How Long To Soak Clothes: कपड़े धोने का काम घर में तकरीबन हर रोज ही होता है. यूं तो ज्यादातर लोग कपड़े वॉशिंग मशीन में धोते हैं, लेकिन बहुत से कपड़े ऐसे होते हैं जिन्हें हाथ से धोया जाता है. किसी के कपड़ों पर पसीने के दाग होते हैं, तो किसी पर धूल-मिट्टी और खाने-पीने की चीजें लग जाती हैं. ऐसे में कपड़ों को साफ करने के लिए कई लोग उन्हें धोने से पहले डिटर्जेंट वाले पानी में भिगोकर रख देते हैं. कुछ लोग तो रात में ही कपड़ों को बाल्टी में डालकर छोड़ देते हैं और सुबह उठकर धोते हैं. उन्हें लगता है कि जितनी देर कपड़े भीगेंगे, उतनी ही अच्छी सफाई होगी. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऐसा करना कई बार कपड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है?
दरअसल, कपड़ों को जरूरत से ज्यादा देर तक पानी और डिटर्जेंट में छोड़ने से उनमें अजीब सी बदबू आ सकती है. कुछ कपड़ों का रंग फीका पड़ सकता है और नाजुक कपड़ों के रेशे भी खराब हो सकते हैं. इसलिए कपड़ों को भिगोने का भी एक सही समय होता है. आइए जानते हैं कि अलग-अलग तरह के कपड़ों को कितनी देर भिगोना चाहिए और किन गलतियों से बचना जरूरी है.
कपड़े धोने से पहले भिगोना क्यों है जरूरी?
कपड़ों को सीधे मशीन या बाल्टी में डालकर धोने के बजाय कुछ देर भिगोना कई बार फायदेमंद होता है. खासकर जब कपड़ों पर पसीना, धूल-मिट्टी या जिद्दी दाग लगे हों. पानी और डिटर्जेंट में भिगोने से कपड़ों पर जमी गंदगी ढीली पड़ने लगती है. इससे धोते समय दाग निकालना आसान हो जाता है और कपड़ों को बहुत ज्यादा रगड़ने की जरूरत भी नहीं पड़ती.
लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि कपड़ों को घंटों या पूरी रात भिगोकर छोड़ दिया जाए. सही समय तक भिगोना ही बेहतर सफाई में मदद करता है.
कितनी देर तक भिगोना चाहिए कपड़े?
कपड़ों को कितनी देर भिगोना है, यह उनकी गंदगी और कपड़े के फैब्रिक पर डिपेंड करता है.
रातभर भिगोकर छोड़ने से क्या नुकसान हो सकता है?
कई घरों में रात को कपड़ों को डिटर्जेंट वाले पानी में डालकर छोड़ने की आदत होती है. सुबह उठकर कपड़े धोना आसान जरूर लगता है, लेकिन रोजाना ऐसा करना सही नहीं है. लंबे समय तक पानी में पड़े रहने से कपड़ों में सीलन जैसी महक आने लग सकती है. खासकर जब बाल्टी में कपड़े एक-दूसरे के ऊपर दबे हों और उन्हें लंबे समय तक गीला छोड़ दिया जाए.
इस तरह भिगोने से कुछ कपड़ों के रंग पर भी असर हो सकता है. गहरे रंग के कपड़ों से रंग निकलकर दूसरे कपड़ों पर चढ़ सकता है. वहीं, रेशम, ऊन और लेस जैसे नाजुक कपड़ों के रेशे भी लंबे समय तक पानी में रहने से कमजोर हो सकते हैं. इसलिए रातभर कपड़े भिगोकर छोड़ने के बजाय कुछ देर भिगोकर समय पर धो लेना बेहतर है.
रेशम, ऊन और लेस के कपड़ों को न करें ज्यादा देर भिगोने की गलती
हर कपड़े को एक ही तरीके से धोना सही नहीं होता. कॉटन और डेनिम जैसे मजबूत कपड़े थोड़ी देर ज्यादा भिगोने पर भी संभल सकते हैं, लेकिन रेशम, ऊन और लेस जैसे नाजुक कपड़ों को लेकर थोड़ा सावधान रहना चाहिए.
ऐसे कपड़ों को लंबे समय तक पानी में छोड़ने से उनकी शेप बिगड़ सकती है या कपड़े की बनावट पर भी बुरा असर हो सकता है. इन्हें धोने से पहले हमेशा केयर लेबल पढ़ें. अगर कपड़े पर ड्राई क्लीन का निर्देश दिया गया है, तो उसे घर पर पानी में भिगोने से बचें.
ज्यादा डिटर्जेंट डालने से नहीं मिलते ज्यादा साफ कपड़े
कई लोगों को लगता है कि बाल्टी में ज्यादा डिटर्जेंट डालने से कपड़ों की सफाई अच्छी होगी. लेकिन यह भी एक आम गलती है. जरूरत से ज्यादा डिटर्जेंट इस्तेमाल करने पर वह कपड़ों के रेशों में रह सकता है. इससे कपड़ों पर सफेद निशान दिख सकते हैं और कभी-कभी अजीब सी महक भी आने लगती है.
इसलिए डिटर्जेंट हमेशा पैकेट पर बताई गई मात्रा के हिसाब से डालें. कपड़ों को धोने के बाद साफ पानी से अच्छी तरह खंगालना भी जरूरी है, ताकि उनमें साबुन या डिटर्जेंट न रह जाए.
रंगीन और सफेद कपड़ों को एक साथ न भिगोएं
कपड़े भिगोते समय एक और गलती से बचना चाहिए. रंगीन और सफेद कपड़ों को एक ही बाल्टी में डालकर न रखें. कुछ कपड़ों का रंग पानी में निकलने लगता है, जिससे सफेद या हल्के रंग के कपड़े खराब हो सकते हैं. इसलिए सफेद, हल्के और गहरे रंग के कपड़ों को अलग-अलग भिगोना और धोना बेहतर है.
इसके अलावा, कपड़े धोने के बाद उन्हें बाल्टी या वॉशिंग मशीन में ज्यादा देर तक गीला न छोड़ें. तुरंत निकालकर अच्छी तरह फैला दें, ताकि वे ठीक से सूख सकें. गीले कपड़ों को लंबे समय तक एक जगह रखने से भी उनमें बदबू आने लगती है.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क