सौरव दास और आशुतोष रांका कोर्ट से रिहा हुए हैं बरी नहीं, जानें कानूनी दांव-पेच

सौरव दास और आशुतोष रांका जेल से रिहा हो गए हैं, लेकिन अभी बरी नहीं हुए हैं. कोर्ट के इस फैसले के पीछे क्या है कानूनी पेच, जानिए.

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जेल से बाहर आए सौरव-आशुतोष. (Photo: ITG) जेल से बाहर आए सौरव-आशुतोष. (Photo: ITG)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 21 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 10:29 PM IST

सौरव दास और आशुतोष रांका तिहाड़ जेल से बाहर आ गए हैं, लेकिन उन्हें मामले में बरी नहीं किया गया है. दिल्ली की स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट ने दोनों के जमानत बांड स्वीकार करने के बाद रिहाई का आदेश दिया. यह फैसला शांति बनाए रखने से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया के तहत आया है. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि कोर्ट से रिहाई मिलने का क्या मतलब है और मामले की जांच जारी रहने के बावजूद दोनों को जेल से बाहर आने की अनुमति कैसे मिली.

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कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के दोनों नेताओं को 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था. उन पर बिना अनुमति प्रदर्शन करने, बैरिकेडिंग तोड़ने और पहले दिए गए शांति बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने के आरोप लगाए गए. 14 अक्टूबर को उन्हें तिहाड़ जेल भेज दिया गया. बाद में जमानतदारों से जुड़ी जानकारी स्पष्ट नहीं होने के कारण उनकी हिरासत बढ़ाई गई.

यह भी पढ़ें: कोर्ट में दिया माफीनामा, पीस बॉन्ड भी भरेंगे... इन शर्तों पर सौरव दास और आशुतोष रांका को मिली जमानत

BNSS की धारा 130 और 135 का क्या है मतलब?

BNSS की धारा 130 के तहत मजिस्ट्रेट उस व्यक्ति को लिखित आदेश देकर बता सकते हैं कि शांति बनाए रखने के लिए उससे बांड क्यों भरवाया जा रहा है. इसके बाद धारा 135 के तहत मजिस्ट्रेट पुलिस की ओर से दी गई जानकारी की सच्चाई की जांच करते हैं. जरूरत पड़ने पर वे आगे के सबूत भी देख सकते हैं.

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इस जांच के दौरान अगर मजिस्ट्रेट को लगता है कि शांति भंग होने से रोकने के लिए तुरंत कदम उठाना जरूरी है, तो धारा 135 के तहत व्यक्ति से शांति बनाए रखने के लिए बांड या जमानत बांड भरवाया जा सकता है. बांड जमा नहीं होने पर जांच पूरी होने तक हिरासत में रखने का प्रावधान भी है. इसका मतलब यह नहीं कि नोटिस मिलते ही व्यक्ति दोषी साबित हो गया.

50-50 हजार के मुचलके पर कैसे मिली रिहाई?

21 अक्टूबर को पुलिस ने दोनों की हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की मांग की, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया. दोनों ने 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके के साथ जमानतदार पेश किए. कोर्ट ने बांड स्वीकार कर उनकी रिहाई का आदेश दिया.

निजी मुचलका कोर्ट को दिया गया कानूनी भरोसा है कि व्यक्ति तय शर्तों का पालन करेगा. यह सजा नहीं है. दोनों ने लिखित आश्वासन दिया कि वे शांति भंग नहीं करेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि जंतर-मंतर को कानूनी रूप से दोबारा प्रदर्शन स्थल घोषित किए जाने तक वहां प्रदर्शन के लिए लोगों को नहीं बुलाएंगे. भविष्य में संविधान के दायरे में प्रदर्शन करने का भरोसा भी दिया.

अगली सुनवाई पर क्या होगा?

दोनों को हर सुनवाई पर कोर्ट में पेश होना होगा. पुलिस को जमानतदारों की जांच रिपोर्ट भी जमा करनी है. मामले की अगली सुनवाई 23 अक्टूबर 2026 को दोपहर 3 बजे होगी. फिलहाल दोनों को रिहाई मिली है, मामले में बरी किए जाने का फैसला नहीं आया है. जांच की प्रक्रिया अभी जारी है.

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