ें उडुपी से ही जुड़ी हुई हैं. कन्नड़ में दोशा का मतलब 'पाप' होता है इसलिए उसकी कोशिश को यह नाम दिया गया और बाद में 'दोशा' को बदलकर 'डोसा' कर दिया गया.

खाना बचा तो रसोइए ने बनाया डोसा

डोसा की उत्पत्ति पर एक और कहानी और प्रचलित है. वो ये है कि चालुक्य राजा सोमेश्वर तृतीय ने अपने महल में एक पार्टी रखी थी जिसमें उन्होंने देखा कि काफी सारा खाना बच गया है. वो नहीं चाहते थे कि इतना सारा  खाना बर्बाद हो इसलिए उन्होंने अपने रसोइयों से कुछ क्रिएटिव बनाने को कहा. 

रसोइयों ने बचे हुए आलू को मसालों के साथ मिलाकर उसे प्लेन डोसा में भरकर इस्तेमाल कर लिया और उसे और तीखा बनाने के लिए तीखी लाल मिर्च के पेस्ट की एक परत डाली और उसे परोस दिया. इसे ही मसाला डोसा की उत्पत्ति मानाी जाती है.

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लेकिन डोसा 5वीं सदी से है और इसका जिक्र संगम लिटरेचर जैसे साउथ इंडियन लिटरेचर और मानसोल्लासा (संस्कृत इनसाइक्लोपीडिया) में भी किया गया है. हालांकि डोसा की सही जन्मस्थली पता नहीं है लेकिन माना जाता है कि इसकी शुरुआत उडुपी की मंदिर वाली गलियों से ही हुई थी.

प्राचीन ग्रंथों में डोसे का जिक्र

के.टी. अचाया के अनुसार, संगम साहित्य (पहली शताब्दी ईस्वी) में 'दोसाई' का उल्लेख मिलता है जो प्राचीन तमिल क्षेत्र से जुड़ा है. आठवीं शताब्दी के तमिल ग्रंथों में पहला लिखित प्रमाण है लेकिन कन्नड़ साहित्य में ये थोड़ा बाद आया. 12वीं शताब्दी में चालुक्य राजा सोमेश्वर तृतीय ने 'मनसोल्लासा' नामक संस्कृत विश्वकोश लिखा, जिसमें 'दोसका' की रेसिपी दी गई है. पुर्तगाली 16वीं सदी में आलू भारत लाए थे जो सस्ता और पौष्टिक था. उडुपी ब्राह्मणों ने उसकी फिलिंग बनाई थी. आज मसाला डोसा का स्वाद ही अलग है क्योंकि अब तेज मिर्च, करी पत्ता और हल्दी इस्तेमाल होने लगी है.

में मसाला डोसा के बारे में बताया गया है जिसके मुताबिक, शुरूआत में ब्राह्मण प्लेन डोसा चटनी के साथ खाते थे क्योंकि वो प्याज से परहेज करते थे. एक बार आलू खत्म हो गए तो रसोइयों ने ग्रेवी में कटा प्याज डाला, मसाले मिलाए, धीमी आंच पर पकाया. फिर इसे डोसे में भरकर साइड से फोल्ड किया और वो डोसा सिलेंडर शेप आ गया और प्याज छिप गया.

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अब इन कहानियों में से कौन सी कहानी पूरी तरह सही है, इस बारे में तो कहना मुश्किल है. लेकिन हां, ये कह सकते हैं जिसने भी और जैसे भी डोसे का इजाद किया वो काफी अच्छा किया क्योंकि ये स्वाद से भरपूर नाश्ता आज सभी का पसंदीदा है.

आज डोसे का मार्केट कैसा है?

डोसा रेस्टोरेंट मार्केट रिसर्च की के मुताबिक, डोसा से जुड़ा ग्लोबल रेस्टोरेंट मार्केट 2024 में करीब 1,22,640 करोड़ रुपये का था, जिसमें भारत का शेयर सबसे बड़ा है. इसमें एशिया पैसिफिक रीजन (मुख्यतः भारत) ने 58 प्रतिशत हिस्सा यानी करीब 71,400 करोड़ रुपये लिए. 

इडली-डोसा बैटर का भारत में अनऑर्गनाइज्ड मार्केट 1,500 से 4,000 करोड़ रुपये का है, जिसमें सिर्फ 5-10% ऑर्गनाइज्ड है.

स्विग्गी ने 2023-24 में 2.9 करोड़ डोसे डिलीवर किए थे यानी कि औसतन 122 डोसे हर मिनट. ये आंकड़े डोसे की पॉपुलैरिटी दिखाते हैं लेकिन कुल मार्केट साइज स्ट्रीट वेंडर्स समेत काफी बड़ा है.

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