दिल के मरीजों के लिए सामाजिक सहयोग है बहुत जरूरी

दिल के मरीजों के लिए सामाजिक परिस्थितियां बहुत मायने रखती हैं. सामाजिक संबंध बीमा‍री पर गहरा असर डालते हैं. यह न सिर्फ शारीरिक सेहत के लिए जरूरी है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाता है. परिवार और दोस्तों का सहयोग ऐसे मरीजों को ठीक होने में मदद करता है.

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हार्ट अटैक हार्ट अटैक

भूमिका राय / IANS

  • नई दिल्ली,
  • 23 जुलाई 2016,
  • अपडेटेड 4:40 PM IST

अगर आपको हार्ट अटैक आ चुका है तो आपके लिए अकेले रहना खतरनाक हो सकता है. दिल का दौरा पड़ने के बाद बाद अकेले रहने से जल्दी मौत की आशंका बढ़ जाती है. हार्ट केयर ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ के.के. अग्रवाल के अनुसार, ऐसे मरीज का अकेला रहना खतरनाक हो सकता है.

अमेरिकन जरनल ऑफ कार्डियॉलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन का हवाला देते हुए डॉ. अग्रवाल ने कहा कि दिल का दौरा पड़ने के एक साल बाद मौत होने की आशंका अकेले रह रहे व्यक्ति और किसी के साथ रह रहे शख्स में एक सी होती है. लेकिन चार साल के अंतराल में अकेले रह रहे मरीज की मौत की आशंका 35 फीसदी बढ़ जाती है.

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दिल के मरीजों के लिए सामाजिक संबंध बीमा‍री पर गहरा असर डालते हैं. यह न सिर्फ शारीरिक सेहत के लिए जरूरी है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाता है. परिवार और दोस्तों का सहयोग ऐसे मरीजों को ठीक होने में मदद करता है.

जो लोग अकेले रहते हैं उनकी सेहत में सुधार नहीं हो पाता है क्योंकि उन्हें दवाइयां लेने, बतायी गई एक्सरसाइज करने के लिए कोई बोलने वाला नहीं होता है. न ही उन्हें वो ख्याल मिल पाता है जिसकी उन्हें जरूरत होती है. ऐसे में इन मरीजों की मौत की आशंका बढ़ जाती है.

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