बड़े-बड़े शहरों में लोग फ्लैट्स में रहते हैं. जगह कम और आबादी ज्यादा होने के कारण अक्सर फ्लैट छोटे होते हैं, जिनमें वेंटिलेशन के लिए छोटी-छोटी बालकनी दी जाती हैं. ज्यादातर लोग अपने घर की बालकनी को कपड़े सुखाने, वॉशिंग मशीन रखने,बाल्टी, पुराने डिब्बे और बेकार सामान तक रखने के लिए इस्तेमाल करते हैं. कहना गलत नहीं होगा कि धीरे-धीरे ये खूबसूरत और खुली बालकनी एक स्टोर रूम जैसी दिखने लगती है.
लेकिन अगर थोड़ी सी समझदारी दिखाकर बालकनी को सजाया जाए, तो आप कम जगह में भी इसे बैठने, चाय पीने, पौधे लगाने या काम करने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए महंगे फर्नीचर या बड़े रेनोवेशन की भी जरूरत नहीं है. बस जगह का सही इस्तेमाल करना जरूरी है.
पहले तय करें, बालकनी का इस्तेमाल किस काम के लिए करना है
घर की बालकनी को सजाने की शुरुआत करने के लिए सबसे पहले ये दिमाग लगाना जरूरी है कि आप उसे आखिर इस्तेमाल किस तरह से करना चाहते हैं. आप इसे सुबह चाय पीने और किताब पढ़ने की जगह बनाया जा सकता है. अगर आप घर से काम करते हैं तो इसे छोटा सा वर्क कॉर्नर भी बना सकते हैं. वहीं अगर कपड़े सुखाने के लिए बालकनी का इस्तेमाल जरूरी है, तो ऐसा इंतजाम करें जिससे कपड़े सूखने के बाद जगह खाली की जा सके.
फर्श नहीं, दीवारों का करें ज्यादा इस्तेमाल
छोटी बालकनी में फर्श की जगह बहुत कीमती होती है. इसलिए हर चीज फर्श पर रखने के बजाय दीवारों का इस्तेमाल करें. दीवार पर छोटी शेल्फ, वर्टिकल प्लांटर या फोल्डिंग टेबल लगाई जा सकती है. पौधों के लिए हैंगिंग प्लांटर भी अच्छा ऑप्शन है. इसी तरह कपड़े सुखाने के लिए रिट्रैक्टेबल क्लोथलाइन या फोल्डिंग स्टैंड इस्तेमाल किया जा सकता है.
इससे बालकनी में चलने और बैठने के लिए थोड़ी खुली जगह बची रहेगी. किराए के घर में रहते हैं तो बिना ड्रिलिंग वाले हुक और फ्री-स्टैंडिंग रैक इस्तेमाल करना अच्छा रहता है.
कुर्सी और छोटी टेबल रखकर बनाएं चाय कॉर्नर
बालकनी को बैठने की जगह बनाने के लिए बड़ा सोफा खरीदना जरूरी नहीं है. एक कंफर्टेबल कुर्सी, छोटा स्टूल और साइड टेबल भी काफी है. टेबल पर चाय का कप, किताब या लैपटॉप रखा जा सकता है. इस छोटे से सेटअप से बालकनी सुबह की चाय या शाम को कुछ देर बैठने के लिए एक प्यारा कोना बन जाएगी.
पौधे लगाएं, लेकिन बालकनी को जंगल न बनाएं
अगर आपको बालकनी में पौधे लगाना पसंद है, तो जरूर लगाएं. लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि ज्यादा पौधे लगाने से छोटी जगह और भी भरी-भरी लग सकती है. बालकनी में उतने ही पौधे लगाएं, जितने आसानी से संभाले जा सकें. पौधे खरीदने से पहले ये भी देखें कि वहां कितनी धूप आती है. कम धूप वाली जगह के लिए अलग और ज्यादा धूप वाली जगह के लिए अलग पौधे अच्छे रहेंगे. रैलिंग पर गमले लगाते समय उनकी सेफ्टी का भी खास ध्यान रखें. भारी गमलों को अनस्टेबल जगह या किनारे पर रखने से बचें.
एक कोने को बनाएं छोटा सा वर्क फ्रॉम होम स्पेस
अगर घर से काम करते हैं और कमरे में जगह कम है, तो बालकनी का एक हिस्सा काम आ सकता है. दीवार पर फोल्डिंग टेबल लगाई जा सकती है, जिसे काम खत्म होने के बाद बंद कर दें. इससे वही जगह शाम को बैठने के काम भी आ सकती है. हालांकि, भारत में जिस तरह से गर्मी पड़ती है, उसे देखते हुए बालकनी में काम करने से पहले धूप और गर्मी का इंतजाम करना जरूरी है. जरूरत के हिसाब से पर्दा, बांस की स्क्रीन या शेड लगाया जा सकता है.
कपड़े सुखाएं, लेकिन पूरी बालकनी को लॉन्ड्री जोन न बनाएं
भारतीय घरों में बालकनी में कपड़े सुखाना आम बात है. इसमें कोई परेशानी नहीं है. लेकिन दिक्कत तब होती है जब गीले कपड़े, बाल्टी, कपड़े सुखाने का स्टैंड और सफाई का सामान हर समय वहीं पड़ा रहता है. इसके लिए फोल्डिंग या रिट्रैक्टेबल ड्राइंग रैक का इस्तेमाल करें. कपड़े सूखने के बाद रैक को हटा दें या मोड़कर एक तरफ रख दें.
बाल्टी, पोछा और सफाई के सामान के लिए भी एक छोटा स्टोरेज यूनिट रख सकते हैं. इससे बालकनी साफ और ऑर्गेनाइज्ड नजर आ सकती है.
डेकोरेशन से ज्यादा जरूरी है गर्मी और बारिश से बचाव
बालकनी को सजाते समय सिर्फ खूबसूरती पर ध्यान न दें. भारत में तेज गर्मी, बारिश और धूल को देखते हुए फर्नीचर और बाकी सामान चुनना ज्यादा जरूरी है. ऐसी चीजें रखें जिन्हें आसानी से साफ किया जा सके और जो मौसम का असर झेल सकें. बारिश के दिनों में कुशन और कपड़े वाली चीजों को अंदर रखना अच्छा रहता है.
थोड़ी जगह खाली भी छोड़ें
बालकनी के हर कोने को कुर्सी, गमले, टेबल और डेकोरेटिव आइटम से भरना जरूरी नहीं है. थोड़ी खुली जगह जरूर छोड़ें. यही खाली हिस्सा बालकनी को खुला और कंफर्टेबल महसूस कराएगा. अगर जगह हो तो यहां कुछ देर खड़े होकर चाय पी सकते हैं, स्ट्रेचिंग कर सकते हैं या बस बाहर की हवा का मजा ले सकते हैं.
कई बार बालकनी को खूबसूरत बनाने का सबसे अच्छा तरीका उसमें नई चीजें जोड़ना नहीं, बल्कि गैरजरूरी सामान हटाना होता है. पुराने डिब्बे, टूटी कुर्सी और इस्तेमाल न होने वाले सामान को हटाकर ही देखिए, जगह अपने आप बदल जाएगी.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क